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17 जून के बाद भारत आ रहे 11 जहाजों ने होर्मुज पार किया, इनमें लदा क्या है?

पिछले एक हफ्ते में भारत को एनर्जी की कमियों को पूरे करने में बड़ी सफलता मिली है। 17 जून के बाद से भारत आने वाले 11 जहाजों ने होर्मुज स्ट्रेट पार कर लिया है।

Hormuz Strait Indian ship

होर्मुज स्ट्रेट में जहाज। Photo Credit- PTI

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पश्चिम एशिया में टकराव खत्म करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच एक सहमति ज्ञापन (MOU) को अंतिम रूप दिए जाने के बाद, भारत आने वाले 11 जहाजों ने होर्मुज स्ट्रेट पार कर लिया है। यह जानकारी खुद विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को दी। शांति समझौते के तहत ईरान के पेट्रोलियम उत्पादों पर से अमेरिकी प्रतिबंध हटने के बाद, भारत ने कहा है कि वह पश्चिम एशिया में हो रही गतिविधियों पर नजर रख रहा है और ऊर्जा की आपूर्ति राष्ट्रीय हितों के आधार पर तय होती है।

 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 'आज की स्थिति के अनुसार भारतीय झंडे वाले हमारे 10 जहाज अब भी फारस की खाड़ी क्षेत्र में हैं। इसके अलावा, हाल ही में दो और जहाज वहां पहुंचे हैं। 17 जून को एमओयू पर हस्ताक्षर होने के बाद से भारत आने वाले 11 जहाज होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं।'

 

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8,55,000 मीट्रिक से ज्यादा कच्चा तेल

विदेश मंत्रालय ने बताया कि इन जहाजों में भारतीय झंडे वाले तीन कच्चे तेल के टैंकर शामिल हैं। इन तीनों टैंकरों में , जिनमें से हर एक में 8,55,000 मीट्रिक से ज्यादा कच्चा तेल है। इसके साथ ही विदेशी झंडे वाला एक एलपीजी वाहक, विदेशी झंडे वाला एक कच्चे तेल का टैंकर और विदेशी झंडे वाले छह भारी मालवाहक पोत भी हैं। इनमें खाद लदी है। 

 

 

 

 

मंत्रालय ने कहा, 'हमें उम्मीद है कि भारत के झंडे वाले बाकी जहाज भी जल्द ही होर्मुज पार कर सकेंगे।' पश्चिम एशिया भारत की ऊर्जा आपूर्ति का एक प्रमुख स्रोत रहा है। 

सभी गतिविधियों पर बारीकी से नजर

ईरानी कच्चे तेल पर अमेरिकी प्रतिबंध हटाने से जुड़े एक सवाल के जवाब में विदेश मंत्रालय ने कहा, 'हम पश्चिम एशिया से जुड़ी सभी गतिविधियों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। जहां तक हमारी ऊर्जा आपूर्ति का सवाल है, आप अच्छी तरह जानते हैं कि हमारी नीति राष्ट्रीय हितों पर आधारित है।'

 

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हमारी प्राथमिकता भारत के लोग

विदेश मंत्रालय ने कहा, 'हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि 1.4 अरब लोगों को किफायती कीमतों पर और अलग-अलग स्रोतों से ऊर्जा मिल सके। यह लगातार हमारी नीति रही है।' एक अन्य सवाल के जवाब में मंत्रालय ने कहा कि भारत के फलस्तीन के साथ दशकों से अच्छे संबंध रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी विकास साझेदारी रूपरेखा के तहत, हमने फलस्तीन में कई विकास परियोजनाएं शुरू की हैं।

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