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आसिया अंद्राबी: नाम याद है या भूल गए, कोर्ट ने आतंकी केस में दोषी पाया

कश्मीरी अलगाववादी आसिया अंद्राबी और उनकी दो महिला सहयोगियों सोफी फहमीदी और नाहिदा नसरीन को दिल्ली की एक अदालत यूएपीए के तहत दोषी ठहराया है। 17 जनवरी को सजा का ऐलान होगा।

Asiya Andrabi

आसिया अंद्राबी की फाइल फोटो। ( Photo Credit: PTI

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आसिया अंद्राबी... 2018 में यह नाम काफी चर्चा में रहा। अब सात साल बाद आसिया अंद्राबी का नाम एक बार फिर सुर्खियों में है। दरअसल, दिल्ली की एक अदालत ने आसिया अंद्राबी और उनकी दो महिला सहयोगियों को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत दोषी पाया है। 17 जनवरी को अदालत सजा का ऐलान करेगी।

 

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने साल 2018 में आसिया अंद्राबी को गिरफ्तार किया था। उन पर दो महिला सथियों के साथ मिलकर नफरत भरे भाषणों के माध्यम से भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने, आपराधिक साजिश रचने और यूएपीए के तहत आरोपी बनाया गया था।

 

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बुधवार को दिल्ली की एक अदालत ने मामले की सुनवाई की। एडिशनल सेशंस जज चंदरजीत सिंह ने अंद्राबी को यूएपीए की धारा 18 यानी साजिश रचने और धारा 38 का दोषी पाया। धारा 38 आतंकवादी संगठन की सदस्यता से संबंधित अपराध से जुड़ी है।

सोशल मीडिया और चैनलों पर फैलाया नफरती भाषण

आसिया अंद्राबी का संगठन दुख्तरान-ए-मिल्लत कश्मीर के अलगाववादी समूह 'ऑल पार्टीज हुर्रियत कॉन्फ्रेंस' का हिस्सा है। यह संगठन पाकिस्तान में बैठे आतंकियों के संपर्क में था। उनकी मदद से भोले-भाले कश्मीरियों को भारत के खिलाफ उकसा रहा था, ताकि उन्हें सशस्त्र विद्रोह में शामिल किया जा सके।


अंद्राबी अपनी दो महिला साथियों के साथ मिलकर न केवल पाकिस्तानी बल्कि भारतीय मीडिया में भारत के खिलाफ नफरती भाषण को प्रचारित करती रही। इसके अलावा यूट्यूब, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया पर भी नफरती भाषणों को बढ़ावा दिया। 

आसिया के संगठन पर लग चुका बैन

आसिया अंद्राबी ने 1987 में महिलाओं के अलगाववादी समूह दुख्तरान-ए-मिल्लत (DeM) की स्थापना की थी। हालांकि केंद्र सरकार इस समूह पर बन लगा चुकी है। एनआई के मुताबिक अंद्राबी ने विभिन्न प्लेटफॉर्म के माध्यम से भारत के खिलाफ नफरती और अलगाववादी भाषणों का प्रचार किया। इससे देश की सुरक्षा, अखंडता और संप्रभुता खतरे में पड़ी। तीनों पर जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने की वकालत करने का आरोप भी है।

पिछले साल सितंबर में हुई थी अंतिम बहस

आसिया आंद्राबी और उनकी दो सहयोगी सोफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन के खिलाफ 2021 के फरवरी महीने में आरोप तय किए गए थे। पिछले साल सितंबर महीने में एनआईए की अदालत में मुकदमे की आखिरी बहस हुई। तीनों के विरुद्ध भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने, आंतकी साजिश रचने, देशद्रोह और यूएपीए के तहत आरोप तय किए गए थे।

 

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इन धाराओं के तहत तय हुए थे आरोप

  • आईपीसी की धारा 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) 
  • 121 (भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना)
  • 121-ए (भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश )
  • 124-ए (राजद्रोह)
  • 153-ए (विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना)
  •  153-बी (राष्ट्रीय एकता के लिए हानिकारक आरोप और दावे) 
  • 505 (सार्वजनिक उपद्रव को बढ़ावा देने वाले बयान)
  • यूएपीए अधिनियम की धारा 18 (आतंकवादी कृत्य करने की साजिश रचना)
  • धारा 20 (आतंकवादी गिरोह या संगठन का सदस्य होना)
  • धारा 38 (आतंकवादी संगठन की सदस्यता से जुड़ा अपराध) 
  • धारा 39 (आतंकवादी संगठन को समर्थन देने से जुड़ा अपराध) 

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