भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) सेवा देश की सबसे प्रतिष्ठित नौकरी है। मगर, इस प्रतिष्ठित नौकरी में भी अधिकारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल, 2011 बैच की IAS अधिकारी नेहा मारव्या का यह साल पूरा नहीं हुआ है कि फिर से उनका ट्रांसफर हो गया है। नेहा का इस साल चौथी बार ट्रांसफर हुआ है।
चार बार ट्रांसफर होने से नेहा मारव्या परेशान हो गई हैं। उन्होंने मध्य प्रदेश IAS एसोसिएशन के ऑफिशियल ग्रुप में एक लंबा पोस्ट लिखा है। अपनी पोस्ट में महिला अधिकारी ने अपना दर्द बयां किया है। उन्होंने लिखा है कि एक साल में चार ट्रांसफर हुए हैं। उन्होंने अपनी एसोसिएशन से कहा कि अगर मैं कही रहूंगी नहीं तो काम कैसे कर पाऊंगी।
मातहतों के लिए भी आसान टारगेट
हैरानी की बात है कि नेहा मारव्या के इस पोस्ट को लेकर ग्रुप के सदस्यों ने कोई टिप्पणी नहीं की है। मध्य प्रदेश की एक ब्यूरोक्रेट का शनिवार को एक साल में चौथी बार ट्रांसफर कर दिया गया, जिसके बाद उन्होंने इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (IAS) को लिखते हुए कहा कि वह अपने मातहतों के लिए भी आसान टारगेट हैं। उन्होंने पूछा कि जब उनका टर्म दो से तीन महीने का होता है तो वह कैसे काम करेंगी। नेहा मारव्या ने कहा, 'जब तक मुझे चार्ज समझ में आता है, मुझे हटा दिया जाता है।'
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दो महीने से भी कम समय में हुआ ट्रांसफर
नेहा मारव्या का नया ट्रांसफर ट्राइबल एरिया डेवलपमेंट प्रोजेक्ट डायरेक्टर का चार्ज संभालने के दो महीने से भी कम समय में हुआ। यह तब हुआ जब कुछ दिन पहले ही कर्मचारियों ने उनके खिलाफ प्रदर्शन किया था, क्योंकि उन्होंने कर्मचारियों को नोटिस जारी करके सफाई मांगी थी। उन्हें मध्य प्रदेश शेड्यूल्ड ट्राइब फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन का मैनेजिंग डायरेक्टर (एडिशनल सेक्रेटरी के बराबर) बनाया गया था।
साजिश रचने वाले हमेशा उनसे जीत जाते हैं
महिला अधिकारी ने आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि साजिश रचने वाले हमेशा उनसे जीत जाते हैं जबकि वह हार जाती हैं। मध्य प्रदेश सरकार ने पांच सितंबर को बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया था। इसमें आदिम जाति क्षेत्रीय विकास योजना विभाग की संचालक, मध्य प्रदेश रोजगार एवं प्रशिक्षण परिषद की प्रबंध संचालक, मध्य प्रदेश अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम की प्रबंध संचालक और आदिम जाति अनुसंधान एवं विकास संस्थान में संचालक पद की जिम्मेदारी संभाल रहीं नेहा मारव्या का भी नाम शामिल था।
फेरबदल में उन्हें अन्य पदों से हटाकर केवल अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी सौंपी गई। इससे आहत मारव्या ने एसोसिएशन के व्हाट्सएप ग्रुप में लिखा, 'पांच सितंबर 2026 की तबादला सूची देखकर मैं बेहद परेशान हूं, जिसमें एक बार फिर मेरा नाम शामिल है। पदभार संभालने के महज 50 दिनों के भीतर मेरा तबादला कर दिया गया। एक साल के भीतर यह चौथी बार है।'
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उन्होंने कहा, 'मैंने हमेशा ऑर्डर इज्जत से माने हैं, लेकिन इस बार मैं हतोत्साहित महसूस कर रही हूं।'
कर्मचारियों ने मेरे खिलाफ बगावत की
उन्होंने कहा, 'मेरा तबादला इसलिए किया गया क्योंकि विभाग के अधीन काम करने वाले उन कर्मचारियों ने मेरे खिलाफ बगावत कर दी, जिनका नियंत्रण मेरे पास नहीं बल्कि विभाग के पास है।' उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारी उनकी मेज पर हाथ पटक रहे थे और तबादला करवाने की धमकी दे रहे थे। महिला आईएएस अधिकारी ने कहा, 'मैंने उचित माध्यम से कर्मचारियों की इस अवज्ञा, फाइलों को रोककर रखने और विभाग में मेरे साथ किए जा रहे दुर्व्यवहार की शिकायत की थी। मुझे उम्मीद थी कि आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। लेकिन इसके बजाय मेरा ही तबादला कर दिया गया।'
मारव्या ने सवाल उठाया कि क्या एक आईएएस अधिकारी इतना असुरक्षित है कि उसके अधीनस्थ कर्मचारी भी उसके खिलाफ बगावत करके उसका तबादला करवा सकते हैं? उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि कोई भी आईएएस अधिकारी ऐसा कुछ कर सकता है जिसके कारण पदभार संभालने के महज एक महीने में अधीनस्थ कर्मचारी उसके खिलाफ बगावत पर उतर आएं क्योंकि एक अधिकारी को तो एक महीने में कामकाज समझने का पर्याप्त अवसर भी मुश्किल से मिल पाता है।
उन्होंने कहा, 'लेकिन अधीनस्थ कर्मचारियों की इस बगावत के दबाव में मेरा तबादला करके मुझे अपमानित किया गया है।'
छोटे कार्यकाल ने हौसला तोड़ा
मारव्या ने आगे कहा कि बार-बार छोटे कार्यकाल ने उनका हौसला तोड़ दिया था। उन्होंने एसोसिएशन को लिखा, 'मैंने सालों तक सब्र रखा, उम्मीद थी कि चीजें सुधर जाएंगी, लेकिन अब मेरे नीचे काम करने वालों ने मुझे धमकाना शुरू कर दिया है। हमेशा साजिश करने वाले जीतते हैं और मैं हार जाती हूं। सिस्टम ने मुझे फेल कर दिया है। आज मैं हूं, कल कोई और IAS ऑफिसर टारगेट होगा।'
जनवरी 2025 में डिंडोरी जिले की कलेक्टर का पद संभालने के आठ महीने बाद ही नेहा मारव्या को हटा दिया गया था। 2017 में शिवपुरी जिला पंचायत के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर के तौर पर काम करते समय गाड़ी के पेमेंट को लेकर उस समय के कलेक्टर ओपी श्रीवास्तव के साथ उनके झगड़े ने सुर्खियां बटोरीं। 2022 में उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रिंसिपल सेक्रेटरी मनीष रस्तोगी ने उन्हें रेवेन्यू डिपार्टमेंट में उनकी पोस्टिंग का चार्ज लेने से मना कर दिया।