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बेरोजगारी के बावजूद काम नहीं ढूंढ रहे लोग? सरकारी रिपोर्ट में खुलासा

PLFS की रिपोर्ट बताती है कि अप्रैल की तुलना में जून में काम की तलाश करने वालों का आंकड़ा कम हो गया है। हालांकि, दो महीने से बेरोजगारी दर स्थिर बनी हुई है।

unemployment in india

प्रतीकात्मक तस्वीर। (AI Generated Image)

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क्या भारत में अब लोगों ने नौकरी ढूंढनी ही बंद कर दी है? सवाल इसलिए क्योंकि नए सरकारी सर्वे में सामने आया है कि जून के महीने में नौकरी ढूंढने वालों का आंकड़ा घट गया है। इसमें सामने आया है कि अप्रैल में नौकरी तलाशने वालों का आंकड़ा 55% से ज्यादा था, जो जून में घटकर लगभग 54% हो गया है। तकनीकी भाषा में इसे लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट यानी LFPR कहा जाता है। यह जानकारी पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) की नई रिपोर्ट में सामने आई है।

 

सर्वे की रिपोर्ट से सामने भी आया है कि दो महीने में लेबर फोर्स में महिलाओं की हिस्सेदारी 2% कम हो गई है। अप्रैल में महिलाओं की हिस्सेदारी 34.2% थी, जो जून तक घटकर 32% पर आ गई। इसी दौरान पुरुषों की हिस्सेदारी 77.7% से घटकर 77.1% हो गई।

 

इतना ही नहीं, रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि शहरों की तुलना में गांवों में LFPR में ज्यादा गिरावट आई है। दो महीने के भीतर गांवों में LFPR 2% तक घट गया है। हालांकि, अच्छी बात यह है कि बेरोजगारी दर स्थिर बनी हुई है।

नौकरियों की स्थिति बताने वाले 3 पैरामीटर

  1. लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (LFPR): इससे पता चलता है कि कितनी बड़ी आबादी है, जो काम की तलाश में है या काम कर रही है।
  2. वर्कर पॉपुलेशन रेशो (WPR): इससे पता चलता है कि देश में कितनी बड़ी आबादी ऐसी है, जो अभी कहीं न कहीं काम कर रही है।
  3. बेरोजगारी दर (UR): इससे पता चलता है कि 15 साल से ज्यादा उम्र की कितनी बड़ी आबादी ऐसी है जो काम ढूंढ रही है लेकिन नौकरी नहीं मिल रही।

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रिपोर्ट में क्या कुछ कहा गया है?

  • LFPR: इस रिपोर्ट से पता चलता है कि देश में LFPR में 15 साल से ज्यादा उम्र के लोगों की हिस्सेदारी घट रही है। अप्रैल में यह 55.6% थी, जो मई में घटकर 54.8% और जून में और घटकर 54.2% पर आ गई। 15 से 29 साल की युवा आबादी में LFPR में कमी आई है। इस उम्र के लोगों की LFPR में हिस्सेदारी अप्रैल में 42.7% थी। यह मई में 42.1% और जून में घटकर 41% पर आ गई।
  • WPR: काम करने वाली आबादी भी घटी है। अप्रैल में WPR 52.8% थी, जो मई में घटकर 51.7% पर आ गई। जून में यह और कम होकर 51.2% हो गई। इसी तरह युवा आबादी की WPR में हिस्सेदारी 2 फीसदी तक घट गई है। 15 से 29 साल की उम्र के लोगों की WPR में हिस्सेदारी 36.8% और मई में 35.8% थी, जो जून में घटकर 34.7% पर आ गई।
  • UR: 15 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में बेरोजगारी दर दो महीने से स्थिर है। अप्रैल में बेरोजगारी दर 5.1% थी। मई और जून में यह 5.6% ही रही। हालांकि, 15 से 29 साल की उम्र की युवा आबादी में बेरोजगारी दर बढ़ी है। इस उम्र के लोगों में अप्रैल में बेरोजगारी दर 13.8% थी, जो मई में बढ़कर 15% और जून में 15.3% हो गई। जून में गांवों में बेरोजगारी दर 4.9% और शहरों में 7.1% रही।

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महिला और पुरुषों में कितनी गैर-बराबरी

वैसे तो आज भी जॉब मार्केट से भारतीय महिलाएं दूर ही हैं लेकिन सर्वे रिपोर्ट से पता चला है कि लेबर फोर्स में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की हिस्सेदारी में ज्यादा गिरावट आई है।

 

इस रिपोर्ट से पता चलता है कि अप्रैल महीने में WPR में महिलाओं की हिस्सेदारी 34.2% और पुरुषों की 77.7% थी। मई और जून में इसमें और गिरावट आ गई। मई में महिलाओं की हिस्सेदारी 33.2% और जून में 32% रही। इनके मुकाबले, पुरुषों की हिस्सेदारी मई में 77.2% और जून में 77.1% रही।

 

यह रिपोर्ट यह भी बताती है कि WPR में युवा महिलाओं की हिस्सेदारी एक महीने में ही 2% तक घट गई। इस उम्र की महिलाओं की WPR में हिस्सेदारी मई में 22.4% थी, जो जून में घटकर 20.6% हो गई। इसी दौरान पुरुषों की हिस्सेदारी 61.6% से घटकर 61% हो गई।

 

हालांकि, अच्छी बात यह है कि महिलाओं की बेरोजगारी दर थोड़ी घटी है। अप्रैल में महिलाओं में बेरोजगारी दर 5.8% थी, जो थोड़ी सी घटकर 5.6% हो गई।

 

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काम की तलाश क्यों नहीं कर रहे भारतीय?

LFPR और WPR का बढ़ना और बेरोजगारी दर का घटना अच्छा माना जाता है। LFPR बढ़ता है तो पता चलता है कि लोग काम की तलाश कर रहे हैं। WPR के बढ़ने से पता चलता है कि नौकरियों में हिस्सेदारी बढ़ रही है। वहीं, बेरोजगारी दर के घटने से पता चलता है कि लोगों के पास काम है।

 

हालांकि, PLFS के जून के सर्वे से सामने आया है कि LFPR घट रहा है। इसका मतलब हुआ कि एक बड़ी आबादी ऐसी रही जिसने काम ढूंढना ही बंद कर दिया।

 

PLFS ने अपनी रिपोर्ट में LFPR और WPR में गिरावट की वजह भी बताई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि मौसम के कारण खेती-बाड़ी से जुड़े काम में कमी आई है। इसके अलावा, जून में भयंकर गर्मी पड़ने की वजह से भी लोगों ने बाहर काम करने से बचने की कोशिश की।

 

इतना ही नहीं, गांवों में खेतों में काम करने वालीं महिलाओं का आंकड़ा भी थोड़ा कम हुआ है। मई में खेतों में काम करने वाली महिलाओं की हिस्सेदारी 70.2% थी, जो जून में घटकर 69.8% हो गई। रिपोर्ट में बताया गया है डेटा से पता चलता है कि गांवों में मुफ्त में काम करने वाले लोग जून में घरेलू काम करने लगे हैं।

 

यह रिपोर्ट बताती है कि गांवों में महिलाओं और पुरुषों में बेरोजगारी दर घटी है। गांवों में महिलाओं में बेरोजगारी दर 4.7% से घटकर 4.4% तो पुरुषों में 5.3% से घटकर 5.1% हो गई। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि गांवों में रहने वाले पुरुष और महिलाओं ने जून में खुद का कोई छोटा-मोटा काम शुरू कर दिया।

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