• NEW DELHI
06 Mar 2026, (अपडेटेड 06 Mar 2026, 3:01 PM IST)
नेपाल चुनाव में बलेंद्र शाह की नई नवेली सियासी पार्टी सबसे आगे चल रही है। झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र से केपी शर्मा ओली भी पीछे चल रहे हैं। ऐसे में आइये जानते हैं बलेंद्र का भारत के प्रति रुख क्या है?
काठमांडू के पूर्व मेयर बलेंद्र शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) नेपाल चुनाव में सबसे आगे चल रही है। अगर उनकी पार्टी बहुमत हासिल करने में कामयाब होती है तो 35 वर्षीय बलेंद्र शाह नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री होंगे। पिछले साल सितंबर में नेपाल में जेन-जी आंदोलन भड़का था। उस वक्त बलेंद्र शाह का नाम सुर्खियों में आया था।
आंदोलनरत युवाओं ने बलेंद्र शाह से चुनाव लड़ने की अपील की थी। बलेंद्र शाह ने साल 2022 में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी की स्थापना की थी। बेहद कम समय में यह पार्टी नेपाल की सत्ता के करीब पहुंच रही है। ऐसे में आइये जानते हैं कि अगर बलेंद्र शाह का भारत के प्रति रुख क्या है?
रैपर से राजनेता बने बलेंद्र शाह ने कर्नाटक के विश्वेश्वरैया प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है। मगर उनके कई बयान से भारत-विरोधी रुख की झलक भी दिखती है। पिछले साल नवंबर महीने बलेंद्र शाह ने एक विवादित फेसबुक पोस्ट किया था। इसमें भारत, चीन और अमेरिका के अलावा कई देशों की विपक्षी पर्टियों के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी। हालांकि बाद में यह पोस्ट डिलीट कर दी गई थी।
बलेंद्र शाह नेपाल में भारतीय फिल्मों पर प्रतिबंध लगाने के भी पक्ष में हैं। उनका तर्क है कि भारतीय फिल्मों में माता सीता को भारत की पुत्री दिखाया गया। जबकि हिंदू धर्म ग्रंथों के मुताबिक उनका जन्म नेपाल या सीमा के करीब उत्तरी बिहार में हुआ था।
बलेंद्र शाह की दफ्तर में लगा नेपाल का विवादित मैप।
वे बॉलीवुड पर बैन लगाने की एक और वजह भी बताते हैं। बलेंद्र का कहना है कि भारतीय फिल्मों में पाकिस्तान को बमों और हथियारों के अड्डे के तौर पर दिखाया गया है। नेपाल और श्रीलंका के लोगों को भी लगता है कि पाकिस्तान में सिर्फ आतंकी रहते हैं। इसी डर से दोनों देशों के नागरिक पाकिस्तान जाने से डरते हैं।
नेपाल के पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली ने भारत के साथ सीमा मुद्दे पर तनाव काफी बढ़ाया। अब बलेंद्र शाह भी उसी की राह में हैं। बलेंद्र ने अपने दफ्तर में एक ग्रेटर नेपाल का एक नक्शा लगाया। इसमें सुगौली संधि से पहले के नेपाल को दिखाया गया। माना जाता है कि उन्होंने यह नक्शा 'अखंड' भारत के जवाब में लगाया था।
पूरे मामले में बलेंद्र शाह का कहना है कि भारत ने अपने संसद में नक्शा लगाया है। उसे सांस्कृतिक मानचित्र बताता है। हमने ग्रेटर नेपाल का ऐतिहासिक नक्शा लगाया है। इस पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
केपी शर्मा ओली पीछे
झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र से बलेंद्र शाह चुनाव मैदान में उतरे हैं। इस सीट को केपी शर्मा ओली का गढ़ कहा जाता है। मगर अभी तक केपी शर्मा ओली पीछे चल रहे हैं। मधेसी हिंदू परिवार में जन्मे बलेंद्र की शादी सबीना काफले से हुई है। नेपाल संसद के निचले सदन में कुल 275 सदस्य हैं। उनकी पार्टी अभी 62 सीटों पर आगे चल रही है।