logo

मूड

ट्रेंडिंग:

BS-IV गाड़ियों पर रोक, GRAP की सख्ती, नवंबर में प्रदूषण रोकने की तैयारियां क्या?

अब GRAP के स्टेज III और IV में BS-IV और उससे पुराने सामान ढोने वाली गाड़ियों को मिली छूट हटा दी गई है। नए बदलाव, कब प्रभावी होंगे, पढ़ें रिपोर्ट।

Delhi AIR Pollution PTI प्रदूषण

दिल्ली में AQI बेहतर करने के लिए एंटी स्मॉग गन का इस्तेमाल किया जाता है। Photo Credit: PTI

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

दिल्ली में अक्तूबर महीने के 12 दिन बीत चुके हैं। अचानक बारिश की वजह से राहत मिली है, वरना अब तक दिल्ली में प्रदूषण का स्तर परेशान करने की सीमा तक पहुंच जाता है। कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने दिल्ली-NCR में प्रदूषण रोकने की तैयारी, पराली जलाने और त्योहारों के पटाखों के छूटने से पहले ही कर ली है। प्रदूषण रोकने के लिए ग्रेडेड एक्शन रिस्पांस प्लान (GRAP) के स्टेज 4 और 5 में कई बदलाव किए गए हैं, जिनका असर आप पर पड़ने वाला है। 

GRAP के स्टेज तीन और चार में अब BS-IV और उससे पुराने सामान ढोने वाली गाड़ियों को मिली छूट, खत्म कर दी गई है। अब जरूरी सामान ले जाने वाले ऐसे वाहन भी पाबंदी से बाहर नहीं रहेंगे। स्टेज III में हल्के और मध्यम मालवाहक वाहनों (LGV और MGV) की छूट हटी है। स्टेज IV में ट्रकों और भारी मालवाहक वाहनों (HGV) की छूट हटी है।

नए बदलाव आयोग की बैठक में मंजूर हुई संशोधित GRAP टाइम टेबल का हिस्सा हैं। ऐसी पाबंदियां पहले भी अलग आदेशों से लागू थीं लेकिन अब इन्हें ज्यादा स्पष्ट कर दिया गया है। अब इन्हें GRAP से इतर नहीं बल्कि उसी में शामिल कर लिया गया है। 

यह भी पढ़ें: प्रदूषण बढ़ने से हो रहा करोड़ों का नुकसान, किसकी हो रही बंपर कमाई?

GRAP क्या है और कब कौन सा स्टेज लगता है?

दिल्ली-NCR में GRAP प्रदूषण बढ़ने पर अलग-अलग स्टेज में लागू होने वाली योजना है। जैसे-जैसे हवा खराब होती है, पाबंदियां सख्त होती जाती हैं। हर नए स्टेज में पिछले स्टेज की पाबंदियां भी जारी रहती हैं।

  • स्टेज 1: AQI 201 से 300
  • स्टेज 2: AQI 301 से 400
  • स्टेज 3: AQI 401 से 450
  • स्टेज 4: AQI 450 से ऊपर

स्टेज किसी तय AQI पर अपने आप नहीं लग जाता। CAQM हवा की मौजूदा गुणवत्ता, पूर्वानुमान और मौसम को देखकर स्टेज लागू करता है। पूर्वानुमान के आधार पर भी स्टेज लगाया जा सकता है।

सामान ढोने वाली बड़ी गाड़ियों पर क्या बदला?

दिल्ली में प्रदूषण घटाने के लिए पुराने और धुआं छोड़ने वाले कमर्शियल सामान लदी गाड़ियों पर सख्त नियम लागू हैं। इनमें ट्रक और डिलीवरी गाड़ियां को रखा गया है। GRAP के स्टेज 3 और 4 के दौरान बाहर से आने वाले या दिल्ली में रजिस्टर्ड पुराने डीजल वाहनों के चलने पर रोक लग जाती हैं। BS-4 या उससे नीचे की गाड़ियां पूरी तरह रोक दी जाती हैं। 

CAQM के नए नियमों के तहत दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड कमर्शियल वाहनों के लिए केवल BS-6 (डीजल), CNG, LNG या इलेक्ट्रिक होना अनिवार्य कर दिया गया है। पुराने BS-3 गाड़ियों पर पहले ही पूरी तरह से प्रतिबंध लग चुका है और BS-4 वाहनों को मिली अस्थायी राहत भी 31 अक्टूबर 2026 को खत्म हो जाएगी। 1 नवंबर से ऐसी गाड़ियों की एंट्री नहीं होगी।

GRAP AI Infographics ChatGPT

यह भी पढ़ें: पार्किंग फीस दोगुनी, 50% WFH, बेहतर AQI के लिए क्या फैसले ले रही दिल्ली सरकार?

BS क्या बला है?

भारत स्टेज (BS) केंद्र सरकार की ओर से तय किए गए उत्सर्जन मानक हैं। इनका मकसद गाड़ियों के साइलेंसर से निकलने वाले धुएं को नियंत्रित करना है। इनसे नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और PM 2.5 निकलता है। साल 2000 में BS-1 की शुरुआत हुई थी।

प्रदूषण घटाने के लिए समय-समय पर नियम कड़े किए जाते हैं और अलग-लग स्टेज लाए जाते हैं। BS-2 साल 2001 और BS-3 साल 2005 से 2010 लागू किए गए हैं।

साल 2017 में लागू हुए BS-4 में इंजनों में इलेक्ट्रॉनिक फ्यूल इंजेक्शन और सल्फर की सीमा 50 ppm तक लाई गई है। एयर क्वालिटी को बेहतर करने के लिए सरकार BS-5 से आगे बढ़कर सरकार BS-6 तक पहुच गई है। BS-VI में ईंधन का सल्फर स्तर 50 ppm से घटाकर सिर्फ 10 ppm किया गया है। डीजल और पेट्रोल इंजन, प्रदूषण के लिहाज से बेहतर हुए हैं।

 

यह भी पढ़ें: प्रदूषण दूसरे देश करें, नुकसान झेलता है नेपाल! क्लाइमेट जस्टिस की मांग क्यों?

सरकार ने प्रदूषण से बचने का क्या प्लान तैयार किया है?

दिल्ली सरकार ने सर्दियों में बढ़ने वाले प्रदूषण से निपटने के लिए एक स्थायी योजना बनाई है। यह योजना 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक लागू रहेगी। इसमें धूल पैदा करने वाले निर्माण कार्यों पर पूरी तरह रोक लगाई जाएगी, जबकि दिसंबर-जनवरी में निर्माण और तोड़फोड़ पर और सख्त प्रतिबंध होगा। सरकारी और निजी ऑफिसों में 50 प्रतिशत कर्मचारी घर से काम करेंगे, ऑफिस के समय भी अलग-अलग रखे जाएंगे।

दिल्ली से बाहर रजिस्टर्ड पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों BS-VI से नीचे वाले के प्रवेश पर रोक रहेगी। पार्किंग चार्ज दोगुना किया जाएगा और बिना प्रदूषण सर्टिफिकेट वाले या उम्र पूरी कर चुके वाहनों को पेट्रोल-डीजल नहीं दिया जाएगा। दिल्ली सरकार ने पड़ोसी राज्यों के साथ मिलकर पराली जलाने पर नियंत्रण करने की तैयारी की है। शहर में 60 एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन लगाए जाएंगे और 334 टीमें निगरानी करेंगी। 

इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाई जा रही है और मेट्रो तथा DTC बसें ज्यादा यात्री ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियों और टायर-ई-वेस्ट जलाने पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार का कहना है कि अचानक बंद करने की बजाय पहले से तय नियमों से लोगों और व्यापार को बेहतर तैयारी का मौका मिलेगा।

Related Topic:#Air Pollution

और पढ़ें