प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही अपने पुराने दफ्तर को छोड़कर नए आधुनिक ऑफिस में शिफ्ट होने वाले हैं। जानकारी के अनुसार, उनका ऑफिस 14 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन शिफ्ट हो सकता है। यह नया कॉम्प्लेक्स 'सेवा तीर्थ' नाम से जाना जाएगा, जो सेंट्रल विस्टा रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट का हिस्सा है। यहां तीन अलग-अलग इमारतें बनाई गई हैं- सेवा तीर्थ-1 जो कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के लिए है, सेवा तीर्थ-2 जो कि कैबिनेट सचिवालय है और सेवा तीर्थ-3 जो कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) और NSCS के लिए है। सेवा तीर्थ -2 पिछले साल सितंबर में यहां शिफ्ट हो चुका है।
प्रधानमंत्री कार्यालय के शिफ्ट होने के साथ ही एक युग का अंत हो जाएगा जो कि 1947 में देश की आजादी के बाद से ही साउथ ब्लॉक में था। एक बार PMO खाली हो जाएगा तो पुराने साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक को एक बड़े सार्वजनिक म्यूज़ियम में बदल दिया जाएगा। इसका नाम होगा 'युग युगीन भारत संग्रहालय'। इसके लिए 19 दिसंबर 2024 को फ्रांस की म्यूजियम डेवलपमेंट एजेंसी के साथ समझौता भी हो चुका है।
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1189 करोड़ की लागत
यह पूरा सेवा तीर्थ (एग्जीक्यूटिव एनक्लेव) प्रोजेक्ट लार्सन एंड टुब्रो कंपनी ने बनाया है। इसकी लागत करीब 1189 करोड़ रुपये है और यह 2,26,203 वर्ग फुट में फैला हुआ है। इसके पास ही प्रधानमंत्री का नया आधिकारिक आवास भी बन रहा है, जिसे अभी एग्जीक्यूटिव एनक्लेव पार्ट-2 कहा जा रहा है।
यह पूरा बदलाव प्रधानमंत्री मोदी के उस विजन का हिस्सा है जिसमें वे औपनिवेशिक (कॉलोनियल) विरासत को हटाकर नए भारत की छवि बनाना चाहते हैं। पहले भी उन्होंने राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ कर दिया था।
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एक जगह काम करेंगे मंत्रालय
सरकार अब दिल्ली में बिखरे हुए मंत्रालयों को एक जगह लाने के लिए नए कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट भवन बना रही है। पिछले साल अगस्त में कर्तव्य भवन का उद्घाटन हो चुका है, जिसमें कई मंत्रालय पहले से काम कर रहे हैं। माना जा रहा है कि यह बदलाव न सिर्फ आधुनिक है, बल्कि प्रशासन को और तेज़ व सुचारु बनाने में भी मदद करेगा।