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ईरान ने अली खामेनेई के शव को 125 दिनों तक कैसे सुरक्षित रखा?

चार महीने के लंबे इंतजार के बाद ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अली खामनेई को 9 जुलाई को सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायली हमले में उनकी जान गई थी।

Ayatollah Ali Khamenei

अयातुल्ला अली खामेनेई। (AI-generated image)

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28 फरवरी की तड़के अमेरिका और इजरायल ने ईरान हमला किया। इसी हमले में ईरान के तत्कालीन सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हुई। इजरायली हमले में न केवल अली खामेनेई, बल्कि उनकी नन्ही पोती, बेटी-दामाद और मौजूदा सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की पत्नी को भी अपनी जान गंवानी पड़ी। 

 

अब करीब 125 दिनों बाद अली खामेनेई को सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इतने दिनों तक ईरान ने अली खामेनेई के पार्थिव शरीर को कैसे सुरक्षित रखा, कौन सी तकनीक का इस्तेमाल किया और जनाज़े में इतनी देरी क्यों हुई?

 

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सुरक्षा को सता रही सुरक्षा चिंता

खामेनेई के जनाज़े में देरी की एक वजह सुरक्षा भी है। तेहरान पूरी व्यवस्था को चाक-चौबंद करना चाहता था, क्योंकि आयोजन में भारी संख्या में लोगों और विदेशी मेहमानों के आने की संभावना है। खामेनेई के शव को इराक भी भेजा जाना है। ईरान और इराक की सरकारों के बीच कई दौर की वार्ता हुई। सुरक्षा व्यवस्था और कार्यक्रम पर सहमति बनने के बाद तारीख तय की गई। 

 

इराक के कर्बला के बाद शव को वापस ईरान लाया जाएगा। ऐसे में छोटी सी सुरक्षा चूक बड़ी घटना का कारण बन सकती है। इससे बचने के लिए ईरान ने बासिज बलों को लामबंद किया और बड़ा सुरक्षा अभियान चलाया।

चार महीने तक कैसे सुरक्षित रखा शव?

अब सवाल यह है कि चार महीनों तक शव को सुरक्षित कैसे रखा गया? इसका जवाब आतंकवाद विरोधी विशेषज्ञ डॉ. उमर मोहम्मद ने दिया। उन्होंने फॉक्स न्यूज डिजिटल से बातचीत में बताया कि खामेनेई के शव को कोल्ड स्टोरेज में रखा गया था। इस्लाम में रासायनिक तौर पर शवों को संरक्षित करने की मनाही है और तुरंत शव को दफनाने का प्रावधान है। लेकिन शिया कानून असाधारण मामलों में दफनाने में देरी और बर्फ में शव को सुरक्षित रखने की इजाजत देता है। सर्वोच्च नेता के मामले में यह छूट हासिल करना और भी आसान होता है। 

 

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डॉ. उमर मोहम्मद ने आगे बताया कि चार महीने तक शव को बर्फ में रखना कोई आसाधारण बात नहीं है। ईरान के फॉरेंसिक मुर्दाघरों में शवों को महीनों तक रखने का इंतजाम होता है। हां, हो सकता है कि पेश करने के लिए ज्यादा शव न बचा हो। 

ईरान ने क्या बताया?

हालांकि ईरान ने आधिकारिक तौर पर यह नहीं बताया कि खामेनेई के पार्थिव शरीर को कैसे रखा गया था? उधर, अली खामेनेई के जनाज़े के लिए नियुक्त विशेष प्रवक्ता इमान अत्तरजादेह ने बताया कि शवों को इस्लामी और कानूनी मानकों के मुताबिक बेहद सम्मान और सावधानी के साथ संरक्षित किया गया है। उन्हें न तो दफनाया गया है और न ही कहीं किसी धरोहर के तौर पर रखा गया। 

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