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'उनके पास पत्थर-चाकू थे', घायल इंस्पेक्टर ने बताई भयावह आपबीती

जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन में प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस के दो जवानों को बुरी तरह से पीटा। दोनों जवानों के बयान सामने आए हैं।

Delhi police cjp protest

घायल घायल इंस्पेक्टर और हेड कांस्टेबल। Photo Credit- ANI

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जंतर-मंतर पर जारी कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन में देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगा जा रहा है। इस आंदोलन के बीच में मारपीट की भी खबरें और वीडियो सामने आ रहे हैं, जिसमें पुलिस-सुरक्षाकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच हाथापाई हो रही है। इसी हाथापाई में दिल्ली पुलिस के दो जवान बुधवार (22 जुलाई) को घायल हो गए।

 

घायल होने वालों में दिल्ली पुलिस इंस्पेक्टर नंदकिशोर और हेड कांस्टेबल बाबू लाल हैं। इंस्पेक्टर नंदकिशोर ने प्रदर्शन के दौरान वहां की घटना बताते हुए कहा कि वह जंतर-मंतर पर नाइट ड्यूटी पर थे, जब उनके ऊपर हमला किया गया।

 

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'मुझे डर नहीं लगा क्योंकि वे छात्र थे'

 

उन्होंने कहा, 'मैं जंतर-मंतर पर नाइट ड्यूटी पर था। भीड़ इतनी ज्यादा थी कि मुझे गाड़ी पार्क करने की जगह नहीं मिली। मुझे हनुमान मंदिर रोड पर एक जगह मिली। उसके बाद, मैं वहां से पैदल चल रहा था। वहां बहुत सारे छात्र थे। मुझे डर नहीं लगा क्योंकि वे छात्र थे।'

 

लगभग 150 लोगों ने हमला किया

 

इंस्पेक्टर ने आगे कहा, 'जब मैं संसद मार्ग पहुंचा तो वहां लगभग 2.5 हजार लोगों की भीड़ मौजूद थी। इसके बाद वह अचानक गुस्से में आ गए और मेरी तरफ आकर कहने लगे कि आंसू गैस के गोले छोड़े गए हैं, हम पर हमला हो रहा है... फिर उन्होंने मुझे पीछे से लात मारी और घूंसे मारने शुरू कर दिए। लगभग 150 लोग थे जिन्होंने मुझ पर हमला किया। उनके हाथ में डंडे, लाठी और कड़े थे। एक पुलिस टीम थी जिसने मुझे बचाया। बाद में मुझे RML हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।'

 

 

 

 

सीनियर अफसर भी घायल

 

उन्होंने कहा, 'सीनियर अफसर भी घायल हुए हैं... ये छात्र नहीं हैं जिन्होंने पुलिस की वर्दी या CRPF वालों को देखकर इस तरह हमला किया है। वे वर्दी वालों को टारगेट कर रहे हैं। वे असामाजिक तत्व हैं। जो भी पुलिस की वर्दी को देखकर, चाहे वह रैपिड एक्शन फोर्स का हो, पुलिस का हो या CRPF का वे वर्दी वालों को देखते ही पीट रहे हैं। पुलिस की गाड़ियों को भी नुकसान पहुंचाया गया। जो भी अकेला निकल रहा है, उसे निशाना बनाया जा रहा है।'

 

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'पत्थर, डंडे और चाकू उनके पास थे'

 

वहीं, इसी हमले में घायल हेड कांस्टेबल बाबू लाल ने बताया, 'अचानक से भीड़ आ गई और मैं कुछ समझ नहीं पाया। उन्होंने मुझे पकड़ लिया और बहुत बुरी तरह से पीटा। कम से कम 3-4 हजार लोग रहे होंगे हैं। पत्थर, डंडे और चाकू उनके पास थे। मुझे नहीं पता वे कहां से आए थे। उनमें से कुछ अच्छे लोग भी थे। उन्होंने ही मुझे बचाया। उन्होंने मेरा सिर फोड़ दिया। उन्होंने मेरा हाथ तोड़ दिया। मेरे सिर पर भी गहरी चोट है। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है। यह कल शाम को हुआ।'

 

 

 

 

उन्होंने आगे कहा, 'हम सुबह से वहां ड्यूटी पर थे। हमारी ड्यूटी सुबह 8:00 से वहां चल रही थी। भीड़ पूरे दिन वहां थी। वहां काफी भीड़ थी, और शाम को लोग और भी गुस्सैल हो गए। यह द पार्क होटल के पास हुआ... उन्होंने मुझे काफी पीटा। फिर उनमें कुछ अच्छे लड़के भी थे। उन्होंने मुझे बचाया। कुछ लोगों के हाथ में चाकू भी था। मैं उन्हें नहीं पहचानता।'


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