logo

मूड

ट्रेंडिंग:

दिल्ली दंगों में उम्र कैद की सजा काट रहे पूर्व सांसद सज्जन कुमार की मौत

पूर्व सांसद और कांग्रेस नेता सज्जन कुमार का निधन हो गया है। वह साल 1984 के सिख विरोधी दंगों में उम्र कैद की सजा काट रहे थे और जेल में ही उनकी मौत हो गई है।

sajjan kumar

सज्जन कुमार, Photo Credit: Social Media

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

कांग्रेस के पूर्व सांसद और नेता सज्जन कुमार का गुरुवार को निधन हो गया है। न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट् के मुताबिक, उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में लाया गया था जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सज्जन कुमार 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े दो मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे थे। उनका निधन 80 साल की उम्र में हुआ और वह कई दिनों से स्वास्थय संबंधी दिक्कतों का सामना कर रहे थे। उनके निधन की खबर मिलने के बाद उनके बेटे सफदरजंग अस्पताल पहुंच चुके हैं। 

 

सज्जन कुमार का राजनीतिक सफर दिल्ली की स्थानीय राजनीति से शुरू हुआ और धीरे-धीरे वह कांग्रेस के बड़े नेताओं में शामिल हो गए। वह लंबे समय तक दिल्ली में कांग्रेस के प्रभावशाली नेताओं में रहे। उन्होंने 1980 में बाहरी दिल्ली लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर पहली बार संसद में प्रवेश किया। इसके बाद उन्होंने दिल्ली में कांग्रेस के संगठन और अपनी राजनीतिक जमीन को और मजबूत किया। उन्हें संजय गांधी का करीबी माना जाता था। 

 

यह भी पढ़ें: 'बिना टेलीप्रॉम्पटर गाकर दिखाएं', वंदे मातरम पर PM मोदी को संजय राउत की चुनौती

 

दो मुख्यमंत्रियों को हराया था चुनाव

उन्होंने 1991 में एक बार फिर बाहरी दिल्ली लोकसभा सीट से जीत दर्ज की। इसके बाद 2004 के लोकसभा चुनाव में भी वह बाहरी दिल्ली से सांसद चुने गए। वह कई बार लोकसभा पहुंचे और दिल्ली से कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में गिने जाने लगे। उनका राजनीतिक प्रभाव इतना बढ़ गया था कि दिल्ली की राजनीति में उन्हें कांग्रेस के ताकतवर नेताओं में शामिल किया जाता था। खासकर बाहरी दिल्ली के जाट और ग्रामीण इलाकों में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती थी।

 

उनके राजनीतिक कद का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने दिल्ली के दो-दो मुख्यमंत्रियों चौधरी ब्रह्म प्रकाश और साहब सिंह वर्मा को लोकसभा का चुनाव हराया था।  हालांकि, उनके राजनीतिक जीवन पर 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े आरोपों और बाद में शुरू हुई कानूनी कार्रवाई का गहरा असर पड़ा।

1984 सिख दंगे केस में फंसे

31 अक्तूबर 1984 को दिल्ली में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को उनके ही अंगरक्षकों ने गोली मार दी। हत्या करने वाले लोग सिख समुदाय से आते थे ऐसे में पूरे देश में सिखों के खिलाफ दंगे शुरू हो गए। दिल्ली में  इसका सबसे ज्यादा असर दिखा। उसी दौरान दिल्ली कैंटर इलाकों में कुल 5 सिखों की हत्या कर दी। इस केस में सज्जन कुमार पर भीड़ को उकसाने की आपराधिक साजिश रचने के आरोप लगे। दिल्ली कैंट वाले इसी मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने साल 2018 में अपना फैसला सुनाया था। इस केस में सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई गई और पांच लाख रुपये का जुर्माना लगा। इसी केस में वह जेल में बंद हैं और उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।

 

इन्हीं दंगों के दौरान सरस्वती विहार में भी एक घटना हुई थी। 1 नवंबर 1984 को सरस्वती विहार में एक सिख व्यक्ति और उसके बेटे की हत्या कर दी गई थी। आरोप है कि सज्जन कुमार ने ही उस भीड़ को उकसाया था जिसने इन दोनों को जिंदा जला दिया था। दोनों को जिंदा जलाने के बाद उनके घर में लूटपाट की गई और घर में मौजूद अन्य लोगों के साथ भी मारपीट की गई। साल 2025 में इस केस में भी सज्जन सिंह को कोर्ट ने दोषी माना था। 

 

यह भी पढ़ें: 'जैसे को तैसा' दिल्ली में स्थित पाकिस्तानी दूतावास के बाहर चला बुलडोजर

मौत की वजह साफ नहीं

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सज्जन सिंह को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल लाया गया था, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया था। उनके बेटे जग प्रवेश कुमार सफदरजंग अस्पताल पहुंच चुके हैं। अभी तक मौत के कारणों की पुष्टि नहीं की गई है लेकिन बताया जा रहा है कि वह स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे थे। वह दिल्ली के तिहाड़ जेल में उम्र कैद की सजा काट रहे थे। 

Related Topic:#Anti Sikh Riots 1984

और पढ़ें