दिवाली के मौके पर लोग जमकर खरीदारी कर रहे हैं। इस बीच प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने लोगों को ऑनलाइन शॉपिंग में होने वाली ठगी से सावधान किया है। PIB ने बताया है कि साइबर ठग दिवाली के नाम पर सस्ते सामान और भारी छूट का लालच देकर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। इसके लिए वे फर्जी वेबसाइट, नकली ऑफर और संदिग्ध लिंक का इस्तेमाल करते हैं। इनके जरिए लोगों की निजी और बैंक से जुड़ी जानकारी चुराई जा सकती है।
PIB ने लोगों को त्योहारों के नाम पर मिलने वाले फर्जी डिस्काउंट और ऑनलाइन शॉपिंग स्कैम से सावधान रहने की सलाह दी है। PIB फैक्ट चेक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर 'द फुलझड़ी ऑफ फिशिंग' नाम से एक पोस्ट शेयर की है। इसमें दिवाली की फुलझड़ी के जरिए ऑनलाइन ठगी के खतरे के बारे में बताया गया है।
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क्या है 'फिशिंग की फुलझड़ी'?
PIB ने बताया कि हर आकर्षक ऑनलाइन ऑफर भरोसेमंद नहीं होता। कई बार भारी छूट का लालच देकर भेजे गए लिंक लोगों को ठगी वाली वेबसाइट पर पहुंचा सकते हैं। इसके लिए चल रही जागरूकता अभियान में दिवाली की 'फुलझड़ी' का उदाहरण दिया गया है। इसके जरिए यह समझाया गया है कि कैसे ऑनलाइन दिखने वाले आकर्षक ऑफर के पीछे साइबर फ्रॉड छिपा हो सकता है।
इस पोस्टर में लिखा है, 'कुछ लिंक खुशियां लाते हैं, तो कुछ साइबर फ्रॉड का कारण बनते हैं।' इसमें त्योहारों के उत्साह की तुलना संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से होने वाले खतरों से की गई है।' इसमें यह भी चेतावनी दी गई है कि ठग फर्जी डील्स का लालच देकर लोगों को धोखाधड़ी वाले ट्रांजैक्शन में फंसा सकते हैं, जिससे उनकी डिजिटल सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले जांचे
पोस्टर शेयर करते हुए PIB फैक्ट चेक ने लिखा, 'त्योहारों के ऑफर लुभावने लग सकते हैं, लेकिन साइबर फ्रॉड के छिपे खतरों से सावधान रहें! ठग अक्सर आपकी निजी और वित्तीय जानकारी चुराने के लिए फर्जी डिस्काउंट, त्योहारों की डील्स और फिशिंग लिंक का इस्तेमाल करते हैं। किसी भी लिंक पर क्लिक करने या पेमेंट करने से पहले वेबसाइट या ऑफर की असलियत जरूर जांच लें। इस दिवाली, अपने जश्न को शानदार बनाएं लेकिन ध्यान रखें कि आपका निजी डेटा गलत हाथों में न जाए। क्लिक करने से पहले सोचें। पेमेंट करने से पहले जांच लें।'
ऑनलाइन शॉपिंग स्कैम से कैसे बचें?
एडवाइजरी में खरीदारों को सलाह दी गई है कि वे त्योहारों के ऑफर देखते समय सावधानी बरतें, खासकर उन ऑफर्स के मामले में जो अनजान वेबसाइटों, मैसेज या सोशल मीडिया लिंक के जरिए आते हैं। ठग फर्जी शॉपिंग वेबसाइट बना सकते हैं या लोगों को गुमराह करने वाले डिस्काउंट ऑफर फैला सकते हैं, ताकि वे अपनी संवेदनशील जानकारी उनके साथ शेयर कर दें। कई बार, किसी खतरनाक लिंक पर क्लिक करने से खरीदार ऐसे फर्जी पेमेंट पेज पर पहुंच सकते हैं, जिन्हें बैंकिंग जानकारी चुराने के लिए ही बनाया गया होता है।
ऐसे में कुछ भी खरीदने से पहले, ग्राहकों को वेबसाइट की असलियत जांच लेनी चाहिए, संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचना चाहिए और अपना पासवर्ड, OTP या बैंकिंग क्रेडेंशियल्स किसी के साथ शेयर नहीं करने चाहिए। गृह मंत्रालय के अनुसार, जिन लोगों को लगता है कि वे ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार हो गए हैं, वे 'नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल' के जरिए इसकी शिकायत कर सकते हैं या साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर सकते हैं।