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'नशे में थे, सड़क हादसे में मौत हुई', पत्रकार राजीव की मौत पर बोली SIT

पत्रकार राजीव प्रताप की मौत के मामले की जांच कर रही SIT का कहना है कि उनकी मौत सड़क हादसे में हुई और हादसे के वक्त वह नशे में थे। राजीव के परिवार ने कहा था कि उन्हें धमकी दी गई थी।

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राजीव प्रताप, Photo Credit: Social Media

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उत्तराखंड के पत्रकार राजीव प्रताप की मौत के मामले में विशेष जांच दल (SIT) ने चौंकाने वाले खुलासा किया है। SIT का कहना है कि राजीव की मौत सड़क हादसे में हुई है और मौत के वक्त वह नशे में थे। राजीव प्रताप की लाश 28 सितंबर को बरामद हुई थी जबकि वह 18 सितंबर को ही लापता हो गए थे। पुलिस ने इस मामले में फिलहाल हादसा ही माना है लेकिन अन्य पहलुओं पर भी गौर किया जा रहा है। इसी मामले में राजीव के परिजन ने कहा था कि उन्हें धमकी दी गई थी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाए थे कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के शासन में पत्रकार डर के साए में जी रहे हैं।

 

SIT ने बताया है कि दुर्घटना की रात राजीव प्रताप शराब के नशे में थे और ठीक से चल भी नहीं पा रहे थे। सीसीटीवी कैमरे में राजीव को हाइवे पर गलत दिशा में कार चलाते हुए और लड़खड़ाते हुए साफ देखा जा सकता है। जांच दल की अगुवाई कर रहे उत्तरकाशी के पुलिस उपाधीक्षक जनक पंवार ने मीडिया को बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के साथ ही सीसीटीवी कैमरे के फुटेज खंगालने और उनके करीबियों से पूछताछ के बाद पुलिस प्रथम दृष्टया इस नतीजे पर पहुंची है कि यह महज सड़क हादसा था। हालांकि, उन्होंने कहा कि पुलिस अभी मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की विवेचना कर रही है। 

 

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SIT ने क्या-क्या बताया?

 

राजीव पंवार ने इसकी विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि 18 सितंबर की शाम 7 बजे राजीव प्रताप और उनके साथ कैमरामैन का काम कर रहे उनके पूर्व छात्र मनबीर कलूड़ा पुलिस लाइन में तैनात मुख्य आरक्षी सोबन से मिलने गए थे। वहीं तीनों ने शराब पीने की योजना बनाई। तीनों कार से बाजार गए और वहां से टैक्सी स्टैंड पहुंचे जहां रात 10 बजे तक उन्होंने शराब पी। उत्तरकाशी के पुलिस उपाधीक्षक के अनुसार, इसके बाद सोबन ने वहां से घर जाने के लिए अपनी कार निकाली लेकिन प्रताप ने उससे रुकने को कहा जिसके बाद बाजार जाकर खाना खाने की योजना बनी। बाजार आकर दोनों ने फिर शराब खरीदकर एक होटल में खाना खाया।

 

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उन्होंने आगे बताया कि बस अड्डे में लगे सीसीटीवी से पता चला है कि रात 11.00 बजे लड़खड़ाते हुए प्रताप होटल से बाहर आए। थोड़ी देर बाद सोबन सिंह भी होटल से निकला और दोनों सोबन की गाड़ी में बैठ गए। सोबन कुछ देर बाद गाड़ी से बाहर आ गए और प्रताप ड्राइविंग सीट पर आ गए। उनके अनुसार, सीसीटीवी में गाड़ी के अन्दर प्रताप के अलावा कोई अन्य व्यक्ति बैठा नहीं दिखाई दिया। इसके बाद कार बद्री तिराहा, तेखला पुल होती हुई अंतिम बार रात 11.38 बजे गंगोरी पुल में लगे सीसीटीवी कैमरे में गंगोरी की ओर जाती हुई दिखाई दी। गंगोरी पुल के पश्चात सीसीटीवी कैमरे बैंक एटीएम और पेट्रोल पम्प पर हैं लेकिन उन दोनों कैमरों की फुटेज में प्रताप की कार कहीं नहीं दिखाई दी।

राजीव को नहीं आती थी ड्राइविंग!

 

पंवार के अनुसार, पूछताछ में सोबन ने बताया कि उसने प्रताप को नशे में होने और उसके कभी-कभार ही कार ड्राइव करने के कारण कार न चलाने के लिए मनाने की बहुत कोशिश की थी लेकिन वह नहीं माने और सोबन से कहा, ‘तुम यहीं पर रहो, मैं थोड़ा आगे जाकर गाड़ी घुमाकर अभी वापस आता हूं।’ उत्तरकाशी के पुलिस उपाधीक्षक पंवार के मुताबिक, सोबन ने यह भी बताया कि वह कुछ दूर तक राजीव प्रताप के पीछे-पीछे पैदल भी गया लेकिन जब प्रताप नहीं मिले तो उसने सोचा कि वह कोट बंगला में रहने वाली अपनी बहन के यहां चले गए होंगे।

 

सोबन ने पुलिस को बताया कि सुबह गाड़ी वापस लेने की बात सोचकर वह वापस अपने घर लौट आए। पुलिस अधिकारी ने बताया कि राजीव मनेरी की तरफ जाते हुए भी कैमरे में कहीं नहीं दिखे और अनुमान है कि इस बीच गंगोरी में नियंत्रण खोने पर गाड़ी भागीरथी नदी में गिरकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जो पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी स्पष्ट हो रहा है। उन्होंने कहा कि राजीव का शराब के नशे में लड़खड़ाना और सड़क पर गलत दिशा में गाड़ी चलाना इस बात की आशंका की ओर इशारा कर रहा है कि यह एक सड़क दुर्घटना थी।

 

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पंवार ने बताया, 'मामले के विवेचक उपनिरीक्षक दिलमोहन बिष्ट ने दुर्घटनाग्रस्त गाड़ी का तकनीकी निरीक्षण भी करवाया है जिसकी रिपोर्ट में बताया गया है कि सड़क से नदी में गिरते समय कार के चारों तरफ के दरवाजे लॉक थे और शीशे चढ़े हुए थे जो बाद में नदी में गिरने से टूटे। रिपोर्ट के अनुसार, इग्निशन ऑन था और चाबी गाड़ी में ही लगी थी। डिकी का लॉक खुला था जो गाड़ी गिरने के दौरान लगे झटके से खुलने की आशंका है।’

परिवार ने कही थी धमकी की बात

 

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस स्थिति में यदि चालक गाड़ी की चाबी स्टेयरिंग में छोड़कर दरवाजे का लॉक खोलकर बाहर आ जाए तो फिर गाड़ी लॉक नहीं होगी। गाड़ी के शीशे भी चढ़े थे तो बाहर से हाथ डालकर दरवाजे लॉक नहीं हो सकते। पंवार ने कहा कि जांच के दौरान गाड़ी के अन्दर भरी रेत हटाने पर एक नीले रंग की चप्पल मिली और इसके अलावा उसके अंदर अन्य कोई साक्ष्य नहीं मिला। उनकी मौत को उनके परिजन और कांग्रेस ने संदिग्ध बताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी उनकी मौत को दुखद और भयावह बताते हुए कहा था कि बीजेपी राज में ईमानदार पत्रकारिता भय और असुरक्षा के साए में है।

 

राजीव प्रताप के पिता मुरारी लाल और अन्य परिजन ने भी पत्रकार को धमकी मिलने की बात कही है। इसके बाद मामले में बढ़ते दवाब के बीच उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने पंवार की अध्यक्षता में एसआईटी गठित की थी। पंवार ने स्पष्ट किया कि पुलिस मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की विवेचना में जुटी हुई है।

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