महिलाओं के लिए 273 सीटें, UP-बिहार से 180 MP, लोकसभा में क्या-क्या बदलेगा?
महिलाओं के लिए संसद में आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए इसी संसद सत्र में एक प्रस्ताव लाने की तैयारी है। साथ ही, सीटों की संख्या में भी इजाफा हो सकता है।

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: Sora AI
संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण चल रहा है। अब चर्चा तेज हो गई है कि महिलाओं के लिए संसद में एक तिहाई आरक्षण लागू करवाने के लिए इसी सत्र में बिल लाया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो कुल 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी और लोकसभा सांसदों की कुल संख्या 816 हो जाएगी। नए फॉर्मूले के मुताबिक, हर राज्य में लोकसभा सीटों की संख्या लगभग डेढ़ गुना बढ़ जाएगी। उत्तर प्रदेश में फिलहाल लोकसभा की 80 सीटें हैं और ये बढ़कर 120 हो सकती हैं। इसी तरह बिहार में जो 40 सीटें हैं वे बढ़कर 120 हो जाएंगी। दक्षिण के राज्यों की चिंता भी खत्म हो सकती है क्योंकि वहां भी सीटों की संख्या इसी अनुपात में बढ़ेगी।
सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आम सहमति पर पहुंचने के लिए सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और गैर-कांग्रेसी विपक्षी दलों के नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें की हैं। सूत्रों ने बताया कि यदि आम सहमति बन जाती है तो दोनों विधेयक इसी सप्ताह पेश किए जा सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक में शामिल होने वाले विपक्षी नेताओं में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के पी वी मिधुन रेड्डी, समाजवादी पार्टी की डिंपल यादव , राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सुप्रिया सुले, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के मनोज झा और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन (AIMIM)असदुद्दीन ओवैसी के शामिल थे। अमित शाह आने वाले दिनों में कांग्रेस के साथ भी इस मुद्दे पर विचार-विमर्श कर सकते हैं।
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कहां, कितनी सीटें बढ़ेंगी?
फिलहाल, अनुमान के आधार पर ही सीटों की संख्या बताई गई है लेकिन माना जा रहा है कि यही फॉर्मूला अपनाया जा सकता है। इस फॉर्मूले के तहत हर राज्य में सीटों की संख्या मौजूदा संख्या से डेढ़ गुना ज्यादा हो सकती है। इसी अनुपात में दक्षिण भारत के राज्यों में भी इजाफा हो सकता है। आंध्र प्रदेश में अभी 25 सीटे हैं जो बढ़कर 38 हो सकती हैं। इसी तरह तेलंगाना में 17 से 26, तमिलनाडु से 39 से 59, केरल में 20 से 30, कर्नाटक में 28 से 42 और ओडिशा में 21 से 32 सीटें हो गई जाएंगी।
इसी तरह उत्तर प्रदेश में 80 से बढ़कर 120, बिहार में 40 से बढ़कर 60, पश्चिम बंगाल में 42 से बढ़कर 63 और राजस्थान में 25 से बढ़कर 38 सीटें हो सकती हैं। दिल्ली को छोड़कर सभी केंद्र शासित प्रदेश में सीटें स्थिर रहेंगी। दिल्ली में 7 से बढ़कर 11 लोकसभा सीटें हो सकती हैं।
कब से लागू होगा आरक्षण?
लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान संविधान में संशोधन करके लाया गया था लेकिन यह परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद लागू होगा। मौजूदा प्रस्ताव के मुताबिक, लोकसभा सीटों की संख्या वर्तमान 543 से बढ़ाकर 816 कर दी जाएगी, जिसमें महिलाओं के लिए 273 सीटें आरक्षित होंगी। आरक्षण अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए सीटों के आवंटन के साथ वर्टिकल बेस पर किया जाएगा। राज्य विधानसभाओं के लिए भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जहां सीटों का आरक्षण आनुपातिक आधार पर किया जाएगा।
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कहा जा रहा है कि संविधान संशोधन विधेयक नारी शक्ति वंदन अधिनियम में भी बदलाव करेगा। वहीं, दूसरी ओर एक अन्य साधारण विधेयक परिसीमन अधिनियम में संशोधन करेगा। संसद से मंजूरी मिलने के बाद प्रस्तावित कानून 31 मार्च, 2029 को लागू हो जाएंगे और लोकसभा के अलावा ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और आंध्र प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों में सीट के आरक्षण में मदद करेंगे। सूत्रों ने बताया कि परिसीमन या सीमा आयोग एक ‘निष्पक्ष’ निकाय है जिसे लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों को फिर से निर्धारित करने का अधिकार दिया गया है। इसके फैसलों को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती नहीं दी जा सकती है।
कितने साल के लिए होगा महिला आरक्षण?
एक सरकारी पदाधिकारी ने बताया, ‘ज्यादा से ज्यादा यह एक या कुछ राज्यों का परिसीमन कर सकता है, जैसा कि इसने हाल ही में असम में परिसीमन किया था।' परिसीमन प्रक्रिया के अलावा, उन निर्वाचन क्षेत्रों का निर्धारण किया जा सकता है जिन्हें महिलाओं के लिए आरक्षित किया जाना है, जैसा कि अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के लिए किया जाता है। इस प्रकार निर्वाचन क्षेत्रों के आरक्षण का निर्धारण करने का एक अन्य तरीका ‘रोटेशन’ प्रक्रिया हो सकती है। सितंबर 2023 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नारी शक्ति वंदन विधेयक को अपनी मंजूरी दी थी। इस कानून को आधिकारिक तौर पर संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम के नाम से जाना जाता है।
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यह अधिनियम अब तक लागू नहीं हुआ है, फिर भी सरकार की इच्छा होने पर और दोनों सदनों में आवश्यक समर्थन मिलने पर संसद द्वारा एक अन्य संविधान संशोधन विधेयक के माध्यम से इसमें संशोधन किया जा सकता है। महिला आरक्षण विधेयक पारित कराते समय सरकार ने कहा था कि अगली जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन प्रक्रिया से महिलाओं के लिए आरक्षित की जाने वाली विशेष सीटों का पता चल जाएगा। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण 15 वर्षों तक जारी रहेगा और संसद बाद में इस लाभ की अवधि को बढ़ा सकती है।
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