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मेघालय लिविंग रूट ब्रिज की तारीफ क्यों कर रहे PM मोदी? कहानी दिलचस्प है

प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात में मेघालय के अनोखे जड़ वाले पुलों की तारीफ की है। यह पुल बिना किसी मशीन के सदियों की मेहनत से अपने आप तैयार होते हैं और समय के साथ और भी ज्यादा मजबूत होते जाते हैं।

Nongriat Double Decker Bridge

नोंग्रियात डबल डेकर पुल, Photo Credit: Social Media

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 'मन की बात' के 135वें एपिसोड में मेघालय के इन पुलों के बारे में बताया है। उन्होंने कहा कि मेघालय में जो जड़ वाले पुल हैं, वह कुछ दिनों या सालों में नहीं बनते हैं। इनको बनने में कई साल लग जाते हैं। रबर के पेड़ों की जड़ों को धीरे-धीरे एक सही दिशा में बढ़ाया जाता है। इन जड़ों को पानी के ऊपर से ले जाया जाता है। समय बीतने के साथ, यह जड़ें एक बहुत मजबूत पुल बन जाती हैं। यह पुल सीमेंट या लोहे के नहीं होते हैं। इन्हें वहां रहने वाले लोग पेड़ों की जड़ों को मोड़कर बनाते हैं। यह पुल जैसे-जैसे पुराने होते हैं उतने ही मजबूत होते जाते हैं।

 

इन पुलों को बनाने के लिए भारतीय रबर के पेड़ों का इस्तेमाल होता है जिन्हें वैज्ञानिक भाषा में फिकस इलास्टिका कहते हैं। वहां के स्थानीय लोग बांस के ढांचे या खोखले किए गए पेड़ों के तनों का उपयोग करके इन जड़ों को नदी के दूसरी तरफ बढ़ने का रास्ता दिखाते हैं। जैसे-जैसे साल बीतते हैं यह जड़ें आपस में जुड़कर घनी हो जाती हैं।

 

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यह इतनी मजबूत हो जाती हैं कि इन पर लोग आसानी से चल सकते हैं। मेघालय में बहुत बारिश होती है लेकिन ये पुल उस नमी और पानी में भी खराब नहीं होते हैं यह जीवित पेड़ों का हिस्सा होते हैं। यह पुल कुदरती चीजों से बने हैं।  इन्हें बनाने में पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होता है। आधुनिक पुलों के मुकाबले यह बहुत ज्यादा टिकाऊ हैं भारी बारिश या बाढ़ आने पर भी ये टूटते नहीं हैं। यह पुल एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक चलते हैं और इनकी उम्र जितनी ज्यादा होती है यह उतने ही ज्यादा मजबूत होते जाते हैं।

वहां पहुंचने का रास्ता

मेघालय का 'डबल डेकर' पुल सैलानियों के बीच सबसे ज्यादा मशहूर है। यह पुल नोंग्रियात गांव के पास स्थित है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें एक के ऊपर एक दो पुल बने हुए हैं। यह घने जंगल और सुंदर झरनों के बीच बना है। अगर आप इस पुल तक पहुंचना चाहते हैं तो यह काफी मेहनत का काम है। यहां तक पहुंचने के लिए जंगल के रास्तों से होकर करीब तीन हजार सीढ़ियां चढ़नी और उतरनी पड़ती हैं। इसे दुनिया की सबसे अनोखी वास्तुकला में से एक माना जाता है यह इंसानों और कुदरत की मिली-जुली मेहनत का नतीजा है।

 

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मेघालय में घूमने लायक दूसरी जगहें

मेघालय में इन पुलों के अलावा और भी बहुत कुछ देखने लायक है। आप चेरापूंजी में बड़े-बड़े झरने देख सकते हैं। इसके अलावा आप नोहकलिकाई फॉल्स की खूबसूरती का आनंद ले सकते हैं और मावलिननॉन्ग गांव भी घूम सकते हैं जिसे एशिया का सबसे साफ-सुथरा गांव कहा जाता है। अगर आप यहां घूमने का प्लान बना रहे हैं तो अक्टूबर से अप्रैल के बीच का समय सबसे अच्छा रहता है। आप गुवाहाटी या शिलॉन्ग से गाड़ी करके यहां तक पहुंच सकते हैं और फिर आगे का रास्ता चलकर ही तय करना होता है। 


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