प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल में छह और दिल्ली में चार जगहों पर छापेमारी की। मगर कोलकाता में इंडियन पॉलिटिकल ऐक्शन कमेटी (I-PAC) के डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर और दफ्तर पर छापेमारी पर हंगामा मच गया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसका विरोध किया और छापेमारी के बीच ही प्रतीक जैन के घर पहुंच गईं। अब ईडी ने कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करके ममता बनर्जी सरकार पर जांच में बाधा डालने और खुद सीएम ममता बनर्जी पर सबूत ले जाने का आरोप लगाया। शुक्रवार को जस्टिस सुव्रा घोष मामले की सुनवाई करेंगी।
ईडी ने आरोप लगाया कि तलाशी के दौरान साउथ कोलकाता के डीसीपी और सरानी पुलिस स्टेशन के प्रभारी एक अन्य कर्मचारी के साथ मौके पर पहुंचे। कुछ ही देर बाद कोलकाता पुलिस के कई अधिकारियों के साथ पुलिस कमिश्नर भी वहां पहुंचे। अधिकृत अधिकारी ने उन्हें कार्रवाई की जानकारी दी और अपना पहचान पत्र भी दिखाया।
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ईडी ने आगे कहा कि पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारियों के साथ आने तक कार्रवाई शांतिपूर्ण और पेशेवर तरीके से चल रही थी। ईडी ने आरोप लगाया, 'ममता बनर्जी प्रतीक जैन के घर में घुसीं और फिजिकल डॉक्यूमेंट्स और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस समेत अहम सबूत ले गईं। इसके बाद सीएम का काफिला I-PAC के ऑफिस पहुंचा। जहां से ममता बनर्जी, उनके सहयोगियों और पुलिस कर्मियों ने जबरन फिजिकल डॉक्यूमेंट्स और इलेक्ट्रॉनिक सबूत हटा दिए। इस वजह से चल रही कार्रवाई में रुकावट आई है।'
कोयला तस्करी मामले में हुई छापेमारी
प्रवर्तन निदेशालय ने बताया कि अनूप माझी और अन्य लोगों के खिलाफ 27 नवंबर 2020 को सीबीआई कोलकाता में दर्ज एफआईआर के आधार पर आज तलाशी अभियान चलाया गया। इस मामले में ईडी ने 28 नवंबर 2020 को ही केस दर्ज किया था।
8 जनवरी 2026 की छापेमारी में कोयला तस्करी से होने वाली कमाई, हवाला ऑपरेटर और हैंडलर से जुड़े लोगों को शामिल किया गया है। इसमें आई- पैक भी हवाला के पैसे से जुड़ी एक संस्था है। गुरुवार को पश्चिम बंगाल में 6 और दिल्ली के चार ठिकानों पर छापेमारी की गई।
जांच में पता चला कि अनूप माझी की अगुवाई वाला कोयला तस्करी सिंडिकेट पश्चिम बंगाल के ईसीएल लीजहोल्ड इलाकों से कोयला चुराता था और अवैध रूप से खनन करता था। बाद में इस कोयले को पश्चिम बंगाल के बांकुरा, बर्धमान, पुरुलिया और अन्य जिलों की फैक्ट्रियों और प्लांट्स में बेचा जाता था।
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क्यों निशाने पर आई आई-पैक?
जांच में यह भी पता चला कि कोयले का बड़ा हिस्सा शाकंभरी ग्रुप ऑफ कंपनीज को बेचा गया। इसके अलावा हवाला ऑपरेटरों से लिंक का भी खुलासा हुआ। कोयला तस्करी से मिले पैसे को ठिकाने लगाने से जुड़ा एक हवाला ऑपरेटर इंडियन पैक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड (I-PAC) को करोड़ों रुपये के लेनदेन में सहायता कर रहा था।
किसी पार्टी के खिलाफ नहीं की कार्रवाई: ईडी
ईडी ने अपने बयान में कहा कि यह तलाशी सबूतों पर आधारित है। किसी भी सियासी संगठन को निशाना नहीं बनाया गया है। किसी भी पार्टी ऑफिस की तलाशी नहीं ली गई। न ही यह तलाशी किसी चुनाव से जुड़ी है। यह मनी लॉन्ड्रिंग पर नियमित कार्रवाई का हिस्सा है। तलाशी पूरी तरह से स्थापित कानूनी सुरक्षा उपायों के मुताबिक की गई है।