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फर्जी मरीज, कागज पर डॉक्टर, कोई वेरिफिकेशन नहीं, Al Falah पर बड़े खुलासे

अल फलाह यूनिवर्सिटी मामले में कई बड़े खुलासे हुए हैं। ईडी ने चार्जशीट में बताया कि डॉक्टरों की नियुक्त कागजों पर की गई थी। वहीं फर्जी मरीजों को भर्ती दिखाया गया। इसके अलावा बम धमाके से जुड़े डॉक्टरों का कोई वेरिफिकेशन नहीं हुआ था।

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अल-फलाह यूनिवर्सिटी। (Photo Credit: PTI)

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फरीदाबाद की अल फलाह विश्वविद्यालय मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार को दिल्ली की एक अदालत में चार्जशीट दाखिल की। अभी तक की जांच में कई खामियां मिली हैं। इसमें वित्तीय हेराफेरी, फर्जी नियुक्ति और नियामक उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि विश्वविद्यालय का इस्तेमाल एक अड्डे के तौर पर किया गया।

 

ईडी की जांच में पता चला कि लाल किला बम धमाके से जुड़े डॉ. मुज़म्मिल गनाई, डॉ. शाहीन सईद और डॉ. उमर नबी को बिना किसी वेरिफिकेशन के नौकरी पर रखा गया था। इनमें से डॉ. उमर नबी की 10 नवंबर को लाल किले के पास बम धमाके में मौत हो चुकी है। पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज अपने बयान में विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ने बताया कि 2019 में स्थापित मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों को बिना किसी पुलिस वेरिफिकेशन के नियुक्त किया गया था। 

 

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उधर, एनआईए की जांच में सामने आया है कि मास्टरमाइंड डॉ. उमर-उन नबी ने दूसरे सुसाइड बॉम्बर के तौर पर शोपियां के रहने वाले यासिर अहमद डार को भर्ती करने का प्रयास किया। हालांकि आखिरी समय में डार ने पीछे हट गए। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक आरोप पत्र में बताया गया कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) से अनिवार्य अनुमोदन प्राप्त करने में 'कागजी डॉक्टरों' का इस्तेमाल किया गया।

 

आपातकालीन विभाग का कहना है कि यह डॉक्टर न तो रोजाना कॉलेज जाते थे और न ही विश्वविद्यालय अस्पताल में पढ़ाते थे। इन डॉक्टरों को सिर्फ एनएमसी की मंजूरी हासिल करने की खातिर रखा गया था। ईडी ने आरोपपत्र में बताया कि विश्वविद्यालय अस्पताल सक्रिय नहीं था। नियामक निरीक्षण से पहले फर्जी मरीजों को भर्ती किया गया। यह इसलिए किया गया कि अस्पताल चलता रहे। इसके अलावा अस्थायी तौर पर डॉक्टरों को भर्ती किया गया, ताकि नियमों को पूरा किया जा सके। 


ईडी को विश्वविद्यालय की कुलपति और प्रधानाध्यापिका ने बताया कि लाल किला बम धमाके में शामिल तीनों डॉक्टरों को उनके कार्यकाल में भर्ती किया गया था। विश्वविद्यालय के एचआर हेड ने इन भर्तियों की सिफारिश की थी। वहीं विश्वविद्यालय के अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्दीकी ने अनुमोदित किया था। इसके बाद औपचारिक नियुक्ति पत्र जारी किए गए थे। ईडी का अनुमान है कि करीब 493.24 करोड़ रुपये अपराध की रकम जुटाई गई। इसमें एजेंसी ने जवाद अहमद सिद्दीकी की भूमिका को प्रमुख माना है।

 

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कब किसे मिली नियुक्ति

  • अक्टूबर 2021 में जनरल मेडिसिन विभाग में जूनियर रेजिडेंट मुजम्मिल अहमद  
  • अक्टूबर 2021 से फार्माकोलॉजी में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सईद 
  • मई 2024 में जनरल मेडिसिन में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नबी 

NIA की जांच में क्या पता चला?

एनआईए की जांच में पता चला कि आतंकी नबी एक सेकेंडरी सेल बनाने में जुटा था, ताकि प्राइमरी सेल के फेल होने पर भी उसका ऑपरेशन काम करता रहे। जांच एजेंसी ने एक आरोपी के फोन से वॉयस नोट भी बरामद किया है। इसमें वह जिहाद के लिए 'बायत' यानी निष्ठा की शपथ ले रहा है।

 

अधिकारियों के मुताबिक 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी के आसपास व्हीकल-बोर्न इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (VBIED) धमाके की साजिश रची गई थी। साजिश के मुताबिक भीड़भाड़ वाली जगह में धमाका करना था। 

 

आरोपियों से पूछताछ के मुताबिक 2021 में नबी डॉ. मुजम्मिल अहमद गनई के साथ तुर्की गया था। जहां दोनों ने जैश-ए-मोहम्मद के ओवरग्राउंड वर्करों से मीटिंग की। वहां से आने के बाद नबी और गनई ने बाजार से 360 किलो अमोनियम नाइट्रेट, पोटेशियम नाइट्रेट और सल्फर खरीदा।


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