संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के तीसरे दिन भी सदन में खूब हंगामा हुआ। लोकसभा में कांग्रेस लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लाई है, जिस पर चर्चा हो रही है। कांग्रेस का कहना है कि साल 2019 से ही सदन में उपाध्यक्ष का नहीं होना संविधान का उल्लंघन है। राहुल गांधी ने इसे लेकर केंद्र को घेरा है।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने कहा है कि साल 1954 में तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष जी वी मावलंकर के खिलाफ प्रस्ताव पर चर्चा में उस वक्त के प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भाग लिया था और विपक्ष को ज्यादा समय दिए जाने की पैरवी की थी।
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हंगामा क्यों हुआ है?
किरेन रीजीजू ने मंगलवार को लोकसभा में कहा था कि ओम बिरला के खिलाफ संकल्प पर चर्चा के लिए 10 घंटे का समय आवंटित किया गया है, जबकि 1954 में इसी तरह के संकल्प पर चर्चा के लिए सिर्फ ढाई घंटे का समय निर्धारित किया गया था। कांग्रेस इसी दावे पर उन्हें घेर रही है।
राहुल गांधी,नेता विपक्ष, लोकसभा:-
यहां लोकतांत्रिक प्रक्रिया और लोकसभा स्पीकर की भूमिका पर चर्चा होनी थी। कई बार, मेरा नाम उछाला गया, मेरे बारे में कई चीजें कहीं गईं। यह सदन, लोगों की जनभावनाओं को बताने का मंच है। यह किसी दल का प्रतिनिधित्व नहीं कराता, पूरे देश का करता है। जब भी हम बोलने के लिए खड़े होते हैं, हमें बोलने से रोका जाता है। मैंने प्रधानमंत्री मोदी के समझौतों पर सवाल किया था।
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राहुल गांधी के यह कहते ही रविशंकर प्रसाद ने जवाब दिया, 'मैं नेता प्रतिपक्ष को याद दिलान चाहता हूं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कभी कंप्रोमाइज नहीं कर सकते हैं। मैं एक चीज और कहना चाहूंगा कि क्या यह व्यवस्था के प्रश्न पर बहस की इजाजत है।'
रविशंकर प्रसाद, सांसद, बीजेपी:-
मैं प्रस्ताव समझ ही नहीं पा रहा हूं। गौरव गोगोई ने मुझसे पूछा था कि किसी किताब का हवाला देने में क्या दिक्कत है। वह किताब, जो कभी प्रकाशित नहीं हुई, कभी बंटी नहीं, कैसे कोई इस किताब को प्रमाणित कर सकता है। किसी नेता के अहंकार की तुष्टि के लिए इसे हथियार नहीं बनने देना चाहिए।'
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हंगामा क्यों बरपा है?
2 फरवरी को बजट सत्र के पहले चरण में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान राहुल गांधी ने कुछ ऐसा किया, जिस पर हंगामा हुआ। राहुल गांधी ने लोकसभा में जनरल एमएम नरवणे की एक अप्रकाशित किताब का हवाला देकर उन्होंने चीन का जिक्र किया। उनके बयान पर तत्काल रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आपत्ति जताई और कहा कि ऐसी किताब जो प्रकाशित नहीं हुई है, उसे कैसे प्रमाणित किया जाएगा। बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने भी आपत्ति जताई।
अब आगे क्या?
कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने 50 अन्य सांसदो के समर्थन के साथ एक प्रस्ताव पेश कया। बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल तब पीठासीन थे। उन्होंने चर्चा के लिए 10 घंटे का वक्त दिया। कुल 118 सांसदों ने उन पर भेदभाव के आरोप लगाए हैं।