बिहार के लखीसराय जिले में NEET UG री-एग्जाम के दौरान बड़े पैमाने पर नकल और धांधली का मामला सामने आया है। जिला प्रशासन और पुलिस की सख्ती से 30 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें 9 लोग ऐसे थे जो दूसरों के बदले परीक्षा देने आए थे। पुलिस और प्रशासन की टीम ने अलग-अलग परीक्षा केंद्रों पर छापेमारी की, जिनमें धंधेबाजों पर शिकंजा कसा गया है।
KRK हाई स्कूल से 1, केंद्रीय विद्यालय से 7 और हसनपुर स्कूल से 1 नकलची पकड़ा गया। ये सभी आरोपी अलग-अलग जिलों के बताए जा रहे हैं।9 नकलचियों के अलावा 21 अन्य लोगों को भी धांधली से जुड़े होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। SDM प्रभाकर कुमार और SDPO शिवम कुमार की टीम इनसे पूछताछ कर रही है।
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अब पुलिस क्या कर रही है?
पूछताछ के आधार पर पुलिस कई जगहों पर छापेमारी कर रही है। जिला मजिस्ट्रेट शैलेंद्र कुमार और पुलिस अधीक्षक प्रेरणा कुमार खुद इस मामले की निगरानी कर रहे हैं। अधिकारियों को शक है कि इसमें और भी कई लोग शामिल हो सकते हैं।
पूरी गैंग का खुलासा जांच के बाद ही हो सकता है। इसके तार, कई बड़ी हस्तियों तक जा सकते हैं। पुलिस ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। NEET परीक्षा में सख्त सुरक्षा के बावजूद इस तरह की घटना सामने आई है।
पेपर सॉल्वर गैंग में कौन-कौन शामिल है?
अर्पित राज इस गैंग का सरगना बताया जा रहा है। वह ANMMCH गया का छात्र है। मयंक कश्यप, पूनम कुमारी भी पकड़ी गईं हैं। पूनम BHU से नर्सिंग की पढ़ाई कर रहीं हैं, वह मधुप्रिया के नाम से परीक्षा देते हुई पकड़ी गई हैं। सौरभ झा, AIIMS का छात्र था, पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार किया है। अमन अग्रवाल और संजीत नाम के भी एक छात्र की गिरफ्तारी हुई है।
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कौन है अर्पित राज?
अर्पित राज, विवादित रहा है। साल 2024 के भी एक मामले में CBI उससे पूछताछ कर चुकी है। अर्पित का नाम पहल भी नीट परीक्षा में सामने आ चुका है। साल 2024 में उससे CBI ने कई बार पूछताछ की।
क्या सवाल उठ रहे हैं?
लखीसराय में 9 अभ्यर्थी नकल करते पकड़े गए है। बायोमेट्रिक कंपनी के भी कर्मचारियों पर गाज गिरी है। मयंक नाम के एक छात्र की गिरफ्तारी के बाद ही बाकी आरोपियों के नामों का खुलासा हुआ है। परीक्षा के दौरान छात्रों के सॉल्वर बनने पर रोक लगाने के सारे इंतजाम किए गए थे।
विभाग के सचिव ने PMCH और राज्य के दूसरे मेडिकल कॉलेजों में शनिवार दोपहर 2 से शाम तक कई गतिविधियों का आयोजन किया था, जिनमें छात्रों को अनिवार्य रूप से आने के लिए कहा गया था। अब स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
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कैसे पकड़े गए?
विभाग को जानकारी मिली थी कि कुछ बाहरी जिलों से डमी कैंडिडेट परीक्षा देने आ रहे हैं। पुलिस और शिक्षा विभाग ने सख्ती बढ़ाई तो शक के आधार पर कुछ लोगों को रोका गया। एक जालसाज की गिरफ्तारी से ही पूरे रैकेट का पर्दाफाश हुआ है।