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बस नाम के लिए पेटेंट फाइल कर रहे गलगोटिया और LPU? 90 पर्सेंट हो जाते हैं रिजेक्ट

देशभर में गलगोटिया और LPU जैसी कई यूनिवर्सिटी हैं, जिन्होंने IITs और NITs से भी ज्यादा पेटेंट फाइल किए हैं। हालांकि, यह पेटेंट बस नाम के ही फाइल किए जाते हैं 90 पर्सेंट से ज्यादा पेटेंट फेल हो जाते हैं।

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AI समिट में गलगोटिया यूनिवर्सिटी, Photo Credit: ANI

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दिल्ली में AI इंपैक्ट समिट 2026 में एक रोबोटिक डॉग को लेकर जमकर विवाद हुआ। गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने पहले इस रोबोटिक डॉग को अपना बताया लेकिन बाद में पता चला की यह रोबोटिक डॉग तो चीन का है। इसके बाद यूनिवर्सिटी को समिट से निकाल दिया गया और सोशल मीडिया से ग्राउंड तक जमकर बवाल होने लगा। इस बीच प्राइवेट यूनिवर्सिटी के मॉडल पर चर्चा हो गया। सामने आया कि गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने IITs से भी ज्यादा पेटेंट फाइल कर रखे हैं। गलगोटिया यूनिवर्सिटी के अलावा भी कई यूनिवर्सिटी पेटेंट फाइल करने की रेस में IITs को पीछे छोड़ रही हैं। 

 

गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने इतने ज्यादा पेटेंट कैसे करवा लिए, जो IITs भी नहीं कर पाई। इस पर हर कोई हैरान था लेकिन इसकी सच्चाई कुछ और ही है। पेटेंट आपको अधिकार देता है कि आपने जो रिसर्च की है उसको आप सुरक्षित रख सकें। पेटेंट करवाने के बाद आपकी रिसर्च का कोई व्यवसायिक इस्तेमाल नहीं कर सकता है। एक बार पेटेंट रजिस्टर करवाने के बाद 20 साल तक आपके पास अधिकार सुरक्षित रहते हैं। 

 

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पेटेंट के पीछे खेल

गलगोटिया यूनिवर्सिटी समेत कई प्राइवेट यूनिवर्सिटी के विज्ञापनों में आपको दिख जाएगा कि हमने इतने पेटेंट फाइल किए हैं। यूनिवर्सिटी पेटेंट की संख्या के आधार पर लोगों का ध्यान आकर्षित करती है लेकिन इन पेटेंट को सफलता नहीं मिल पाती। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, हायर एजुकेशन रिसर्च में भारत में पेटेंट की संख्या तो लगातर बढ़ रही है लेकिन इन पेटेंट को अप्रूवल ही नहीं मिल पाता और कुछ ही पेटेंट सफल हो पाते  हैं। 

आंकड़ों से समझिए खेल

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में 2020-2025 के बीच फाइल किए गए पेटेंट के आधार पर एक रिपोर्ट तैयार की गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इंडिया पेटेंट ऑफिस के आंकड़ों के अनुसार, प्राइवेट यूनिवर्सिटी IITs से ज्यादा पेटेंट फाइल करती हैं लेकिन उन्हें पेटेंट अधिकार नहीं मिलता।  IITs ने 2020-25 के बीच मिलकर 6,558 पेटेंट फाइल किए हैं और उस में से उन्हें 2,806 के अधिकार मिल गए यानी सफलता मिल गई।  IITs का अप्रूवल रेट 43 प्रतिशत रहा है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस और NITs की भी यही कहानी है। 

बेस्ट पेटेंट रेट

  • IITs- सभी  IITs को मिलाकर 2020-2025 के बीच 6,558 पेटेंट फाइल किए गए और 2,806 पेटेंट ग्रांट हुए। सफलता रेट 42.8 प्रतिशत रहा।
  • NITs- सभी NITs को मिलाकर  2,333 पेटेंट फाइल किए हैं और उन्हें 949 में सफलता मिली है। इनका सफलता रेट 40.7 प्रतिशत रहा है। 
  • IIS- इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस ने 723 पेटेंट फाइल किए हैं और उन्हें 336 के अधिकार मिले हैं। इन्हें 46.5 प्रतिशत सफलता रेट है। 

सबसे खराब प्रदर्शन

  • चंडीगढ़ ग्रुप ऑफ कॉलेज- इसने कुल 2, 852 पेटेंट फाइल किए हैं और उन्हें 17 में ही सफलता मिली है। इनका सफलता रेट 0.6 रहा है। 
  • जेन (डिम्ड) यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु- इस यूनिवर्सिटी ने 2,840 पेटेंट फाइल किए हैं और 17 ही ग्रांट हुए हैं। इनका सफलता रेट भी 0.6 है। 
  • गलगोटिया यूनिवर्सिटी- इस यूनिवर्सिटी ने कुल 2,233 पेटेंट फाइल किए हैं और कुल 2 में सफलता मिली है। इस यूनिवर्सिटी का सफलता रेट 0.08 है। 

यह भी पढ़ें: हरियाणा सरकार के खातों से 590 करोड़ कहां गए? गड़बड़ी की पूरी कहानी समझिए

डेटा में दिखी सच्चाई

डेटा से साफ पता चलता है कि प्राइवेट यूनिवर्सिटी में कई यूनिवर्सिटी ऐसी हैं जिन्होंने पेटेंट फाइल तो बहुत सारे किए हैं लेकिन उन्हें बहुत कम में ही सफलता मिली है। एलपीयू जैसी यूनिवर्सिटी का भी 2.3 प्रतिशत सफलता रेट है। कई यूनिवर्सिटीज का सफलता रेट तो 1 प्रतिशत से भी कम है, जबकि  IITs और NITs जैसे संस्थानों ने पेटेंट कम फाइल किए हैं लेकिन उनका सफलता रेट 40 प्रतिशत से भी ऊपर है। बता दें कि पेटेंट फाइल करना पेटेंट लेने का सबसे शुरुआती चरण है। इसके लिए आपको अपनी रिसर्च का ड्राफ्ट तैयार करना होता है और ऑनलाइन अप्लाई करना होता है। ऑलाइन अप्लाई करने के लिए आपको कुछ निर्धारित फीस देनी होती है और इसके अलावा ड्राफ्टिंग में खर्च आता है। इसके बाद आपकी रिसर्च की जांच की जाती है और तय होता है कि आपको पेटेंट मिलेगा या नहीं। 

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