जम्मू-कश्मीर के ऊंचे पहाड़ों वाले किश्तवाड़ जिले में पाकिस्तान आधारित जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के आतंकवादियों ने लंबे समय तक छिपने की तैयारी की थी। सुरक्षा बलों ने एक सख्त कार्रवाई में उनका मजबूत बंकर ढहा दिया। यह बंकर पत्थरों से अच्छी तरह छिपाया गया था। इसमें महीनों तक रहने के लिए काफी सामान रखा गया था। सेना ने लंबे समय तक चले एनकाउंटर के बाद इसे नष्ट कर दिया। इस ऑपरेशन में एक बहादुर कमांडो ने अपनी जान गंवाई और कई जवान घायल हुए।
बंकर से मिले सामान से पता चलता है कि आतंकवादियों की लंबे समय तक वहां रहने की योजना थी। वहां से 50 पैकेट नूडल्स (मैगी), टमाटर और आलू का पूरा क्रेट, 15 तरह के मसाले, 10 किलो के दो बैग बासमती चावल, दाल, गेहूं और बाजरा के बैग, दो बड़े एलपीजी सिलेंडर, बर्नर और सूखी लकड़ी बरामद हुई। यह सब देखकर लगता है कि वे सर्दियों में आराम से रहने की योजना बना रहे थे। यह बंकर करीब 12,000 फीट की ऊंचाई पर था और यह करगिल स्टाइल में बना था।
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चत्रू इलाके में शुरू हुआ एनकाउंटर
एनकाउंटर रविवार को सोनार गांव के पास चत्रू इलाके में शुरू हुई। सुरक्षा बलों को आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी। गोलीबारी में ग्रेनेड हमले से 8 जवान घायल हुए। रात में ऑपरेशन रोकना पड़ा क्योंकि पहाड़, घना जंगल और ढलान बहुत मुश्किल थे।
सोमवार को ऑपरेशन फिर शुरू हुआ। इसी दौरान स्पेशल फोर्सेस के हवलदार गजेंद्र सिंह गंभीर रूप से घायल हुए और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। वे उत्तराखंड के रहने वाले थे। सेना ने उनके शौर्य की सराहना की और परिवार के साथ दुख जताया। उत्तरी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी।
घेराबंदी सख्त
सेना के व्हाइट नाइट कोर ने कहा कि ऑपरेशन ट्राशी-1 जारी है। इलाके में घेराबंदी और सख्त कर दी गई है। सेना, पुलिस और सीआरपीएफ के जवान, ड्रोन और स्निफर डॉग्स की मदद से तलाशी ले रहे हैं। 2-3 पाकिस्तानी आतंकवादी अभी भी छिपे हो सकते हैं। उनके भागने के रास्ते बंद कर दिए गए हैं।
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यह साल में जम्मू क्षेत्र का तीसरा एनकाउंटर है। इससे पहले जनवरी में कठुआ और दिसंबर में उधमपुर में एनकाउंटर हुई थी। गणतंत्र दिवस से पहले सुरक्षा बढ़ा दी गई है क्योंकि खुफिया जानकारी मिली है कि पाकिस्तान से नए आतंकवादी भेजने की कोशिश हो रही है।