प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी
की विदेशी यात्राओं पर इस साल अब तक 75 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च हो चुकी है। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को एक सवाल के जवाब में यह जानकारी साक्षा की। मंत्रालय ने बताया कि 2021 से अब तक पीएम की विदेशी यात्राओं में 557 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च हुई है।
सीपीआई सांसद वी. शिवदासन और आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने एक लिखित प्रश्न में पीएम की विदेश यात्रा से जुड़े खर्च का ब्योरा मांगा था। दोनों सांसदों ने विदेश मंत्रालय से तीन तरह की जानकारी मांगी थी।
पहली: 2021 से प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं का देश-वार विवरण
दूसरी: 2021 से ऐसी यात्राओं पर हुआ कुल खर्च
तीसरी: द्विपक्षीय समझौतों/एमओयू का देश-वार विवरण, निवेश के लिए की गई घोषणाएं और भारत को प्राप्त वास्तविक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का विवरण?
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सात महीने में 74.59 करोड़ खर्च
जवाब में विदेश राज्यमंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने बताया कि अप्रैल 2021 से दिसंबर 2025 की अवधि के दौरान प्राप्त कुल एफडीआई 381.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर था। मंत्रालय ने आगे बताया कि इस साल जुलाई तक पीएम मोदी की विदेश यात्रा पर कुल 74.59 करोड़ खर्च किए गए। सबसे अधिक 17.47 करोड़ रुपये नॉर्वे की यात्रा पर खर्च किए गए। इसके बाद फरवरी में इजरायल के दौरे पर 11.92 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस वर्ष जुलाई तक 13 देशों की यात्रा कर चुके हैं।
इन देशों की पीएम मोदी ने की यात्रा
- मलेशिया
- इजरायल
- संयुक्त अरब अमीरात
- नीदरलैंड
- स्वीडन
- नॉर्वे
- इटली
- फ्रांस
- स्लोवाकिया
- सेशेल्स
- इंडोनेशिया
- ऑस्ट्रेलिया
- न्यूजीलैंड
पांच साल में 557 करोड़ खर्च
विदेश मंत्रालय के मुताबिक पिछले साल फरवरी में पीएम मोदी की फ्रांस यात्रा पर 25.49 करोड़ रुपये खर्च आया था। 2021 से जुलाई 2026 तक पीएम मोदी के विदेशी दौरों पर करीब 557.51 करोड़ की धनराशि खर्च की जा चुकी है।
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मनमोहन सिंह के खर्च का भी दिया ब्योरा
विदेश मंत्रालय ने अपने जवाब में कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीआई-2 सरकार के दौरान प्रधानमंत्री के खर्च का व्योरा भी साझा किया। इसमें बताया गया कि 2011 में पीएम मनमोहन सिंह की अमेरिका यात्रा पर 10.74 करोड़, 2013 में रूस यात्रा पर 9.95 करोड़, 2011 में फ्रांस दौरे पर 8.33 करोड़ और 2013 की जर्मनी यात्रा पर करीब छह करोड़ रुपये की धनराशि खर्च की गई थी। मंत्रालय ने बताया कि ये आंकड़े मुद्रास्फीति या मुद्रा के उतार-चढ़ाव को समायोजित किए बिना वास्तविक खर्च को दिखाते हैं।