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जस्टिस सूर्यकांत बने देश के 53वें CJI, राष्ट्रपति ने दिलाई शपथ

जस्टिस सूर्यकांत, देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश हैं। उनका नाम का प्रस्ताव, तत्कालीन CJI बीआर गवई ने आगे बढ़ाया था।

CJI Suryakant

जस्टिस सूर्यकांत का शपथग्रहण समारोह। (Photo Credit: PTI)

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जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को देश के 53वें चीफ जस्टिस के तौर पर शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में हुए एक समारोह में जस्टिस सूर्यकांत को शपथ दिलाई। उन्होंने हिंदी में शपथ ली है। जस्टिस सूर्यकांत ने जस्टिस बीआर गवई की जगह ली है।  

जस्टिस गवई, रविवार को रिटायर हुए हैं। जस्टिस सूर्यकांत के शपथ ग्रहण समारोह में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहे। 

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कब तक CJI पद पर रहेंगे सूर्यकांत?

जस्टिस सूर्यकांत अपने पद पर 9 फरवरी, 2027 तक बने रहेंगे। उनके पास कुल 1 साल 2 महीने, 17 दिनों तक का कार्यकाल होगा। 

कौन हैं जस्टिस सूर्यकांत?

  • जस्टिस सूर्यकांत  का जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा में हुआ था। उन्होंने अपना ग्रेजुएशन साल 1981 में हिसार के एक कॉलेज से किया था। साल 1994 में उन्होंने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से कानून की डिग्री हासिल की। उसी साल हिसार जिला अदालत में उन्होंने वकील के तौर पर बार काउंसिल की सदस्यता ली।
     
  • साल 1985 में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में प्रैक्टिस के लिए चंडीगढ़ चले गए। जस्टिस सूर्यकांत संवैधानिक, सेवा और सिविल मामलों के विशेषज्ञ हैं। उन्होंने कई विश्वविद्यालय, बोर्ड, निगमों, बैंकों के लिए काम किया है। वह हाई कोर्ट में भी जज रहे हैं।

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जस्टिस सूर्यकांत का करियर कैसा रहा है?

  • 7 जुलाई, 2000 को जस्टिस सूर्यकांत हरियाणा के सबसे युवा एडवोकेट जनरल बने थे। मार्च 2001 में उन्हें सीनियर एडवोकेट का दर्जा मिला। 9 जनवरी, 2004 को वह पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के स्थायी जज बने। 

  • साल 2007 से 2011 तक वे राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य रहे। 2011 में उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से दूरस्थ शिक्षा के जरिए कानून में एलएलएम की डिग्री हासिल की।  

  • 5 अक्टूबर, 2018 को वह हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस बने। 24 मई, 2019 को उन्हें भारत के सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया।

  • जस्टिस सूर्यकांत 12 नवंबर, 2024 से सुप्रीम कोर्ट विधिक सेवा समिति के अध्यक्ष हैं। भारतीय विधि संस्थान की अलग-अलग समितियों के सदस्य के रूप में भी वह सक्रिय हैं। वह 9 फरवरी, 2027 को सेवानिवृत्त होंगे।

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