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'नया नाम क्या रखोगे हमें बताओ...', 'घूसखोर पंडत' के मेकर्स को SC ने लताड़ा

फिल्म 'घूसखोर पंडत' का नाम बदलना तय है। अब सुप्रीम कोर्ट ने फिल्ममेकर्स से पूछा है कि पहले बताएं कि नया नाम क्या रखने वाले हैं।

supreme court on ghooskhor pandat

सुप्रीम कोर्ट ने लगाई लताड़, Photo Credit: Social Media

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मनोज वाजपेयी की फिल्म 'घूसखोर पंडत' का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस फिल्म को बनाने वाले लोगों से कहा है कि वे इसका नाम बदलें। सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म मेकर्स को लताड़ लगाते हुए कहा है कि जब वे अपना जवाब दाखिल करें तो यह भी बताएं कि नाम बदलकर क्या रखेंगे। साथ ही कोर्ट ने यह भी नसीहत दी है कि किसी भी समाज को बदनाम नहीं किया जाना चाहिए। इस मामले में अब अगली सुनवाई 19 फरवरी को रखी गई है।

 

इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर करके मांग की गई थी कि 'घूसखोर पंडत' की रिलीज और इसकी स्क्रीनिंग पर रोक लगाई जाए। आरोप लगाए गए थे कि यह फिल्म जाति और धर्म के आधार पर स्टीरियोटाइप को बढ़ावा देती है और ब्राह्मण समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के साथ-साथ उन्हें अपमानित करती है। कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करने के बाद फिल्ममेकर्स को निर्देश दिए हैं कि वे एक एफिडेविट में अपना जवाब दाखिल करें और यह भी बताएं कि फिल्म का नाम बदलकर नया नाम क्या रखेंगे?

 

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सुनवाई के दौरान क्या हुआ?

 

इस जनहित याचिका पर जस्टिस बीवी नागरत्ना की अगुवाई वाली बेंच ने सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने फिल्ममेकर्स को जमकर लताड़ा और नसीहत दी कि समाज के किसी भी वर्ग को फिल्म के नाम या किसी भी आपत्तिजनक कॉन्टेंट के जरिए बदनाम नहीं किया जा सकता है।

 

 

 

 

जस्टिस नागरत्ना ने मौखिक रूप से कहा, 'आप किसी को क्यों बदनाम कर रहे हैं? यह नैतिकता और पब्लिक ऑर्डर के खिलाफ है। मुखर होना एक बात है लेकिन जब देश में पहले से ही अशांति है तब और अशांति पैदा करना ठीक नहीं है। हमें लगता है कि फिल्ममेकर्स, पत्रकार आदि सभी अभिव्यक्ति की आजादी देने वाले अनुच्छेद 19 (1) से परिचित हैं। आप हमें बताइए कि आप नाम बदलने के बाद नया नाम क्या रखेंगे?'

 

यह भी पढ़ें: FIR, गुस्सा, प्रदर्शन', 'घूसखोर पंडत' पर मचे बवाल के बाद नीरज पांडे ने क्या कहा?

 

उन्होंने आगे कहा है, 'समाज के किसी भी वर्ग को बदनाम नहीं किया जाना चाहिए। हमारे संविधान निर्माता जाति और धर्म के सभी पहलुओं से परिचित थे इसीलिए वे भाईचारे का कॉन्सेप्ट लेकर आए। अगर आप अपनी आजादी का इस्तेमाल समाज के किसी वर्ग को अपमानित करने के लिए करेंगे तो हम इसकी इजाजत नहीं देंगे।'

 

 

 

क्या है मामला?

 

दरअसल, फिल्म के नाम को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई थी और ब्राह्मण समुदाय के लोगों ने इसका विरोध किया था। अब नेटफ्लिक्स का कहना है कि वह इस फिल्म का नाम बदलने को तैयार है। हाई कोर्ट में ही नेटफ्लिक्स ने नाम बदलने की बात कह दी थी। 


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