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पीएम मोदी का MANAV विजन, आखिर क्यों कहा AI पर सबका अधिकार हो?

PM मोदी 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' में 'MANAV विजन' की शुरूआत की है। उन्होंने बताया कि इसका मकसद AI को आम लोगों के लिए आसान और सुरक्षित बनाना है। 

PM Modi & President Macron

पीएम मोदी और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, Photo Credit- PTI

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नई दिल्ली में चल रहे 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' के चौथे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और गुगल के CEO सुंदर पिचई समेत कई लोग शामिल हुए। पीएम मोदी ने समिट में भारत के भविष्य के लिए रोडमैप पेश किया। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) केवल कुछ लोगों की जागीर नहीं होनी चाहिए। पीएम ने जोर देकर कहा कि तकनीक का असली फायदा तब ही मिलता है जब वह समाज के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचे और उसे मजबूत बनाए। 

 

सम्मेलन में दुनिया भर के नेताओं और दिग्गजों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत की युवा शक्ति AI को पूरी आत्मविश्वास के साथ अपना रही है। पीएम ने स्पष्ट किया कि भारत आज AI की दौड़ में केवल एक भागीदार नहीं बल्कि पूरी दुनिया को रास्ता दिखाने वाला नेतृत्वकर्ता बन गया है।

 

यह भी पढ़ें: इंडिया AI समिट में बिल गेट्स नहीं होंगे शामिल, फाउंडेशन ने बताई वजह

क्या है 'MANAV' विजन?

प्रधानमंत्री ने AI के सही इस्तेमाल के लिए 'MANAV' फ्रेमवर्क पेश किया, जिसका मतलब उन्होंने समझाया। उन्होंने कहा,

'M (Moral)- एआई सिस्टम नैतिक और मानवीय मूल्यों पर आधारित होना चाहिए। A (Accountable)- इसकी जवाबदेही तय हो और नियम बिल्कुल साफ-सुथरे हों। N (National Sovereignty)- डेटा पर उसी का अधिकार होना चाहिए जिससे वह जुड़ा है। A (Accessible)- यह तकनीक सबकी पहुंच में हो ताकि किसी का एकाधिकार न रहे। V (Valid)- एआई का हर इस्तेमाल कानूनी तौर पर सही और प्रमाणित होना चाहिए।'

AI टूल्स की सराहना

पीएम मोदी ने खेती, सुरक्षा और भाषा संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए भारतीय युवाओं के बनाए गए AI टूल्स की सराहना की। पीएम के मुताबिक, AI को ऐसा लोकतांत्रिक टूल बनना चाहिए जिससे लोग सिर्फ डेटा का जरिया बनकर न रह जाएं बल्कि इसके जरिए अपना जीवन बेहतर बना सकें।

 

उन्होंने कहा,  'भारत AI को किस दृष्टि से देखता है। उसका स्पष्ट प्रतिबिंब इस समिट की थीम में है - सर्वजन हिताय - सर्वजन सुखाय। यही हमारा बेंचमार्क है। AI के लिए इंसान सिर्फ डाटा प्वाइंट न बन जाए। इंसान सिर्फ कच्चा माल तक सीमित न रह जाए। इसलिए इसलिए AI को लोकतांत्रिक करना होगा। इसे समावेशी और सशक्तीकरण का माध्यम बनाना होगा विशेष रूप से ग्लोबल साउथ में।'

आगे उन्होंने कहा, 'हमारे पास टैलेंट भी है। एनर्जी कैपेसिटी भी है और पॉलिसी क्लैरिटी भी है। मुझे आपको यह बताते हुए खुशी हो रही है कि इस समिट में तीन भारतीय कंपनियों ने अपने AI मॉडल और एप्लिकेशन लॉन्च किए हैं। ये मॉडल हमारे युवाओं के टैलेंट को दिखाते हैं। ये उन सॉल्यूशन को भी दिखाते हैं जो भारत दुनिया को दे रहा है।'

AI से भय और भाग्य

पीएम मोदी ने कहा, 'आज दुनिया में दो तरह के लोग हैं। एक वे जिन्हें AI में भय दिखता है और दूसरे वे जिन्हें AI में भाग्य दिखता है। मैं गर्व और जिम्मेदारी से कहता हूं कि हमें भय नहीं, भारत को AI में भाग्य दिखता है, भारत को AI में भविष्य दिखता है।'

पीएम ने इस बात पर जोर देकर कहा कि AI का इस्तेमाल दुनिया की भलाई के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'कुछ देशों का मानना ​​है कि AI को कॉन्फिडेंशियल और क्लोज्ड तरीके से डेवलप किया जाना चाहिए लेकिन भारत अलग है। हमारा मानना ​​है कि AI सच में दुनिया की भलाई तभी करेगा जब इसे शेयर किया जाएगा और इसके कोड ओपन होंगे। तभी लाखों युवा दिमाग इसे और बेहतर बना पाएंगे। आइए हम सब मिलकर यह तय करें कि AI को दुनिया की भलाई के लिए डेवलप किया जाएगा।'

दुनिया ने माना भारत का लोहा

इस खास मौके पर मौजूद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत के डिजिटल बदलाव को दुनिया के लिए एक मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि तकनीक के नियमों को तय करने में भारत और फ्रांस जैसे सहयोगी देश मिलकर अहम भूमिका निभाएंगे। सम्मेलन में दिखाई गई तकनीक की प्रदर्शनी ने यह साबित कर दिया कि 'मेड इन इंडिया' एआई समाधानों में वैश्विक चुनौतियों से लड़ने की पूरी क्षमता है।


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