अमेरिका को सिर पर बिठाया, ईरान से पंगा, खाड़ी के देशों की मजबूरी क्या है ?
इजरायल, अमेरिका और ईरान की जंग में खाड़ी के देश तबाह हो रहे हैं। तबाह होने की वजह भी है। इन्हीं देशों में अमेरिकी एयर बेस हैं। वहीं से ईरान पर हमले हो रहे हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीर। AI इमेज। Photo Credit: Sora
गल्फ कॉपरेशन काउंसिल (GCC) के देश इन दिनों जंग की आग में झुलस रहे हैं। इन देशों में आपसी लड़ाई नहीं है। न ही यहां गृह युद्ध की स्थिति है। तेल का कारोबार अच्छा चल रहा है, कमाई तगड़ी है, सीमाई विवाद नहीं है, पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसी नहीं हैं, फिर भी जंग की लपट में इन्हें जलना पड़ रहा है। ईरान, इन देशों के पेट्रोलियम प्लांट पर हमले कर रहा है, यहां मौजूद अमेरिकी ठिकाने तबाह हो रहे हैं। जिस संकट की आग में ये लोग झुलसे हैं, उसके जिम्मेदार भी, यही देश हैं। खाड़ी सहयोग परिषद के 6 सदस्य देश हैं। बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE)। ये देश, फारस की खाड़ी के पास बसे हैं। इन देशों के पास अपनी समृद्ध तेल और गैस संपदा है।
यूएस एनर्जी इनफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन की रिपोर्ट बताती है कि दुनिया के कुल पेट्रोलियम उत्पादन का लगभग 23 से 30 फीसदी हिस्सा उत्पादित होता है। इन देशों से हर दिन 1.7 करोड़ बैरल से ज्यादा उत्पादित होता है, दुनिया के कुल कच्चे तेल के भंडार का करीब आधा हिस्सा इनके पास है। समृद्धियों के ढेर पर बैठे होने के बाद भी ये देश अशांत हैं। पड़ोसियों से इन देशों की कभी नहीं बनी। आपस में अतीत में भिड़ते रहे हैं। पड़ोसियों पर इनका भरोसा कम है, अमेरिका पर ज्यादा है। अमेरिका पर ही इन्हें अशांत रखने के आरोप भी लगते रहे हैं।
यह भी पढ़ें: जानवर, सोना-चांदी दे रहे दान, ईरान की मदद को आगे आए कश्मीरी
खाड़ी के देशों की ईरान से बनती क्यों नहीं है?
ईरान ने 9 देशों पर हमला किया है, जहां बड़े पैमाने पर उन्हें नुकसान पहुंचा है। इन देशों में बहरीन, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, ईराक, जॉर्डन जैसे देश शामिल हैं। ये देश, ईरान से नजदीक हैं, कुछ देश इनमें से ईरान के पड़ोसी भी हैं, फिर भी ईरान उन्हें नहीं बख्शता है। वजह यह है कि इन देशों से ही ईरान पर हमले होते हैं। इजरायल और अमेरिका, इन देशों को अपने हितों के लिए इस्तेमाल करते हैं, ईरान को यह बर्दाश्त नहीं होता है। इन देशों के सामरिक हित भी टकराते हैं। 80 के दशक से ही ऐसी स्थिति है।
कहां-कहां हैं अमेरिकी सैन्य बेस?
- कतर: 10 हजार सैनिकों के साथ अल उदीद एयर बेस, यहां का सबसे बड़ा अमेरिकी एयर बेस है। कतर पर भी ईरान ने हमले किए हैं।
- बहरीन: नेवल सपोर्ट एक्टिविटी (NSA) बहरीन, अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े का मुख्यालय है। बहरीन को भी ईरान ने निशाना बनाया है।
- कुवैत: कैंप अरिफजान और अली अल-सालेम एयर बेस यहां हैं। अमेरिकी रसद और टैंकों के विशाल भंडार यही हैं। कुवैत पर ईरान ने मिसाइलें दागी हैं।
- संयुक्त अरब अमीरात (UAE): अल धफरा एयरबेस पर अमेरिकी फाइटर जेट और सर्विलांस ड्रोन तैनात हैं। यहां भी ईरान ने हमला किया है।
- सऊदी अरब: प्रिंस सुल्तान एयर बेस, अमेरिका के लिए बेहद खास है। यहां अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम है, पैट्रियल मिसाइलें तैनात है। यहां भी ईरान ने हमले किए हैं। यहां की कई रिफ्यूलिंग प्लेन, ईरान ने तबाह कर दिया।
- ओमान: अमेरिका ने यहां अपने सैन्य ठिकाने नहीं बनाए हैं लेकिन यहां के एयर बेस को इस्तेमाल करने की इजाजत अमेरिकी सेना को है। साल 1980 में अमेरिका के साथ एक रक्षा समझौता हुआ था। यहां डुक्म बंदरगाह, सलालाह बंदरगाह, थुमराईत और मसीराह एयर बेस का इस्तेमाल अमेरिका कर सकता है। ओमान पर भी ईरान ने हमला किया है। यहां समुद्री टैंकर को ही ईरान ने तबाह कर दिया था।
यह भी पढ़ें: 24 दिनों की जंग, सिर्फ तबाही, ईरान से जंग हारे ट्रंप-नेतन्याहू? इनसाइड स्टोरी
पश्चिम एशिया के दूसरे देशों में है अमेरिकी मौजूदगी
- इराक: ऐन अल-असद और एरबिल एयर बेस अमेरिका ने यहां बनाया है। यहां ISIS के खिलाफ अभियान और प्रशिक्षण केंद्र बनाया गया है। ईरान ने यहां भी धावा बोला है।
- जॉर्डन: अमेरिका के पास इस देश में मुवाफ्फक अल-साल्टी एयर बेस है। यहां से ईरान पर हमले कर सकता है। ईरान ने खतरा भांपते हुए यहां भी मिसाइलें दागी हैं।
- सीरिया: सीरिया में भी कट्टरपंथी ताकतों से निपटने के लिए अल तनफ बेस पर अमेरिकी जवान मौजूद रहते हैं। ईरान ने सीरिया में भी मिसाइलें दागी हैं।
- तुर्की: इंजिलिक एयरबेस में अमेरिकी मौजूदगी है। साल 1955 से ही यहां अमेरिका है। तुर्की, नॉर्थ अटलांटिक ट्रिटी ऑर्गेनाइजेशन का हिस्सा है। अमेरिकी एयरफोर्स की 39वीं विंग यहां मौजूद है।
यह भी पढ़ें: ईरान की तबाही, इजरायल-अमेरिका विलेन, UN के चार्टर का होगा क्या?
'पश्चिम' को सिर पर क्यों बिठाते हैं खाड़ी के देश?
दीवान लॉ कॉलेज में इंटरनेशनल स्टडी पढ़ाने वाले असिस्टेंट प्रोफेसर निखिल गुप्ता बताते हैं, 'खाड़ी के देश, ईरान पर भरोसा कर नहीं पाते हैं। ईरान के साथ उनके हितों का टकराव है। खाड़ी के ज्यादातर देश, पूरी तरह से व्यापार पर निर्भर हैं। पश्चिम एशिया में हमेशा अस्थिरता रही है, जिसे उन्हें ईरान नहीं निकाल सकता है। उन्हें सुरक्षा के लिए अमेरिकी मदद पर निर्भर रहना ही पड़ाता है। इन देशों की सेनाएं कमजोर भी हैं। सुरक्षा के लिए पूरी तरह से अमेरिका पर निर्भर हैं।
GCC की विदेश नीति, उनके अस्तित्व को बचाने की लड़ाई है। खाड़ी देशों के पास अकूत संपत्ति है लेकिन सेना नहीं। रक्षा के लिए अमेरिकी निर्भरता मजबूरी है। ईरान, खुद टकराव में है। इजरायल के साथ लंबा संघर्ष रहा है। 80 के दशक से ही ईरान, इजरायल को खतरे के तौर पर देख रहा है।
खाड़ी के देश, ईरान को वैचारिक और क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखते हैं। ये देश, सुन्नी बाहुल हैं, ईरान में शिया ज्यादा हैं, दोनों के बीच ऐतिहासिक और धार्मिक टकराव भी रहे हैं। ईरान, अगर परमाणु बम बनाएगा तो इन देशों के अस्तित्व पर खतरा मंडराएगा। अमेरिका, जिसे खतरा मानता है, ये देश, उसे भी खतरा मानते हैं। अमेरिका, इन देशों को सुरक्षा देता है। अमेरिका, यहां क्षेत्रीय सुरक्षा बनाने का भी काम करता है।
खाड़ी के देशों के सबसे बड़े खरीदार भी अमेरिका और पश्चिमी देश रहे हैं। खाड़ी के देश, अब रूस और चीन जैसे देशों के साथ भी रिश्ते दुरुस्त कर रहे हैं। नए हमलों के बाद, ईरान के साथ ऐसे संबंधों की उम्मीद भी बेमानी लग रही है। ईरान के साथ रिश्ते और बिगड़ने वाले हैं। अब खाड़ी के देश भी ईरान के हमलों का जवाब देने वाले हैं।
और पढ़ें
Copyright ©️ TIF MULTIMEDIA PRIVATE LIMITED | All Rights Reserved | Developed By TIF Technologies
CONTACT US | PRIVACY POLICY | TERMS OF USE | Sitemap


