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कश्मीरी अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी को उम्रकैद की सजा, क्या हैं आरोप?

जम्मू कश्मीर की अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी को दिल्ली की एक अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। उनके साथ दो साथियों फहमीदा और नाहिदा नसरीन को भी सजा दी गई है।

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आसिया अंद्राबी । Photo Credit: AI Generated

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दिल्ली की एक विशेष अदालत ने कश्मीरी अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी को उम्रकैद की सजा दे दी है। उनके दो साथी सोफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन को भी 30-30 साल की जेल हुई है। अदालत ने उन्हें आतंकवादी संगठन चलाने और जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने की साजिश रचने का दोषी पाया।

 

यह फैसला 14 जनवरी 2026 को सुनाया गया था। तीनों महिलाओं को अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट (UAPA) और आपराधिक साजिश की धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया। आरोप था कि उन्होंने देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने की कोशिश की।

 

यह भी पढ़ें: आसिया अंद्राबी: नाम याद है या भूल गए, कोर्ट ने आतंकी केस में दोषी पाया

NIA अदालत ने दी थी सजा

इससे पहले दिल्ली की एनआईए कोर्ट ने भी आसिया अंद्राबी को अलगाववाद के मामले में दोषी करार दिया था। अंद्राबी, यास्मीन मलिक के बाद दूसरी नेता हैं जिन्हें जम्मू कश्मीर का स्पेशल स्टेटस हटाने के बाद एनआईए ने दोषी करार दिया है।

दुख्तरान-ए-मिल्लत की मुखिया

आसिया अंद्राबी दुख्तरान-ए-मिल्लत नामक संगठन की मुखिया हैं। यह संगठन पहले ही भारत सरकार द्वारा बैन कर दिया गया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के मुताबिक, आसिया और उनके साथी लंबे समय से नफरत फैलाने वाले भाषण दे रहे थे, प्रचार कर रहे थे और लोगों को भारत विरोधी गतिविधियों के लिए उकसा रहे थे। उन्होंने सोशल मीडिया और दूसरी जगहों पर जम्मू-कश्मीर को अलग करने की बातें फैलाईं।

आतंकी संगठन चलाने का आरोप

तीनों के ऊपर एक आतंकवादी संगठन चलाने का आरोप है। इसका मकसद भारत की एकता और अखंडता को तोड़ना था। अदालत ने उन्हें साजिश रचने और आतंकवादी संगठन का सदस्य होने का दोषी माना।

 

आसिया अंद्राबी 64 साल की हैं। सोफी फहमीदा 40 साल और नाहिदा नसरीन 58 साल की बताई जाती हैं। तीनों को 2018 में गिरफ्तार किया गया था। तब से वे जेल में हैं। करीब 8 साल तक मुकदमा चला। दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट में सुनवाई हुई।

क्या बोला बचाव पक्ष

NIA ने अदालत से कहा कि इन तीनों को उम्रकैद दी जाए। इससे कानून पर लोगों का भरोसा बढ़ेगा और लोगों का भरोसा बनेगा। बचाव पक्ष ने कहा कि ये महिलाएं पढ़ी-लिखी हैं, बीमार हैं और लंबे समय से जेल में हैं। एक को स्पाइन की सर्जरी की जरूरत है, लेकिन नहीं हो पाई।

 

अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि देश के खिलाफ साजिश बर्दाश्त नहीं की जा सकती। अलगाववाद और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले किसी भी काम को सख्ती से रोका जाएगा।

2018 का है मामला

यह मामला 2018 का है। NIA ने FIR दर्ज की थी। आरोप था कि आसिया अंद्राबी अपने संगठन के जरिए युवाओं को गुमराह कर रही थीं और पाकिस्तान समर्थक गतिविधियां चला रही थीं।

 

यह भी पढ़ें: आर्टिकल 370 हटाने के खिलाफ छोड़ी IAS, कांग्रेस में शामिल हुए गोपीनाथन

 

कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियां लंबे समय से चल रही हैं। 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद केंद्र सरकार ने कश्मीर में आतंकवाद और अलगाववाद पर सख्ती बढ़ाई है। कई नेता गिरफ्तार हुए और संगठन बैन किए गए। यह फैसला सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। NIA ने कहा कि कानून का राज स्थापित करने के लिए ऐसे कदम जरूरी हैं।

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