पहले चिकन नेक, फिर तारबंदी, अब म्यांमार पर भारत की नजर, घुसपैठ रुक ही जाएगा?
भारत में दशकों तक पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के राज्यों में होने वाली अवैध घुसपैठ समस्या रही है। अब सरकार इसे खत्म करने के लिए कई कड़े फैसले ले रही है। पढ़ें रिपोर्ट।

सीमा की सुरक्षा के लिए तैनात BSF की महिला विंग। Photo Credit: PTI
असम हो, पश्चिम बंगाल, झारखंड या महाराष्ट्र, चुनाव कहीं भी हो, देश में अवैध घुसपैठ का मुद्दा, हर बार सुर्खियों में रहता है। कभी पश्चिम बंगाल में डेढ़ दशक तक सत्ता में रही
ममता बनर्जी
के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार को जिम्मेदार बताया जाता है, कभी पूर्वोत्तर में 2014 से पहले काबिज कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों को। प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी
से लेकर मंत्री अमित शाह तक, ममता बनर्जी पर आरोप लगाते रहे हैं कि उन्होंने बांग्लादेशी मुस्लिमों को संरक्षण दिया, उन्हें जबरन पश्चिम बंगाल में बसाया।
भारत में घुसपैठ 1947 के बाद से ही बड़ी समस्या रही है। जम्मू और कश्मीर में पाकिस्तान की तरफ से आए दिन घुसपैठ की कोशिशें होती रही हैं लेकिन सघन सुरक्षा की वजह से वहां वैसी घुसपैठ नहीं हो पाती है, जैसी पूर्वोत्तर के राज्यों और पश्चिम बंगाल के रास्ते होती है। केंद्र सरकार का कहना है कि भारत के लिए म्यांमार से आए रोहिंग्या, मिजो और कुकी समुदाय की कुछ उपजातियां और बांग्लादेशी बड़ी समस्या बन चुके हैं।
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कहां-कहां से घुसपैठ होती है?
भारत में घुसपैठ बांग्लादेश, पाकिस्तान और म्यांमार के साथ लगती अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से होती है। पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा और मिजोरम के सीमावर्ती इलाके सबसे ज्यादा संवेदनशील हैं। पाकिस्तान और चीन से लगी सीमाओं पर सख्ती ज्यादा है, इसलिए वहां बड़े पैमाने पर घुसपैठ नहीं हो पाती है।
पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा और मिजोरम से आने वाले लोग, ज्यादातर बेहतर जिंदगी की तलाश में दाखिल होते हैं। असम के मुख्यमंत्री
हिमंता बिस्व सरमा
बार-बार दावा करते हैं कि इनके अवैध घुसपैठ की वजह से सीमावर्ती इलाकों में कथित तौर पर डेमोग्राफी बदल रही है।
बांग्लादेश आर्थिक संकट के मुहाने पर एक दशक से खड़ा है, वहीं म्यांमार से रोहिंग्या और चिन समुदाय के लोग भागकर भारत में दाखिल होते हैं। कुकी और जो समुदाय से जुड़े लोग भी म्यांमार से भारत में दाखिल हुए हैं।
भारत के लिए चिंता क्या है?
हिमंता, बिस्व सरमा, मुख्यमंत्री, असम:-
पश्चिम बंगाल की जीत भारत की जीत है, यह बीजेपी की जीत नहीं, यह भारत की जीत है। हमारे डेमोग्राफी से लेकर सुरक्षा तक बहुत बड़ी चुनौती है, असम में हम कितना भी काम कर लें लेकिन भारत-बांग्लादेश की सबसे लंबी सीमा पश्चिम बंगाल में है। ममता बनर्जी ने फेंसिंग के लिए सरकार को जमीन नहीं दी। यह जो जीत है वह भारत की जीत है। (4 मई , 2026)
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का दावा है कि भारत में अवैध घुसपैठ की वजह से बांग्लादेशी मुसलमानों की आबादी बढ़ रही है, जिससे हिदुओं की आबादी खतरे में आ रही है। 4 मई को जब विधानसभा चुनावों के नतीजे आए तो उन्होंने सबसे ज्यादा खुशी जाहिर की। हिमंता, दिल्ली से महाराष्ट्र तक, घुसपैठ का मुद्दा उठाते रहे हैं।
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अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री:-
हमने कहा था आप हमें शासन दीजिए। हम बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने का काम कुछ दिनों में शुरू कर देंगे। 45 दिन में बॉर्डर फेंसिंग के लिए जमीन देने का वादा था और सिर्फ 7 दिन में ही वह वादा पूरा कर दिया गया है। देशभर से एक-एक घुसपैठिए को चुन-चुनकर बाहर निकाला जाएगा। कोई घुसपैठिया बच नहीं पाएगा।
अब सरकार क्या करने वाली है?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है, 'सरकार डेमेग्राफिक चेंज पर एक उच्च स्तरीय समिति का गठन कर चुकी है। सरकार का संकल्प है कि देश की सुरक्षा और जनसांख्यिकीय संतुलन से कोई समझौता नहीं होगा।'
https://twitter.com/S_deshpremi/status/2060237335053451295
म्यांमार से भी होने वाला घुसपैठ रुक जाएगा?
भारत अब म्यांमार पर नजर रख रहा है। म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग 30 मई से 3 जून 2026 तक भारत का आधिकारिक दौरा करेंगे। चुनाव जीतने के बाद यह उनका पहला विदेशी दौरा है। म्यांमार का विपक्षी दल, नेशनल यूनिटी गर्वनमेंट (NUG) इस यात्रा का विरोध कर रहा है। उन्होंने मिन आंग ह्लाइंग आतंकी नेता कहा है। मिन पर अपनी जनता पर ही हमला करने के आरोप हैं। NUG ने विदेश मंत्री एस जयशंकर को पत्र लिखकर भारत से अपील की है कि वह इस यात्रा से मिन आंग ह्लाइंग को राजनीतिक वैधता न दें।
भारत सरकार ने कहा है कि म्यांमार भारत की पड़ोसी-प्रथम, एक्ट ईस्ट और महासागर नीतियों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इस यात्रा से दोनों देशों के बीच बहुआयामी संबंध और मजबूत होंगे। बैठक में सीमा प्रबंधन, हथियार और नशीले पदार्थों की तस्करी पर चर्चा होगी। सीमा प्रबंधन सबसे अहम है।
FMR पर ज्यादा सख्ती की अब है जरूरत
असम के मुख्यमंत्री हिमंता के साथ-साथ मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहावमा भी भारत में अवैध घुसपैठ पर चिंता जाहिर कर चुके हैं। म्यांमार से लोग भागकर मिजोरम आते हैं, यहां का 'फ्री मूवमेंट रिजीम' (FMR) भारत की चुनौतियां बढ़ाता है। म्यांमार की सैन्य जुंटा और सरकार के बीच संघर्ष में 40 हजार से ज्यादा लोग, वहां से भागकर चंफाई जिले में बीते साल ही पहुंच गए थे, जो लौटने का नाम नहीं ले रहे हैं।
भारत म्यांमार सीमा पर 16 किलोमीटर के दायरे तक, मुक्त आवाजाही है। वीजा और पासपोर्ट की जरूरत नहीं पड़ती है। भारत और म्यांमार के बीच आपसी सहमति से यह समझौता 2018 में 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' के तहत शुरू किया गया था। अब हो सकता है, इस पर सरकार अपनी चिंता जाहिर करे। इसे पूरी तरह बंद भी किया जा सकता है।
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घुसपैठ रोकने के लिए अब तक सरकार ने क्या किया है?
शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार के जिले स्तर पर होल्डिंग सेंटर बनाने के बाद घुसपैठिए वापस लौट रहे हैं। अवैध घुसपैठियों की पहचान की जा रही है और उन्हें डिपोर्ट किया जा रहा है। उत्तर 24 परगना के बिथारी-हाकिमपुर बॉर्डर पर सैकड़ों बांग्लादेशी लोग सामान बांधकर घर वापस लौटने की कोशिश कर रहे हैं।
शुभेंदु अधिकारी ने साफ निर्देश दिया है कि जो लोग बॉर्डर पर इकट्ठा हैं, वे खुद बांग्लादेश लौटना चाहते हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, 'जल्दी-जल्दी भाग जाओ, वरना सरकार जरूरी कार्रवाई करेगी। हम उन्हें जेल में खाना नहीं खिलाना चाहते और न ही जनता का पैसा बर्बाद करना चाहते हैं।'
मालदा और मुर्शिदाबाद में पहला होल्डिंग सेंटर खुलने के अगले दिन ही यह भीड़ बढ़ गई। ये लोग सालों से दमदम, न्यू टाउन, डांकुनी आदि जगहों पर मजदूरी, मिस्त्री और घरेलू दिहाड़ी करते थे। नवंबर 2025 के वोटर लिस्ट रिवीजन के समय भी ऐसी ही वापसी की तस्वीरें देखी गई थीं। सरकार अब सीधे पुलिस के जरिए इन लोगों को बीएसएफ को सौंप रही है, जिन्हें बांग्लादेश वापस भेजने की प्रक्रिया पूरी करनी है।
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CM शुभेंदु के फैसले, जिनकी वजह से रुक सकती है घुसपैठ
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ने बांग्लादेश सीमा से सटी जमीनों को केंद्र सरकार को सौंपने का फैसला किया है। अब भारत और बांग्लादेश सीमा पर तगड़ी बाड़बंदी की जा रही है, जिससे घुसपैठ न होने पाए। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी और सुरक्षा बढ़ाने के लिए सीमा सुरक्षा बल को 142 एकड़ जमीन हस्तांतरित की है।
यह जमीन, सिलीगुड़ी कॉरिडोर से होकर गुजरती है, जिसे चिकेन नेक भी कहते हैं। यह पूर्वोत्तर के 7 राज्यों को भारत की मुख्य भूमि से जोड़ता है, जिस पर चीन और बांग्लादेश की हमेशा टेढ़ी नजर रही है। केंद्र सरकार भी अब'डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट' की नीति पर काम करेगी, जिसकी वजह से घुसपैठ की समस्या, काफी हद तक दूर होने की उम्मीद जताई जा रही है।
क्या खत्म ही हो जाएंगे घुसपैठिए?
पश्चिम बंगाल सरकार ने डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट नीति का एलान किया है। इसके तहत नागरिकता संशोधन अधिनयिम (CAA) के दायरे में न आने वाले सभी लोगों को अवैध घुसपैठिया माना जाएगा। राज्य पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) को सौंपेगी, फिर BSF, बांग्लादेश की सीमा सुरक्षा बल (BDR) से बात करके उन्हें वापस भेजेगी। सरकार ने कहा है कि यह प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी की जाएगी।
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