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पश्चिम एशिया के संकट से कैसे उबरेगा भारत? लोकसभा में PM मोदी ने बताया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि पश्चिम एशिया के देशों ने भारतीयों की सुरक्षा का वादा किया है। हम इन देशों के साथ संपर्क में हैं।

Narendra Modi

लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। Photo Credit: Sansad TV

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया के तनाव पर पहली बार संसद में संबोधित दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि प्रभावित देशों में काम कर रहे मिशन, भारतीयों की मदद कर रहे हैं। पर्यटकों से लेकर वहां काम कर रहे लोगों को मदद दी जा रही है। प्रभावित देशों में 24 घंटे निगरानी की जा रही है। सभी प्रभावित देशों को जरूरी जानकारियां दी जा रही है। देश-विदेश में भारतीयों की प्राथमिकता हमारी प्राथमिकता रही है। 3.75 से ज्यादा भारतीय लौट चुके हैं। ईरान से 1 हजार भारतीय सुरक्षित लौटे हैं। 700 से ज्यादा मेडिकल की पढ़ाई करने वाले युवा हैं। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'जब से यह युद्ध शुरू हुआ है, प्रभावित देशों में हर भारतीय को मदद दी गई है। मैंने ज़्यादातर पश्चिम एशियाई देशों के राष्ट्राध्यक्षों से 2 बार फ़ोन पर बात की है। सभी ने भारतीयों की सुरक्षा का भरोसा दिया है। संघर्ष के दौरान कुछ लोगों की जान गई है और कुछ घायल हुए हैं।'

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नरेंद्र मोदी, प्रधानमत्री:-
'मैं पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और इस कारण भारत में आई समस्या पर बात रखने के लिए उपस्थित हुआ हूं। वहां हालात चिंताजनक हैं। इस संकट को 3 सप्ताह से ज्यादा हो रहा है। इससे पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था और लोगों के जीवन पर विपरीत असर हो रहा है। भारत के सामने भी इस युद्ध ने अप्रत्याशित चुनौतियां खड़ी की हैं।'

पश्चिम एशिया के तनाव को रोकने के लिए भारत क्या कर रहा है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'मैंने सभी पक्षों से तनाव कम करने की अपील की है। नागरिक, एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर और ट्रांसपोर्ट पर हमला करने की भारत निंदा करता है। ऐसे हमले मंजूर नहीं हैं। मैंने सभी से तनाव कम करने की अपील की है। अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर रोक की अपील भारत करता रहा है। भारत हमेशा से मानवता के हित में और शांति के पक्ष में आवाज उठाता रही है। बातचीत और कूटनीति से ही राह निकालने की कोशिश हो सकती है।'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी:-
एक बड़ा सवाल यह है कि युद्ध का खेती पर क्या प्रभाव होगा। देश के किसानों ने हमारे अन्न के भंडार भर रखे हैं, इसलिए भारत के पास पर्याप्त खाद्यान्न है। हमारा यह भी प्रयास है कि खरीफ सीजन की ठीक से बुआई हो सके। सरकार ने बीते सालों में आपात स्थिति से निपटने के लिए खाद की पर्याप्त व्यवस्था भी की है।

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किसानों की सुरक्षा के लिए क्या कर रही है सरकार?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'देश के किसानों को संकट से बचाने के लिए ऐसे कदम उठाए गए हैं। 76 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा यूरिया उत्पादन भारत कर रहा है। भारत ने तेल और गैस की तरह खाद के आयात को भी बढ़ाया गया है। सरकार ने मैड इन नैनो यूरिया का विकल्प भी दिया है। सरकार किसानों को प्राकृतिक योजना के लिए भी प्रेरित कर रही है। किसानों को 22 लाख से ज्यादा सोलर पंप दिए गए हैं। डीजल पर उनकी निर्भरता कम हुई है। देश के किसानों को भरोसा दिलाता हूं सरकार किसानों की हर संभव मदद करती रहेगी।'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'देश के किसानों ने अनाज भंडार भर रखा है। भारत के पास पर्याप्त अनाज है। सरकार ने आपात स्थिति से निपटने के लिए अनाज की पर्याप्त व्यवस्था की है। अतीत में भी भारत सरकार ने किसानों पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ने दिया था। युद्ध के दौरान वैश्विक चेन सप्लाई में बाधा आई थी। दुनिया के बाजार में यूरिया की कीमत 3 हजार पहुंच गई थी, तब भारतीय किसानों को 300 रुपये में यूरिया मिली।'

 

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होर्मुज पर क्या निकाल रहा है भारत?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'बीते दिनों हॉर्मुज स्ट्रेट में फंसे हमारे कई जहाज भारत आए भी हैं। संकट के इस समय में देश की एक और तैयारी भी है, जो बहुत काम आ रही है। पिछले 11 साल में इथेनॉल के उत्पादन और उसकी ब्रॉन्डिग पर अभूतपूर्व काम हुआ है।'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'एक दशक पहले तक देश में सिर्फ एक से डेढ़ प्रतिशत इथेनॉल बैंडिंग कैपसिटी थी। आज हम पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल बैंडिंग के करीब पहुंच रहे हैं। इसके कारण प्रति वर्ष करीब साढ़े 4 करोड़ बैरल कम ऑयल इम्पोर्ट करना पड़ रहा है।'

सरकार का एथेनॉल प्लान क्या है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी:-
एक दशक पहले तक देश में सिर्फ एक से डेढ़ प्रतिशत एथेनॉल बैंडिंग कैपसिटी थी। आज हम पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल बैंडिंग के करीब पहुंच रहे हैं। इसके कारण प्रति वर्ष करीब साढ़े 4 करोड़ बैरल कम ऑयल इम्पोर्ट करना पड़ रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'बीते दिनों हॉर्मुज स्ट्रेट में फंसे हमारे कई जहाज भारत आए भी हैं। संकट के इस समय में देश की एक और तैयारी भी है, जो बहुत काम आ रही है। पिछले 11 साल में इथेनॉल के उत्पादन और उसकी ब्रॉन्डिग पर अभूतपूर्व काम हुआ है।'


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