टेलीकॉम कंपनियां अपने कई प्रीपेड प्लान मंथली रिचार्ज के तौर पर देती हैं लेकिन उनकी वैलिडिटी 30 या 31 दिन नहीं बल्कि 28 दिन की होती है। पहली नजर में 2-3 दिन का अंतर मामूली लगता है लेकिन जब पूरे साल का हिसाब लगाया जाता है तो यह छोटा सा अंतर एक एक्स्ट्रा रिचार्ज में बदल जाता है। यह गणित कैसे काम करता है और इसका कंज्यूमर पर क्या असर पड़ता है? आइए इसे आसान शब्दों में समझते हैं।
अभी देश भर में चार बड़ी टेलीकॉम कंपनियां हैं। इसमें तीन प्राइवेट और एक सरकारी है। इसमें MTNL के मुंबई और दिल्ली में भी यूजर हैं, हालांकि MTNL सिर्फ लैंडलाइन के लिए है। रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया प्राइवेट कंपनियां हैं, जबकि BSNL सरकारी है। टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) के मुताबिक, 2025 तक भारत में टेलीकॉम यूजर की संख्या 1.3 बिलियन से ज्यादा होने का अनुमान है। इस आंकड़े में मोबाइल और लैंडलाइन दोनों यूजर शामिल हैं।
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सब्सक्राइबर के मामले में कौन आगे है?
टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने की 10 फरवरी 2026 को एक प्रेस रिलीज जारी की। इस रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 के आखिर तक अकेले मोबाइल यूजर्स की संख्या करीब 1.24 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है। सब्सक्राइबर नंबर के मामले में रिलायंस जियो अभी भी सबसे आगे है। दिसंबर 2025 तक इसके कुल सब्सक्राइबर बढ़कर करीब 48.9 करोड़ हो गए हैं। जबकि भारती एयरटेल के 46.33 करोड़, वोडाफोन आइडिया (Vi) के 19.87 करोड़ और BSNL के कुल सब्सक्राइबर काउंट 9.27 करोड़ है।
आम यूजर्स 1 साल में 13 रिचार्ज कैसे करवाता है?
आपको बता दें कि एक साल में 365 दिन होते हैं। अगर हर मंथली रिचार्ज 28 दिनों का है, तो 12 रिचार्ज से कुल वैलिडिटी 28 × 12 = 336 दिन होगी। इसका मतलब है कि 365 में से 336 दिन घटाने पर 29 दिन कम रह जाते हैं। इन 29 दिनों की कमी पूरी करने के लिए यूजर को फिर से रिचार्ज करना होगा। इसलिए 28-दिन के प्लान के लिए हर साल 12 नहीं, बल्कि 13 रिचार्ज की जरूरत होती है।
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एक और बात कैलेंडर और बिलिंग साइकिल से जुड़ी है। कैलेंडर महीने 30 या 31 दिन के होते हैं (फरवरी में 28/29 दिन), जबकि 28-दिन का प्लान ठीक 4 हफ्ते का होता है। क्योंकि एक साल में 52 हफ्ते होते हैं, इसलिए 52 हफ्ते ÷ 4 हफ्ते = 13 साइकिल। इसका मतलब है कि कंपनियों के 28-दिन के मंथली प्लान असल में 4-हफ्ते के प्लान होते हैं जो साल में 13 बार रोटेट होते हैं।
टेलीकॉम कंपनियां आपकी जेब कैसे काटती हैं?
अब सवाल यह है कि इसका आर्थिक असर क्या होगा? मान लीजिए कोई यूजर 299 रुपये का प्लान रिचार्ज करता है। अगर वह 12 बार रिचार्ज करता है, तो सालाना खर्च 3,588 रुपये का होगा। लेकिन अगर वह यूजर 13 बार रिचार्ज करता है, तो खर्च बढ़कर 3,887 रुपये हो जाता है, जो लगभग 299 रुपये ज्यादा है। प्लान की कीमत जितनी ज्यादा होगी, अतिरिक्त बोझ उतना ही ज्यादा होगा। अगर किसी परिवार में 3-4 कनेक्शन हैं, तो सालाना खर्च और भी ज्यादा बढ़ जाता है।