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न जमीन, न आसमान, जंग का अखाड़ा समंदर, भारत कितना आत्मनिर्भर?

समुद्र सदियों से व्यापार की धुरी रहे हैं। डच, फ्रांसीसी और अंग्रेजों ने सैकड़ों साल समंदर की बादशाहत कायम रखी। ईरान और अमेरिका की जंग भी समंदर पर ही हो रही है। भारत की नौसेना का हाल क्या है, आइए समझते हैं।

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भारतीय नौसेना। Photo Credit: Khabargaon

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9 राज्य, 4 केंद्र शासित और 11,098.8 किलोमीटर तक फैली भारत की विशाल तटरेखा। समंदर में गरजती जंगी जहाजें। ये जहाजें तबाही भी मचा सकती हैं, तबाही से किसी देश को बचा भी सकती हैं। बांग्लादेश हो या श्रीलंका, जब-जब आपदा में पड़े, इसी समंदर के रास्ते, भारत उनके लिए संकटमोचक बना। 

यही समंदर है, जहां से पाकिस्तान, चहलकदमी से डरता है कि भारतीय टोही जहाजों के रडार पर न आने पाए, यही समंदर है, जहां भारत की टोह लेने की कोशिश में चीन, दिन-रात निगरानी करता है। भारत विरोध जताता है, पड़ोसियों पर दबाव बनाता है और चीन पीछे खिसकता है।

भारत तीन तरफ से बड़े समुद्र से घिरा है। दक्षिणी हिस्से में हिंद महासागर, पश्चिम में गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक और केरल की तरफ बहता अरब सागर, पूरब में पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु की ओर बंगाल की खाड़ी। ये वही जगहें हैं, जहां से विदेशियों ने भारत में घुसपैठ की और सैकड़ों साल तक राज किया। मैदानी हिस्सों से आए आक्रांता आए, समुद्री राहों से व्यापारी बनकर डच, पुर्तगाली, अंग्रेज, जिन्होंने भारत पर राज किया।

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गुलामी से आजादी तक, समंदर में कैसा रहा भारत का सफर?

साल 1498। समंदर से एक व्यापारी वास्को डी गामा भारत आया। केरल के कालीकट में उसकी जहाज ठहरी। पुर्तगाल उसकी जन्मस्थली थी। व्यापारी बनकर आया था, 1524 ईस्वी में पुर्तगाल की तरफ से भारत का वॉयसराय बना। कोच्चि के राजा को हराकर, पुर्तगाली शासन को पहली कामयाबी दिलाई।

आंध्र प्रदेश के मसुलीपट्टनम में, पुलीकट और सूरत में डच व्यापारियों ने 1602 के बाद अपना विस्तार किया। 1608 तक, अंग्रेजों का पहला व्यापारिक जहाज 'हेक्टर' गुजरात के सूरत स्थित बंदरगाह में दस्तक दे चुका था। 

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यूरोपीय शक्तियों से बहुत पहले अरब व्यापारी केरल के मालाबार में व्यापार के लिए आते थे। फ्रांसीसी सबसे बाद में आए। 1664 तक, उनके अधिकारी जीन-बैप्टिस्ट कोलबर्ड ने फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी की नींव रख दी। ये वही शक्तियां हैं, जिन्होंने भारतीयों का ही शोषण किया, कई हिस्सों पर कब्जा रहा।

अब कितनी ताकतवर है भारतीय नौसेना?

भारतीय नौसेना, दुनिया के शीर्ष 4 देशों में शुमार है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक करीब 70 फीसदी यु्द्धपोत अब भारत में बनते है। भारत इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर हुआ है। ग्लोबल फायरपावर 2026 की लिस्ट में भारत, दुनिया की सबसे ताकतवर नौसेनाओं में से चौथे पायदान पर है। अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत, सबसे ताकतवर समुद्री देश है।   ख्या पर फोकस करता है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक भारतीय नौसेना के पास करीब 150 जहाज और पनडुब्बियां हैं। भारत सिर्फ जहाजों की संख्या नहीं बढ़ा रहा है, बल्कि पहले से भी मौजूद जहाजों को अपग्रेड पर जोर दे रही है। 

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भारतीय नौसेना की ताकत क्या है?

भारतीय नौसेना, 50 से ज्यादा जहाज और पनडुब्बियों को तैयार करने पर जोर दे रही है। ज्यादातर जहाज देश में ही बनाए जा रहे हैं। कोलकाता के ग्रासेन शिपबिल्डर्स (GRSE) ने 3 बड़े लैंडिंग जहाज और 10 तेज हमला करने वाली जहाजें सौंप दी हैं। भारत एंटी सबमरीन कार्वेट (ASW) पर जोर दे रही है। ये जहाजें,दुश्मन की पनडुब्बियों को ट्रैक कर तबाह कर सकती हैं, इन युद्धपोतों को तैयार करने पर भारत जोर दे रहा है। 

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भारत, नौसेना में आत्मनिर्भर कैसे हो रहा है?

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक ग्रासेन शिपबिल्डर्स, लैंडिंग क्राफ्ट यूनिट्स (LCUs) पर जोर दे रहा है। दक्षिण में कोच्चि शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) देश के सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। भारत स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर तैयार कर रहा है। मुंबई के मझगांव डॉक्स लिमिटेड (MDL), कोलकाता क्लास और P-15B डिस्ट्रॉयर्स के साथ-साथ शिवालिक क्लास की स्टेल्थ फ्रिगेट्स पर भी भारत जोर दे रहा है। भारत स्कॉर्पीन क्लास की पनडुब्बियों को बना रहा है।

भारत के पास एडवांस्ड ऑफशोर पेट्रोल वेसल्स (OPV) हैं। ये मध्यम आकार के युद्धपोत हैं, जो तटीय इलाकों में समुद्री सीमाओं की रक्षा करते हैं। ये युद्धपोत, एक्सक्लूसिव इकॉनमिक जोन, एंटी स्मगलिंग ऑपरेशन और सर्च और रेस्क्यू के लिए बनाए गए हैं। भारतीय नौसेना और तट रक्षक के लिए ऐसे युद्धपोत बेहद अहम हैं।

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भारत कैसे अपनी ताकत बढ़ा रहा है?

भारतीय नौसेना ने निजी शिपयार्ड्स को भी युद्धपोत बनाने का मौका दिया है। पिपावाव और एबीजी शिपयार्ड जैसी कंपनियों को नॉन-ऑफशोर पेट्रोल वेसल्स और कैडेट ट्रेनिंग शिप्स बनाने के ठेके दिए गए हैं। देश में युद्धपोत निर्माण की क्षमता लगातार बढ़ रही है। 1972 में INS नीलगिरी के कमीशन होने के बाद से ही भारत, सैन्य महाशक्तियों में शुमार है। भारतीय युद्धपोत हमला भी कर सकते हैं, एयक्राफ्ट भी उतार सकते हैं, निगरानी भी कर सकते हैं।

नौसेना की वह ताकत, जिसकी वजह से हद में रहते हैं पड़ोसी

भारत, पानी की सतह से पानी के अंदर तक, हमला करने की क्षमता है। भारत के पास बैलिस्टिक मिसाइलों की क्षमता वाले जहाज हैं, फाइटर जेड करियर जंगी जहाजें भी हैं। भारत के एयर क्राफ्ट करियर भी पड़ोसी देशों के मुकाबले बेहतर स्थित में हैं। एयर क्राफ्ट करियर: भारत के पास 2 सक्रिय एयरक्राफ्ट करियर हैं। INS विक्रांत और INS विक्रमादित्य। रूस निर्मित कीव-क्लास करियर का अपग्रेड वर्जन अब भारत के पास है। ये एयरक्राफ्ट करियर मिग-29के और राफेल जैसे लड़ाकू विमानों को उतारने में सक्षम हैं।

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  • सब मरीन: भारत के पास 15 से ज्यादा पनडुब्बियां हैं। परमाणु शक्ति संपन्न अरिहंत क्लास की सबरीन भी है तो डीजल-इलेक्ट्रिक कलवरी क्लास जैसी आधुनिक पनडुब्बियां भी हैं। सिंधुघोष और शिशुमार क्लास की पनडुब्बियां भी सेवा में हैं। भारत ने हाल ही में INS अरिदम को शामिल किया है। यह तीसरी, स्वदेशी परमाणु संचालित बैलिस्टिक मिसाइल से लैस बनडुब्बी है। यह अरिहंत और अरिघात से ज्यादा बड़ी और ताकतवर है।  

  • युद्धपोत: भारत के पास 40 से ज्यादा विध्वंसक जहाज, कॉर्वेट्स और फ्रिगेट हैं। इनकी मारक क्षमता ऐसी है कि दुश्मन को ट्रैक करने तक का मौका नहीं मिल पाता है। विशाखापत्तनम और कोलकाता क्लास के युद्धपोत, नौसेना की ताकत बढ़ाते हैं। शिवालिक और तलवार क्लास के फ्रिगेट्स, रडार से बचने में सक्षम हैं। 

  • पेट्रोलिंग जहाजें: नौसेना के पास 130 से ज्यादा तटवर्ती पेट्रोल, गश्ती जहाजे हैं। गहरा समंदर हो या तटीय इलाके, हर जगह, ये जहाजें दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम हैं। भारत के पास INS जलाश्व है, लैंडिंग क्राफ्ट हैं, ईंधन और मरम्मत करने वाले छोटे जहाज भी हैं, जिनकी मौजूदगी सेना की ताकत बढ़ाती है। 

  • एंटी सबमरीन युद्धपोत: भारतीय नौसेना की एंटी सबमरीन वारफेयर भी बेहद मजबूत है। भारत के अत्याधुनिक स्वदेशी युद्धपोत भी हैं। भारत के पास कमोर्टा क्लास के स्टील्थ जहाज भी हैं। नौसेना के पास INS कमोर्टा, INS कदमट्ट, INS किल्टन और INS कवरत्ती भी हैं, जो गहरे समंदर में पनडुब्बियों को खोज सकते हैं, उन्हें तबाह करने में सक्षम हैं। 

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भारत के पास INS अर्णाला भी है, यह स्वदेशी युद्धपोत है। यह तटीय और उथले पानी की सुरक्षा के लिए डिजाइन किया गया है। भारत के पास INS एंड्रोथ, INS अंजदीप, INS अग्रे और INS माहे जैसे युद्धपोत हैं। ये जहाजें अत्याधुनिक साउंड नेविगेशन एंड रैंगिंग सिस्टम से लैस हैं। पानी के भीतर अल्ट्रसोनिक तरंगों से दुश्मनों का टोह आसनी से लगा सकती हैं। टॉरपीडो और रॉकेट लॉन्चर्स से लैस ये युद्धपोत भारतीय सीमाओं की हिफाजत कर रहे हैं। 

जंगी बेड़े में शामिल विदेशी जहाज कौन से हैं?

INS विक्रमादित्य, दिल्ली और राजपूत क्लास के डिस्ट्रॉयर्स, तलवार क्लास के फ्रिगेट्स और  कलवरी क्लास की पनडुब्बियां अब भारतीय नौसेना की शान हैं। फ्रांस और रूस की तकनीक की मदद से भारत अपने शिपिंग प्रोजेक्ट्स को नई दिशा दे रहा है। भारत नौसेना की क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की तरफ कदम बढ़ा रहा है। 

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भारत को समुद्री ताकत क्यों बढ़ानी पड़ी?

कुछ हिस्से 1947 में आजाद हुए, कुछ जगहों को भगाने में आजादी के बाद भी 2 दशक लगा। गोवा से पुर्तगालियों को भागने में 19 दिसंबर 1961 को भारत कामयाब हुआ। ये लोग, समंदर से आए थे, भागे भी समंदर से। भारत के बगल में तीन पड़ोसी देश ऐसे हैं, जिनसे टकराव की स्थिति हमेशा बनी रहती है। पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश। 

चीन हिंद महासागर में अपना दबदबा चाहता है। चीन की बढ़ती मौजूदगी और 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' भारत के लिए खतरा है। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (PLAN) अब दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना बनने के करीब है। चीन ने पाकिस्तान के ग्वादर, श्रीलंका के हंबनटोटा, जिबूती और म्यांमार जैसे देशों में कई बंदरगाहों पर भारी निवेश किया है। इसे चीन 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' कहता है। भारत को समुद्र में चीन घेरना चाहता है।  

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हिंद महासागर में रिसर्च के नाम पर चीन, परमाणु पनडुब्बियों और खोजी जहाजों को तैनात करता है। भारत के लिए जासूसी का जोखिम हमेशा बना रहता है। भारत, स्ट्रेट ऑफ मलक्का पर जोर देता है, यह चीन के व्यापार का अहम रास्ता है। यहां से चीन सिंगापुर, इंडोनेशिया और मलेशिया में अपना व्यापार करता है। दबदबा कायम रखने के लिए मजबूत नेवी मजबूरी भी है। 

समंदर में चीन ही नहीं, पाकिस्तान भी है। पाकिस्तान अपनी नौसेना को सक्षम बना रहा है। चीन, उसके साथ साए की तरह खड़ा है। भारत ने अगर अपनी समुद्री सैन्य शक्ति नहीं बढ़ाता है तो चुनौती हमेशा बनी रहेगी। चीन ने पाकिस्तान को हांगोर रेंज की पनडुब्बियां दीं हैं। इनकी संख्या करीब 8 है। यह भारत की पश्चिमी सीमा के लिए किसी खतरे से कम नहीं है। 



मात्रा के लिहाज से देखें तो भारत का 95 फीसदी व्यापार समुद्री मार्ग के जरिए होता है। ऐसे में खाड़ी देशों से आने वाले तेल और गैस की सुरक्षा के लिए भी भारत को मजबूत नेवी चाहिए। खाड़ी देशों से आने वाले तेल और गैस की सुरक्षा, भारत की अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी हैं। लाल सागर और अदन की खाड़ी में बढ़ती समुद्री डकैती और ड्रोन हमलों का खतरा बना रहता है। भारत इसलिए भी अपनी सुरक्षा पर जोर देता है। 


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