एआई समिट के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी चर्चा में आ गई है। सोशल मीडिया पर चर्चा चल रही है की नेहा सिंह को कॉलेज से निकाल दिया गया है। विवाद के बाद रजिस्ट्रार ने सफाई दी है। यूनिवर्सिटी ने इसे गलती मानते हुए जांच शुरू कर दी है। इस घटना ने तकनीकी दावों और हकीकत को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में रोबोटिक डॉग को लेकर उठे विवाद पर गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने अपनी 'गलती' स्वीकार कर ली है। यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार नितिन कुमार गौर ने कहा कि संस्थान ने इस मामले में अपना स्पष्टीकरण दे दिया है और घटना पर खेद व्यक्त किया है। यह एक गलती थी और हमें इसका अफसोस है। हम कभी नहीं चाहते कि विश्वविद्यालय या देश की छवि खराब हो।
जांच के बाद होगी कार्रवाई
रजिस्ट्रार नितिन कुमार गौर ने स्पष्ट किया कि प्रोफेसर नेहा सिंह को निलंबित नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, 'वह सस्पेंड नहीं हैं। जांच पूरी होने तक प्रक्रिया जारी रहेगी।' उन्होंने यह भी कहा कि एक व्यक्ति की गलती के आधार पर पूरे विश्वविद्यालय को नहीं आंका जाना चाहिए। यूनिवर्सिटी ने जांच शुरू कर दी है। नितिन कुमार गौर ने कहा कि यह देखा जाएगा कि ऐसी गलती क्यों हुई और इसके लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि संस्थान देश की तकनीकी प्रगति और नवाचार के साथ खड़ा है और भारत को आगे बढ़ते देखना चाहता है।
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इन-हाउस इनोवेशन पर सवाल
विवाद के बाद भारत मंडपम में लगे यूनिवर्सिटी के स्टॉल को खाली करने के लिए कहा गया। समिट के दौरान यूनिवर्सिटी ने अपने बूथ पर जिस रोबोटिक डॉग को 'इन-हाउस इनोवेशन' बताया था, उसे बाद में चीनी कंपनी यूनिट्री द्वारा निर्मित कमर्शियल रोबोट ‘यूनिट्री गो 2’ के रूप में पहचाना गया। बाजार में यह रोबोट करीब 2 से 3 लाख रुपये में उपलब्ध है। जब प्रोफेसर नेहा सिंह ने मीडिया इंटरैक्शन के दौरान रोबोटिक डॉग 'ओरायन' का प्रदर्शन किया। उन्होंने दावा किया था कि यह यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस द्वारा विकसित किया गया है।
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उन्होंने यह भी कहा था कि यूनिवर्सिटी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में 350 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है और कैंपस में डेटा साइंस व एआई ब्लॉक स्थापित किया है। रोबोट को 'शरारती' बताते हुए उन्होंने कहा था कि यह निगरानी और मॉनिटरिंग जैसे छोटे कार्य कर सकता है। 'ओरायन' और 'यूनिट्री गो 2' के बीच समानता की ओर ध्यान दिलाया, जिसके बाद विवाद गहराया। सूत्रों के मुताबिक, इसके बाद यूनिवर्सिटी से प्रदर्शनी क्षेत्र खाली करने को कहा गया और पवेलियन की बिजली भी काट दी गई।