हाल ही में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया कि अमेरिकी दबाव में भारत ईरान स्थित चाबहार पोर्ट का संचालन बंद कर देगा। अब भारतीय विदेश मंत्रालय ने इन रिपोर्टों का खंडन किया और कहा कि इस मामले में अमेरिका के साथ भारत की बातचीत जारी रहेगी। ईरान का चाबहार पोर्ट भारत के लिए रणनीतिक तौर पर बेहद अहम है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 'भारत अपनी भागीदारी के संबंध में कई विकल्पों पर विचार कर रहा है।'
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 फीसद अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी दी। इसके बाद से कई मीडिया रिपोर्ट्स में चाबहार पोर्ट से भारत के दूरी बनाने की खबरें सामने आईं। अब विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत ईरान के चाबहार बंदरगाह पर परिचालन जारी रखने के तरीकों के बारे में अमेरिका और ईरान के साथ बातचीत कर रहा है।
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डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने पिछले साल सितंबर महीने में ईरान पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे। मगर चाबहार पोर्ट मामले में भारत को छह महीने की छूट दी थी। इसी साल 26 अप्रैल से यह छूट खत्म होने वाली है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 'जैसा कि आप जानते हैं, 28 अक्टूबर को अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने एक पत्र जारी किया था। इसमें 26 अप्रैल 2026 तक वैध सशर्त प्रतिबंध छूट पर दिशानिर्देश दिए गए थे। हम इस व्यवस्था पर काम करने के लिए अमेरिकी पक्ष के साथ बातचीत कर रहे हैं।' अगले महीने विदेश मंत्री एस जयशंकर अपने अमेरिकी समकक्ष से मुलाकात भी कर सकते हैं।
विदेश मंत्रालय के बयान के बाद साफ हो चुका है कि चाबहार पोर्ट से भारत के पीछे हटने की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है। भारत अब भी अमेरिका से बातचीत कर रहा है, ताकि चाबहार मामले में उसे पहले की तरह छूट मिलती रहे।
भारत और ईरान के बीच कितना व्यापार?
अमेरिका ने ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी है। विश्वेषकों का मानना है कि भारत इसकी जद में नहीं आएगा, क्योंकि ईरान के साथ व्यापार बेहद कम है। शुक्रवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी इसी बात पर जोर दिया। उन्होंने कहा, भारत और ईरान के बीच द्विपीय व्यापार करीब 1.6 बिलियन डॉलर है। इसमें 1.2 बिलियन डॉलर भारत का निर्यात और 0.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर का आयात शामिल है।
कहां से शुरू हुआ पूरा हंगामा
चाबहार पोर्ट मामले में पूरा विवाद इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ। इसमें सरकारी सूत्रों के मुताबिक बताया गया कि भारत लगभग 120 मिलियन अमरीकी डॉलर ट्रांसफर करने की प्रक्रिया में है, ताकि चाबहार बंदरगाह प्रोजेक्ट पर सीधे जोखिम को खत्म किया जा सके। इसमें यह भी दावा किया गया कि चाबहार बंदरगाह के विकास को आगे बढ़ाने के लिए एक नई इकाई बनाने की संभावना पर भी विचार चल रहा है।
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क्यों अहम है चाबहार पोर्ट?
भारत साल 2003 से ही चाबहार पोर्ट को विकसित करने की बातचीत कर रहा था। हालांकि 2015 में भारत और ईरान ने एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया। पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट के जवाब में भारत ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में चाबहार बंदरगाह विकसित कर रहा है। यह मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक भारत के पहुंच का अहम केंद्र है।
चाबहार बंदरगाह को इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) से जोड़ा गया है। यह 7,200 किलोमीटर लंबा मल्टी-मोड ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट है। इसी रास्ते से भारत ईरान, अफगानिस्तान, आर्मेनिया, अजरबैजान, रूस, मध्य एशिया और यूरोप तक अपना माल पहुंचाता है।