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ईरान युद्ध के कारण किसानों पर आएगा यूरिया संकट, LNG की कमी से उठे सवाल

ईरान युद्ध के कारण LNG की सप्लाई बाधित हो गई है, जिससे किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। LNG गैस का इस्तेमाल यूरिया बनाने में होता है।

farmer spreads fertilizers

किसान, Photo Credit: ANI

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अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया और इस हमले के बाद से ईरान लगातार अमेरिका, इजरायल के ठिकानों को निशाना बना रहा है। इन देशों की आपसी जंग का असर अब पूरी दुनिया पर पड़ने लगा है। ईरान के पास स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से इंटरनेशल पावर सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसके बंद होने से LNG की सप्लाई पर असर पड़ा है जिसका सीधा असर हमारी जिंदगी पर पड़ सकता है। LNG गैस का इस्तेमाल यूरिया और अन्य फर्टिलाइजर बनाने में किया जाता है। ऐसे में अब सबसे मन में डर है कि क्या अगली फसल से पहले किसानों के सामने यूरिया संकट खड़ा है। 

 

ईरान ने कतर की एनर्जी यूनिट पर हवाई हमले किए, जिससे उन्हें काफी ज्यादा नुकसान हो गया। इसके बाद से कतर ने गैस उत्पादन अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। इसके बाद अब सरकार ने यूरिया प्रोडक्शन के लिए एलएनजी गैस की सप्लाई में 30 प्रतिशत कटौती करने का फैसला लिया है। 

 

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70 प्रतिशत गैस की आपूर्ति

भारत सरकार ने मंगलवार को संसद में बताया कि चालू सीजन में 5 मार्च तक यूरिया की बिक्री 186.33 लाख टन थी। इसके बाद अब सरकार के पास 49.01 लाख टन का यूरिया भंडार बचा है। इस बीच सरकार ने यूरिया उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली गैस की आपूर्ति में 30 प्रतिशत की कटौती करने का फैसला किया है। ए आदेश के अनुसार उर्वरक संयंत्रों को पिछले छह महीनों की औसत खपत के आधार पर कम से कम 70 प्रतिशत गैस की आपूर्ति की जाएगी। 

किसानों की बढ़ी चिंता

अभी रबी सीजन चालू है और सीजन के बीच में ही किसानों को यूरिया सप्लाई को लेकर चिंता हो  गई है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण होर्मुज की नाकाबंदी अगर जारी रहती है तो जून से शुरू होने वाले खरीफ सीजन में यूरिया समेत अन्य उर्वरकों की सप्लाई ठप्प हो सकती है। हालांकि, फिलहात कोई संकट नहीं है क्योंकि यह कम मांग वाला सीजन है। \

 

उर्वरक कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि एनएजी की सप्लाई कम होने से यूरिया प्रोडक्शन पर असर पड़ सकता है। खरीफ की फसल में मक्का, जवा, चावल, दालें, तिलहन, कपास, गन्ना जैसी प्रमुख फसलों की बुवाई होती है। अब किसानों के मन में चिंता है कि अगर खरीफ की फसल तक यह संकट ना टला तो उन्हें ज्यादा नुकसान हो सकता है। बिना यूरिया और उर्वरकों के उत्पादन बहुत ज्यादा प्रभावित हो सकता है।

स्टॉक में रखे हैं उर्वरक

सरकार का कहना है कि किसानों पर किसी भी प्रकार का संकट नहीं आएगा। सरकार ने आश्वस्त किया कि उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार,  खरीफ से पहले भारत का कुल उर्वरक स्टॉक 180.12 लाख मीट्रिक टन (LMT) तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा पिछले साल इसी टाइम पीरियड के 131.79 LMT की तुलना में 36.6 प्रतिशत ज्यादा है। इसके अलावा DAP का स्टॉक 25.17 LMT है और NPKS में 56.30 LMT स्टॉक है। 

 

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जरूरत पड़ने पर इंपोर्ट करेगी सरकार

सरकार का कहना है कि किसानों को समय पर खाद पर्याप्त मात्रा में मिलेगी और खरीफ फसल की बुवाई पर किसी भी विदेशी संकट का प्रभाव नहीं पड़ेगा। मिडिल ईस्ट की अस्थिरता से पैदा हुए संकट के बीच भारत ने उर्वरक सप्लाई को लेकर तैयारी कर ली है, ताकि बिना रुकावट सप्लाई जारी रहे। भारत सरकार ने फरवरी 2026 में 98 LMT यूरिया इंपोर्ट किया है और अगले तीन महीनों के लिए 17 LMT की खेप अभी और आएगी। ऐसे में किसानों को राहत मिल सकती है। हालांकि, युद्ध लंबा चलने से सरकार को यूरिया सप्लाई के लिए अन्य इंतजाम भी करने पड़ सकते हैं। 


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