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श्रीलंका में फंसे 400 भारतीय देश पहुंचे, दित्वा को लेकर IMD की चेतावनी

दित्वा तूफान की वजह से श्रीलंका में फंसे 400 लोगों को देश वापस लाया गया है। इस घटना में अब तक 193 लोगों की मौत हो चुकी है।

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दित्वा तूफान । Photo Credit: PTI

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श्रीलंका में चक्रवात दित्वा के कारण भारी बारिश और बाढ़ से कोलंबो हवाई अड्डे पर फंस गए कम से कम 400 भारतीय नागरिकों को रविवार को सुरक्षित भारत वापस लाया गया। श्रीलंका के अधिकारियों ने मीडिया को बताया कि इनमें से करीब 150 लोगों को सी-130 विमान से दिल्ली भेजा गया, जबकि 250 अन्य को आईएल-76 विमान से तिरुवनंतपुरम ले जाया गया।

 

ये दोनों विमान श्रीलंका के भंडारनायके इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर चक्रवात से प्रभावित लोगों के लिए भोजन और मानवीय सहायता लेकर पहुंचे थे। चक्रवात के कारण हवाई यात्रा रुक गई थी, जिससे यात्री कई दिनों तक फंसे रहे। अब सभी सुरक्षित हैं।

 

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चक्रवात दित्वा भारत के करीब पहुंचा

भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, चक्रवात दित्वा अभी दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में स्थित है और उत्तर की ओर बढ़ रहा है। यह उत्तरी तमिलनाडु-पुडुचेरी तट के पास 11.4 डिग्री उत्तर अक्षांश और 80.6 डिग्री पूर्व देशांतर पर केंद्रित है।

 

आईएमडी ने चेतावनी दी है कि यह तूफान आंध्र प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश बढ़ाएगा। तमिलनाडु, पुडुचेरी और दक्षिण आंध्र प्रदेश में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश जारी है। चक्रवात उत्तरी तमिलनाडु तट के समानांतर चल रहा है।

 

 

 

पुडुचेरी में खतरे का संकेत

पुडुचेरी तट के नजदीक पहुंचते ही वहां के बंदरगाह पर आईएमडी ने तूफान की चेतावनी जारी कर दी है। यह सबसे बड़ा खतरे का संकेत है, जो बताता है कि चक्रवात तट पार करने वाला है। फिलहाल पुडुचेरी में मध्यम बारिश हो रही है, क्योंकि तूफान का केंद्र भारतीय तट के करीब आ गया है।

 

तमिलनाडु के राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री केकेएसएसआर रामचंद्रन ने रविवार को चेन्नई के राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र पहुंचकर स्थिति की समीक्षा की। चक्रवात के असर से प्रभावित इलाकों में अधिकारी सतर्क हैं। लोग घरों में रहने और सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।

कोलंबो के इलाके तबाह

वहीं श्रीलंका में चक्रवात दित्वा के बाद भयानक बाढ़ ने कोलंबो के कुछ इलाकों को तबाह कर दिया है। मौतों का आंकड़ा 193 हो गया है और 228 लोग अभी भी लापता हैं। अल जज़ीरा ने आपदा प्रबंधन केंद्र (डीएमसी) के बयान के हवाले से बताया।

 

चक्रवात की वजह से पूरे हफ्ते तेज बारिश हुई, जिससे श्रीलंका में भारी बाढ़ और भूस्खलन देखने को मिले। अब रेस्क्यू टीमों ने रास्ते साफ किए हैं, इसलिए मध्य इलाके में तबाही का पूरा हाल सामने आ रहा है।

 

डीएमसी के एक अधिकारी ने कहा, 'चक्रवात तो चला गया, लेकिन ऊपरी इलाकों में हो रही भारी बारिश से केलानी नदी के किनारे नीचे के इलाके बाढ़ में डूब रहे हैं।' राजधानी के उत्तरी हिस्सों में भी बाढ़ का पानी बढ़ रहा है।

 

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कोलंबो से 250 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में मनम्पितिया में पानी उतरने पर भारी तबाही दिखी। 72 साल के रहने वाले एस सिवनंदन ने कहा, 'ये कस्बा बाढ़ का शिकार तो रहता है, लेकिन इतना पानी कभी नहीं देखा।' उनके मुताबिक घर, दुकानें और सड़कें बर्बाद हो गईं।

 

ये आपदा मेडिकल इमरजेंसी भी बन गई है। खून की सप्लाई खतरे में है। ब्लड बैंक के प्रमुख लक्ष्मण एडिरिसिंघे ने बताया कि शनिवार को सिर्फ 236 यूनिट खून इकट्ठा हुआ, जबकि रोज 1500 की जरूरत है।

 

उन्होंने कहा, 'बाढ़ और बारिश की वजह से हम मोबाइल कैंप नहीं लगा पाए। लोग अस्पतालों और ब्लड बैंक में खून दान करें।'

श्रीलंका में इमरजेंसी घोषित

अधिकारी चेतावनी दे रहे हैं कि पहाड़ी ढलान पानी सोख चुके हैं, इसलिए आने वाले दिनों में नए भूस्खलन हो सकते हैं। राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने शनिवार को इमरजेंसी घोषित की और विदेशी मदद मांगी। भारत ने सबसे पहले मदद भेजी - राहत सामान और हेलिकॉप्टर। जापान ने भी सहायता का वादा किया।

 

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चक्रवात ने 25,000 से ज्यादा घर नष्ट कर दिए। 1 लाख 47 हजार लोग अस्थायी शरणों में हैं और 9 लाख 68 हजार को मदद चाहिए। सेना और आम लोग मिलकर राहत कार्य कर रहे हैं।यह श्रीलंका की 2017 के बाद सबसे घातक प्राकृतिक आपदा है, जब बाढ़-भूस्खलन से 200 से ज्यादा मौतें हुई थीं। इस सदी की सबसे भयानक बाढ़ जून 2003 में आई थी, जिसमें 254 लोग मारे गए थे।

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