'FCRA पर गलतफहमी है...', भारतीय राजदूत ने अमेरिका को क्या-क्या बताया?
फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल (FCRA) को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सरकार का पक्ष रखा है।

विनय मोहन क्वात्रा, Photo Credit: Social Media
फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल (FCRA) को लेकर लगातार अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। सरकार इसी सत्र में इस बिल को ला सकती है। इस बिल के जरिए विदेश से आने वाले पैसे का बेहतर मैनेजमेंट सुनिश्चित होगा और पारदर्शी तरीके से फंड का इस्तेमाल हो सकेगा। इस बिल को लेकर अमेरिका ने भी आपत्ति जाहिर की थी। अमेरिका के सांसद राइली मूर ने इसका विरोध करते हुए इसे ईसाई संस्थाओं और चर्चों के खिलाफ बताया तथा इसे द्विपक्षीय संबंधों के लिए चिंता का विषय करार दिया। इसके बाद अब अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने इस बिल को लेकर सोशल मीडिया और सिविल सोसायटी में चल रही चर्चाओं पर सफाई दी है।
उन्होंने एक पोस्ट बताया कि FCRA में प्रस्तावित बदलावों को लेकर कई तरह की गलतफहमियां फैली हुई हैं। मोहन क्वात्रा ने कहा कि भारत में विदेशी फंडिंग को कंट्रोल करने वाला कानून किसी खास धर्म, समुदाय या संगठन को निशाना बनाने के लिए नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कानून का उद्देश्य विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता, बेहतर प्रशासन और स्पष्ट नियम सुनिश्चित करना है। उन्होंने अमेरिका समेत कई देशों में विदेशी फंड और विदेशी प्रभाव को लेकर लागू कानूनों का भी जिक्र दिया।
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https://twitter.com/ANI/status/2086639504522408356
ऐसा कानून बनाने वाला भारत पहला देश?
विनय मोहन क्वात्रा ने कहा कि यह कहना गलत है कि भारत विदेशी फंडिंग या विदेशी प्रभाव को कंट्रोल करने वाला कानून बनाने वाला अकेला देश है। उन्होंने बताया कि अमेरिका में इसी तरह का कानून FARA 1938 से लागू है, जबकि FATCA 2010 में आया। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया ने 2018 में कानून बनाया, कनाडा ने 2024 में विदेशी हस्तक्षेप से जुड़े नियम लागू किए और ब्रिटेन की FIRS जुलाई 2025 में लागू हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि यूरोपीय संघ में भी इस दिशा में कानून बनाने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई लोकतांत्रिक देशों में विदेशी पैसे और विदेशी प्रभाव को लेकर पारदर्शिता और निगरानी के लिए व्यवस्था मौजूद है।
धर्म को लेकर अफवाहों पर क्या कहा?
विनय मोहन क्वात्रा ने उन अफवाहों को खारिज कर दिया जिसमें दावा किया जा रहा था कि FCRA का इस्तेमाल किसी खास धर्म या समुदाय को निशाना बनाने के लिए किया जाएगा। उन्होंने कहा कि FCRA सभी संगठनों पर समान रूप से लागू होता है, चाहे उनका संबंध किसी भी धर्म, समुदाय या विचारधारा से हो। उन्होंने कहा कि कानून का आधार संगठन का धर्म नहीं, बल्कि विदेशी फंड के इस्तेमाल और उसकी रिपोर्टिंग से जुड़े नियमों का पालन है।
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संपत्ति जब्त होने पर क्या कहा?
इस बिल को लेकर एक अफवाह यह भी है कि NGO और धार्मिक संस्थाओं की संपत्ति जब्त हो सकती है। इसको लेकर मोहन क्वात्रा ने कहा कि यह कहना गलत है कि कानून लागू होने के बाद NGO या धार्मिक संस्थाओं की संपत्ति सीधे जब्त कर ली जाएगी। उन्होंने कहा कि जब किसी संस्था का FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द या सरेंडर होता है, तो विदेशी फंड और उससे बनाई गई संपत्तियों के संबंध में सरकारी नियंत्रण की व्यवस्था 2010 से ही कानून में मौजूद है।
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सभी अफवाहों पर दिया जवाब
भारतीय राजदूत ने इस बिल को लेकर सभी अफवाहों का जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि पूजा स्थलों से जुड़ी संपत्तियों के लिए भी अलग सुरक्षा का प्रावधान है। उनके मुताबिक, अगर किसी FCRA-रजिस्टर्ड संस्था का रजिस्ट्रेशन रद्द हो जाता है और उसने विदेशी फंड से किसी पूजा स्थल से जुड़ी संपत्ति बनाई है, तो उस संपत्ति को उसी धर्म की किसी दूसरी FCRA-रजिस्टर्ड संस्था को देने की व्यवस्था होगी।
क्या FCRA की वजह से NGO को विदेशी पैसा मिलना कम हुआ है? इसके जवाब भी मोहन क्वात्रा ने कहा कि भारत में विदेशी फंड का प्रवाह कम नहीं हुआ, बल्कि बढ़ा है। उन्होंने कहा कि देश में 30 लाख से ज्यादा NGO हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ 14,450 के पास FCRA रजिस्ट्रेशन है। उन्होंने कहा कि FCRA किसी को विदेशी चैरिटी, रिसर्च ग्रांट या मानवीय सहायता लेने से नहीं रोकता। इसके तहत मुख्य रूप से तीन चीजों का पालन करना होता है जिसमें रजिस्ट्रेशन कराना, निर्धारित प्रक्रिया से पैसा लेना और उस पैसे के इस्तेमाल की रिपोर्ट देना शामिल है।
बिल में क्या बदलेगा?
प्रस्तावित बिल में सरकार कई बदलाव ला रही है। इनमें सबसे जरूरी डेसिगनेटिड अथॉरिटी की व्यवस्था है। अगर किसी संस्था का FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द हो जाता है, सरेंडर हो जाता है या किसी कारण से समाप्त हो जाता है, तो विदेशी फंड और उससे बनाई गई संपत्तियों को इस अथॉरिटी के नियंत्रण में रखने का प्रावधान प्रस्तावित है। वहीं, अगर संस्था बाद में अपना FCRA रजिस्ट्रेशन बहाल करा लेती है तो उसके बचे हुए विदेशी फंड और संपत्तियां वापस किए जाने का प्रावधान है।
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बिल को लेकर विवाद क्यों?
इस बिल को लेकर देश और विदेश से लगातार विरोध हो रहा है। सरकार का कहना है कि इस बिल के जरिए विदेशी फंड को रोका नहीं जाएगा बल्कि उसके इस्तेमाल में पारदर्शिता आएगी। दूसरी ओर, विपक्ष और कुछ NGO तथा धार्मिक संगठनों को चिंता है कि नए प्रावधानों से सरकार को विदेशी फंड से बनाई गई संपत्तियों पर ज्यादा नियंत्रण मिल सकता है। कुछ संगठनों ने यह सवाल भी उठाया है कि अगर किसी संस्था का FCRA रजिस्ट्रेशन रिन्यू नहीं होता या रद्द कर दिया जाता है तो उसकी संपत्ति का क्या होगा। इसी को लेकर टकराव हो रहा है।
सरकार का कहना है कि इस बिल को लेकर लोगों को गुमराह किया जा रहा है। भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने अमेरिका में FCRA को लेकर उठ रहे सवालों पर सरकार का पक्ष सामने रखा है। उन्होंने साफ किया कि भारत विदेशी फंडिंग को पूरी तरह बंद नहीं कर रहा है, बल्कि उसका दावा है कि विदेशी पैसे के इस्तेमाल में पारदर्शिता, जवाबदेही और राष्ट्रीय हित सुनिश्चित करना कानून का मुख्य उद्देश्य है।
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