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राजौरी के बाद पुणे में फैल रही ये खतरनाक बीमारी, दोनों अलग-अलग कैसे?

जम्मू-कश्मीर के राजौरी में फैल रही रहस्यमयी बीमारी के बाद अब महाराष्ट्र के पुणे में भी एक खतरनाक और दुर्लभ बीमारी ने चिंता बढ़ा दी है। दोनों बीमारी एक-दूसरे से कैसे अलग आइये समझें।

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अस्पताल बेड, Photo Credt: AI generated pic

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जम्मू-कश्मीर में एक रहस्यमयी बीमारी की चपेट में आकर अब तक 17 लोग दम तोड़ चुके हैं। राजौरी के बड़हाल गांव में इस बीमारी से दहशत बना हुआ है। पूरे गांव को कंंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया गया है। आधिकारिक तौर पर अभी न तो इस बीमारी का नाम पता चला है और ना ही वजह लेकिन हर बीतते दिन के साथ हालात बिगड़ते जा रहे हैं।

 

हालांकि, केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मृतकों में किसी भी संक्रमण, वायरस या बैक्टीरिया न होने की पुष्टि की है। जांच में विषैले तत्व पाए गए हैं। अब यह पता लगाने के लिए जांच चल रही है कि यह किस तरह का जहर है।

 

पुणे में क्या हो रहा?

ऐसा ही मामला महाराष्ट्र के पुणे से आ रहा है। यहां एक खतरनाक और दुर्लभ बीमारी गुलेइन-बैरे सिंड्रोम (GBS) फैल रही है जिससे मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। अब तक 59 लोग इससे प्रभावित हो चुके हैं। इसमें बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक शामिल है और सभी का इलाज वेंटिलेटर पर चल रहा है। 

सवाल है कि राजौरी और पुणे में फैल रही यह खतरनाक बीमारी एक-दूसरे से अलग कैसे है? 

 

पुणे में फैली बीमारी का नाम- गुलियन बैरे सिंड्रोम है। यह एक दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम अपने ही पेरिफेरल नर्वस सिस्टम पर हमला करने लगता है। यह संक्रमण कैम्पिलोबैक्टर जेजुनी नामक बैक्टीरिया से फैलता है। इस बीमारी से हाथ-पैर में कमजोरी, झुनझुनी और यहां तक कि लकवा भी हो सकता है। 

 

एक हफ्ते में 26 मरीजों से बढ़ी चिंता

कैम्पिलोबैक्टर बैक्टीरिया आमतौर पर संक्रमित मांस, चिकन और मटन में पाया जाता है। इस बैक्टीरिया से पेट में दर्द, दस्त, उल्टी और जी मिचलाने लगता है जो कि GBS का शुरुआती लक्षण है। बता दें कि यह बीमारी गंभीर हो सकती है लेकिन अगर इलाज सही समय पर किया गया तो मरीज पूरी तरह से ठीक हो सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि गंदा और संक्रमित पानी भी इस बीमारी के फैलने का एक प्रमुख कारण हो सकता है। 

 

राजौरी में फैल रही बीमारी इससे कैसे अलग?

जम्मू-कश्मीर के राजौरी में फैल रही बीमारी संक्रामक नहीं है और यह महामारी में तब्दील नहीं होगी। हालांकि, इस बीमारी से अब तक 17 लोग दम तोड़ चुके हैं। माना जा रहा है कि खाने और पानी के जरिए मनुष्य के शरीर में जाने वाले न्यूरोटॉक्सिन्स इस बीमारी की वजह हो सकते हैं।

 

क्या हैं बीमारी के लक्षण

बड़हाल गांव से जांच के लिए पानी के नमूने लिए गए थे। इसमें पाया गया कि पानी में कुछ कीटनाशक हो सकता हैं। उल्टी, डायरिया, बुखार, बहुत ज्यादा पसीने, घबराहट और दस्त के अलावा कुछ मरीजों को गले में दर्द और सांस की नली में परेशानी की शिकायत आई। 

 


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