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'अपने फैसले पर भरोसा नहीं रहता', जिमखाना केस की सुनवाई से अलग हुए प्रतीक जालान

दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने दिल्ली जिमखाना क्लब से जुड़े मुकदमे की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। उन्होंने कहा कि कई बार व्यक्ति को अपने ही फैसले पर भरोसा नहीं रहता।

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दिल्ली हाई कोर्ट, न्यायमूर्ति प्रतीक जालान, Photo Credit-ChatGPT

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दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने बुधवार को दिल्ली जिमखाना क्लब से जुड़े मुकदमे की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने निर्देश दिया कि ‘दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड स्टाफ वेल्फेयर एसोसिएशन’ की ओर से दायर मामले की सुनवाई शुक्रवार को किसी दूसरी पीठ के सामने की जाए। न्यायमूर्ति जालान ने कहा कि मैं इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर रहा हूं। 

 

उन्होंने कहा कि कुछ ऐसे मामले होते हैं, जिनमें व्यक्ति को अपने ही फैसले पर भरोसा नहीं रहता। न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने कहा, 'इस मामले से जुड़े व्यक्तिगत पहलू काफी ज्यादा हैं। इसलिए बेहतर होगा कि इस मामले की सुनवाई कोई दूसरा न्यायाधीश करे।' 

5 जून तक जमीन खाली करने का निर्देश

जिमखाना क्लब के सदस्य विजय खुराना और दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन ने भूमि एवं विकास कार्यालय (एलएंडडीओ) के 22 मई के आदेश के खिलाफ अलग-अलग मुकदमे दायर किए हैं। इस आदेश के तहत औपनिवेशिक दौर के दिल्ली जिमखाना क्लब की स्थायी लीज डीड रद्द कर दी गई थी। साथ ही क्लब को रक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत और सुरक्षित करने के लिए 5 जून तक जमीन खाली कर वापस करने का निर्देश दिया गया था।   

 

केंद्र सरकार ने मुख्य मामले में दाखिल अपने जवाब में कहा है कि इन सभी याचिकाओं को खारिज किया जाना चाहिए। केंद्र का कहना है कि तीसरे पक्ष के लोग सरकार और क्लब के बीच हुई, अब समाप्त की जा चुकी लीज डीड से जुड़े अधिकारों को लागू करने से अधिकारियों को नहीं रोक सकते। जिमखाना क्लब के कर्मचारियों ने अपनी याचिका में बताया है कि वे क्लब में रसोइये, वेटर, सफाई कर्मचारी, माली, मैदान की देखभाल करने वाले कर्मचारी, इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर, लाइफगार्ड और सुरक्षा कर्मी के तौर पर काम करते हैं। 

नोटिस को रद्द करने की मांग 

इसके अलावा, उन्होंने अपनी नौकरी और आजीविका बचाने के साथ-साथ संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(जी) और 21 के तहत मिले मौलिक अधिकारों की सुरक्षा की मांग की है। केंद्र के 22 मई के नोटिस को रद्द करने की मांग करते हुए कर्मचारियों ने कहा कि दिल्ली जिमखाना क्लब उनके लिए सिर्फ मनोरंजन की जगह नहीं, बल्कि उनके लिए काम करने की जगह है।  

 

दूसरी ओर क्लब सदस्य विजय खुराना ने अपनी याचिका में कहा है कि रक्षा बुनियादी ढांचे और सुरक्षा का हवाला देते हुए केंद्र ने जो कारण बताए हैं, वे अस्पष्ट और सामान्य हैं। उनके मुताबिक, ये कारण सिर्फ क्लब को हटाने का बहाना हैं। खुराना ने आरोप लगाया है कि यह कदम कानून में तय प्रक्रिया का पालन किए बिना क्लब को जबरन खाली कराने की कोशिश है।

 

अपने अंतरिम आवेदन में विजय खुरानाने कहा है कि 29 जून का नोटिस पूरी तरह गलत और समय से पहले लगाए गए अनुमानों पर आधारित है। उनका कहना है कि इससे लंबित मामले के मूल मुद्दे पर भी असर पड़ता है। आवेदन में यह भी कहा गया है कि कारण बताओ नोटिस समय से पहले जारी किया गया, क्योंकि इसमें पहले ही यह मान लिया गया कि जिमखाना क्लब की स्थायी लीज कानूनी रूप से खत्म हो चुकी है।

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