मणिपुर में पिछले तीन साल से नागा और कुकी समुदाय के बीच चली आ रही हिंसा अभी भी नहीं थमी है। केंद्र सरकार के तमाम दावों और कोशिशों के बावजूद राज्य हिंसा की आग में अभी जल रहा है। मणिपुर में एक बार फिर से हिंसा भड़क गई है। शुक्रवार सुबह उखरुल जिले में नागा और कुकी हथियारबंद ग्रुप के बीच दो गोलीबारी घटनाएं सामने आई हैं। इस गोलीबारी में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच कुकी-जो समुदाय के लोग घायल हो गए हैं। मरने वालों में एक तांगखुल नागा और दो कुकी जो हैं।
मणिपुर पुलिस के मुताबिक, हिंसा प्रभावित जिले के मुल्लम गांव के पास हुई एक घटना में सुरक्षा बलों ने दो शव बरामद किए। उखरुल जिला की सीमा नागालैंड से लगती है और जिसकी अंतरराष्ट्रीय सीमा म्यांमार से भी जुड़ी है। यह मुख्य रूप से तांगखुल नागा समुदाय की आबादी वाला क्षेत्र है।
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बर्मा के पांच कैडर को मारने का दावा
इसी झड़प में कामजोंग जिले में म्यांमार की कुकी नेशनल आर्मी-बर्मा के पांच कैडर को मारने का दावा किया। उखरुल में मारे गए लोगों में 29 साल का तांगखुल नागा और होरशोकमी जामांग भी शामिल हैं। तांगखुल नागा लॉन्ग (TNL) वर्किंग कमिटी के मुताबिक, होरशोकमी जामांग को हथियारबंद कुकी उग्रवादियों ने ऑपरेशन्स सस्पेंशन एग्रीमेंट के तहत सिनाकेइथेई गांव के पास एक घात लगाकर मार डाला।
मृतकों की पहचान हुई
मृतकों की पहचान एल. सिटलहोउ और पी. हाओलाई के रूप में हुई है। वे छद्म वर्दी में थे और उनके शरीर पर गोली लगने के निशान मिले। सुबह के समय मुल्लम गांव में सशस्त्र उग्रवादियों के बीच भारी गोलीबारी हुई थी। हिंसा के दौरान पहाड़ी गांव के कई घरों में आग भी लगा दी गई।
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वहीं दूसरी घटना सिनाकेइथेई गाव के पास हुई। इसमें हथियार से लैस एक समूह ने घात लगाकर एक शख्स पर हमला किया, जिसमें उसकी मौत हो गई। नागा संगठनों ने इन हत्याओं के पीछे कुकी उग्रवादियों का हाथ बताया है, जबकि कुकी संगठनों ने इन हत्याओं से इनकार किया है।
दरअसल, मणिपुर में ताजा तनाव 18 अप्रैल को दो लोगों की हत्या के बाद से हुआ है। एक दिन बाद इन हत्याओं के विरोध में विभिन्न संगठनों ने पांच दिन का बंद बुलाया। मणिपुर के 16 में से 12 जिलों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित रहा। प्रभावित जिलों में स्कूल, बैंक, बाजार और अधिकांश प्रतिष्ठान बंद रहेनी इंफाल में निकाली गई एक मशाल रैली के दौरान पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे थे।