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भारत सरकार ने अपने नियमों के जरिए डीपफेक वीडियो पर कसी लगाम

भारत सरकार ने कुछ नए नियम बनाए हैं जिनके तहत डीपफेक वीडियो और फर्जी AI कॉन्टेंट पर लगाम लगाई जाएगी। इसके लिए कंपनियों की भी जिम्मेदारी तय होगी।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, AI Generated

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भारत सरकार ने आईटी के नए नियम जारी किए हैं। इन नियमों के जरिए सोशल मीडिया पर फैल रहे फेक वीडियो पर अंकुश लगाया जा रहा है। भारत सरकार के नियमों के तहत अगर कोई भी फोटो, वीडियो या ऑडियो एआई से बनाया गया हो या उसमें बदलाव किया गया हो तो उस पर साफ-साफ लिखा होना चाहिए। आईटी नियमों में यह स्पष्ट किया गया है कि अब से एआई से जेनरेटेड कंटेंट जैसे एआई जेनरेटेड फोटो और वीडियो पर उस AI का लोगो लगा होना चाहिए।

 

एआई कंटेंट पर लेबल लगाने की प्रक्रिया 20 फरवरी से प्रभावी की जाएगी। सरकार की इस नियम के पीछे मंशा साफ है कि लोगों को वीडियो या ऑडियो देखते ही समझ आ जाए कि यह फेक कंटेंट है। लेबल की वजह से किसी भी कंटेंट को देखने के बाद भ्रम की स्थिति नहीं बनेगी। साथ ही कंटेंट पर लेबल लगने से लोग आसानी से समझ पाएंगे कि यह कंटेंट किस एआई ऐप से बनाया गया है। यह नियम यूट्यूब, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर लागू होगा।

 

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ऐप की बढ़ी जिम्मेदारी

इन नियमों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी बढ़ा दी गई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कोई भी कंटेंट अपलोड होने पर ऐप यह सवाल पूछेगी कि क्या यह कंटेंट एआई जेनरेटेड है या नहीं। अगर वीडियो एआई जेनरेटेड है, तो वीडियो की शुरुआत में लिखा होना चाहिए की यह वीडियों एआई जेनरेटेड है। इसके लिए प्लेटफॉर्म्स तकनीक का इस्तेमाल कर सकते हैं।

 

इन नियमों में एक बड़ा बदलाव कंटेंट हटाने की समयसीमा को लेकर किया गया है। पहले आपत्तिजनक कंटेंट हटाने के लिए प्लेटफॉर्म्स को 36 घंटे का समय मिलता था, अब इसे घटाकर सिर्फ 3 घंटे कर दिया गया है। यानी अगर कोई कंटेंट देश की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था या किसी व्यक्ति की निजता को नुकसान पहुंचाता है, तो उसे बहुत जल्दी हटाना होगा।

 

इसके अलावा शिकायतों के समाधान की समयसीमा भी कम कर दी गई है। जहां पहले यूजर्स की शिकायतों का जवाब देने में 15 दिन लगते थे, अब कई मामलों में यह समय घटाकर 7 दिन कर दिया गया है। कुछ संवेदनशील मामलों में 24 घंटे की जगह 12 घंटे के भीतर कार्रवाई करनी होगी।

 

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नियमों का उद्देश्य

आजकल सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हो रहे हैं। ये वीडियो हकीकत नहीं बल्कि डीपफेक होते हैं, जिन्हें देखकर किसी इंसान को यह पता ही नहीं चलता कि यह वीडियो फेक है। इससे समाज में भ्रम की स्थिति फैल जाती है। इन एआई जेनरेटेड वीडियो की वजह से कई बड़े और सम्मानित लोगों का नाम खराब हो जाता है। इन्हीं समस्याओं को दूर करने के लिए सरकार ने नियम लागू किए हैं, ताकि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ज्यादा पारदर्शी हो सकें।


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