पश्चिमी एशिया के देशों में जारी टकराव और ईरान के सु्प्रीम लीडर के मारे जाने पर भारत सरकार के विदेश मंत्री ने सोमवार को संसद में जवाब दिया। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान के हालात का जिक्र करते हुए कहा कि फिलहाल वहां के शीर्ष नेतृत्व से इस समय समय संपर्क मुश्किल है लेकिन उनके विदेश मंत्री से बात की गई है। जयशंकर ने यह भी कहा है कि इस पूरे हालात पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद नजर रख रहे हैं। उनका कहना है कि वह तमाम देशों के विदेश मंत्रियों के संपर्क में हैं और इन देशों में फंसे भारतीयों को निकालने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। इससे पहले राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सदन में मांग उठाई कि भारत में पैदा हो रहे ऊर्जा संकट पर विस्तार से चर्चा की जाए।
संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण शुरू होने पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा) और कुछ अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने पश्चिम एशिया संकट और भारत पर इसके प्रभाव को लेकर सोमवार को संसद परिसर में प्रदर्शन किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर देश हितों के साथ समझौता करने का आरोप लगाया। संसद भवन के पास हुए इस विरोध प्रदर्शन में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कुछ अन्य दलों के नेता शामिल हुए। उन्होंने एक बड़ा बैनर ले रखा था, जिस पर ‘इंडिया नीड्स लीडरशिप, नॉट साइलेंस’ (भारत को नेतृत्व की जरूरत है, चुप्पी की नहीं)’ लिखा हुआ था। विपक्षी सांसदों ने ‘अमेरिका के सामने सरेंडर करना बंद करो’ जैसे नारे लगाए।
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क्या बोले विदेश मंत्री?
विदेश मंत्री जयशंकर ने अपने बयान में कहा है, 'जाहिर सी बात है कि इस समय ईरान के शीर्ष नेतृत्व से संपर्क कर पाना कठिन है। मैंने ईरान के विदेश मंत्री से बात की है। भारत शांति और बातचीत के समर्थन में है ताकि टकराव कम किया जाए और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।' पश्चिमी एशिया से भारत के लोगों को सुरक्षित निकालने के बारे में जयशंकर ने कहा, 'कल तक लगभग 67 हजार भारतीय अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पार कर चुके थे। हमारे लोगों को पश्चिमी एशिया से वापस लाने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है।'
पश्चिम एशिया पर भारत सरकार की ओर से जवाब देते हुए जयशंकर ने कहा, 'हम उस क्षेत्र के देशों की सरकारों के साथ काम करना जारी रखेंगे। हमारे राष्ट्रीय हित हमेशा सर्वोपरि रहेंगे, जिनमें ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक लक्ष्य शामिल हैं।' तेल की कीमतों में आई तेजी का जिक्र करते हुए जयशंकर ने कहा कि सरकार ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें ऊर्जा बाजार की उपलब्धता, लागत और जोखिम को पूरी तरह ध्यान में रखा जा रहा है। उन्होंने कहा, 'भारतीय ग्राहकों का हित हमारे लिए हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता रहा है और आगे भी रहेगा। जहां जरूरी हुआ है, वहां इस अस्थिर स्थिति में भारतीय कूटनीति ने हमारी ऊर्जा कंपनियों के प्रयासों का समर्थन किया है।'
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विदेश मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर लगातार नजर रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से भारत सरकार वहां की स्थिति का लगातार आकलन कर रही है और वहां फंसे भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
उधर संसद में विदेश मंत्री के भाषण के दौरान विपक्षी सांसदों ने जोरदार नारेबाजी की। इसके विरोध में बीजेपी सांसद और केंद्रीय मंत्री जे पी नड्डा ने कहा कि विपक्ष को चर्चा में कोई रुचि ही नहीं है।