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कपड़े उतरवाए, मांगी रिश्वत, पुलिस की वजह से व्यवसायी महिला ने दी जान!

कर्नाटक भोवी विकास निगम घोटाले मामले में आरोपी व्यापारी महिला ने आत्महत्या कर ली है। महिला ने अपने सुसाइड नोट में आपराधिक जांच विभाग की एक महिला अधिकारी पर संगीन आरोप लगाए है।

Karnataka Bhovi Development Corporation scam Accused Died

प्रतीकात्मक तस्वीर, Image Credit: Pexels

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कर्नाटक भोवी विकास निगम घोटाले मामले में एक यू-टर्न आया है। इस मामले में एक पुलिस अधिकारी पर पूछताछ के लिए गिरफ्तार की गई 33 वर्षीय व्यापारी एस जीवा को कपड़े उतारने और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगा है। दरअसल, एस जीवा शुक्रवार सुबह अपने घर में संदिग्ध रूप से मृत पाई गई।

 

घटनास्थल से पुलिस ने एक सुसाइड नोट बरामद किया है। इस नोट में उसने आपराधिक जांच विभाग (CID) की एक महिला अधिकारी पर पूछताछ के दौरान उसे परेशान करने और कपड़े उतारने का आरोप लगाया है। मृतक  जीवा एस की बहन संगीथ एस ने बेंगलुरु पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें सीआईडी ​​उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) कनकलक्ष्मी को आरोपी बनाया गया है। 

क्या है पूरा मामला

एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, जीवा 14 नवंबर को हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत सीआईडी ​​जांच में शामिल हुई थी। 11 पन्नों के सुसाइड नोट में जीवा ने आरोप लगाया है कि डीएसपी ने पूछताछ के दौरान उसे मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान किया था। पूछताछ के दौरान उसके कपड़े उतार दिए और पूछा कि क्या उसके पास साइनाइड है। इसके अलावा, डीएसपी ने कथित तौर पर 25 लाख रुपये की रिश्वत भी मांगी थी। 

8 दिनों तक किया टॉर्चर?

एफआईआर में लिखा गया है कि जीवा के साथ 8 दिनों तक (14 से 21 नवंबर) तक उत्पीड़न किया गया। इसके अलावा डीएसपी पर जीवा की दुकान पर जाकर उसकी मौत से कुछ समय पहले सार्वजनिक रूप से अपमानित करने का भी आरोप लगाया। बनशंकरी पुलिस ने कनकलक्ष्मी पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 (सरकारी कर्मचारियों द्वारा रिश्वत मांगना) और भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत मामला दर्ज किया है।

क्या है भोवी विकास घोटाला?

भोवी विकास निगम घोटाला 2021-22 में सुर्खियों में आया था। एक नौकरी योजना के तहत भोवी समुदाय के सदस्यों को दिए जाने वाले कर्ज के पैसे के दुरुपयोग का आरोप था। सिद्धपुरा, डोड्डाबल्लापुर और कलगी की कई एफआईआर को इस साल की शुरुआत में जांच के लिए सीआईडी ​​को सौंप दिया गया था।


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