AAP छोड़ेंगे या स्वाति मालीवाल के रास्ते पर चलेंगे राघव चड्ढा, विकल्प क्या हैं?
राघव चड्ढा को पार्टी ने उपनेता के पद से हटा दिया है। अब अगर पार्टी उनके खिलाफ आगे भी ऐक्शन लेती है तो आखिर उनके पास क्या-क्या विकल्प हैं?

राघव चड्ढा । Photo Credit: PTI
पिछले कुछ दिनों से चर्चा में बने आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा इस वक्त अपनी ही पार्टी के निशाने पर आ गए हैं। पार्टी ने उन्हें राज्यसभा के उपनेता के पद से हटा दिया है। पार्टी का कहना है कि राघव चड्ढा राष्ट्रीय महत्त्व के मुद्दों को न उठाकर बेकार के मुद्दे उठा रहे हैं।
हालांकि, इस बीच यह सवाल भी उठता है कि अब राघव चड्ढा के पास क्या विकल्प हैं। पार्टी से अनबन होने के बाद क्या वह सदस्य रह जाएंगे या कि नहीं। क्या पार्टी उनकी सदस्यता छीन सकती है, क्या उनके द्वारा पार्टी छोड़ दिए जाने पर उनकी सदस्यता खुद-ब-खुद खत्म हो जाएगी या कि बनी रहेगी। इस लेख में हम इन्ही विकल्पों पर विचार करेंगे।
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1. अगर पार्टी उन्हें निकाल देती है तो क्या होगा?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि आम आदमी पार्टी राघव चड्ढा को पार्टी से निष्कासित कर देती है, तो क्या उनकी राज्यसभा सदस्यता खत्म हो जाएगी या नहीं? इसका जवाब सीधे-साफ शब्दों में 'नहीं' है।
भारत में सांसद की सदस्यता पार्टी की सदस्यता खत्म होने से स्वतः समाप्त नहीं होती। हालांकि, यहां पर भारतीय संविधान के दसवें शिड्यूल के मुताबिक एंटी-डिफेक्शन कानून लागू होता है। इस कानून के तहत यदि कोई सांसद अपनी पार्टी के खिलाफ काम करता है या पार्टी छोड़ कर किसी दूसरी पार्टी में शामिल हो जाता है तो उसकी सदस्यता जा सकती है।
हालांकि, ध्यान देने वाली बात यह है कि अगर पार्टी खुद किसी सांसद को निकालती है, तो वह सांसद स्वतः 'स्वतंत्र' (independent) की तरह काम कर सकता है, जब तक कि वह किसी दूसरी पार्टी में शामिल न हो जाए।
इस स्थिति में-
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राघव चड्ढा राज्यसभा सदस्य बने रहेंगे
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वह सदन में स्वतंत्र रुख अपना सकते हैं
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लेकिन उनकी राजनीतिक ताकत काफी सीमित हो जाएगी
2. अगर पार्टी उन्हें नहीं निकालती, लेकिन पद से हटा देती है?
दूसरा विकल्प यह है कि आम आदमी पार्टी उन्हें पार्टी में बनाए रखे लेकिन उनके संगठनात्मक पद या जिम्मेदारियां छीन ले।
इस स्थिति में-
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वह राज्यसभा सांसद बने रहेंगे
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पार्टी के 'व्हिप' का पालन करना होगा
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यदि वह पार्टी लाइन के खिलाफ वोट करते हैं, तो उनकी सदस्यता खतरे में आ सकती है
भारतीय संसद में 'व्हिप' बहुत महत्वपूर्ण होता है। अगर कोई सांसद व्हिप के खिलाफ जाता है, तो पार्टी उसे अयोग्य घोषित करने के लिए कार्रवाई कर सकती है।
3. अगर राघव चड्ढा खुद पार्टी छोड़ देते हैं?
यदि राघव चड्ढा खुद आम आदमी पार्टी की सदस्यता छोड़ते हैं, तो सीधे तौर पर एंटी-डिफेक्शन कानून लागू हो सकता है। इसका मतलब है कि उनकी राज्यसभा सदस्यता चली जाएगी। ऐसे में वह राज्यसभा के सदस्य नहीं रह जाएंगे।
4. अगर वह दूसरी पार्टी जॉइन कर लेते हैं?
यदि राघव चड्ढा किसी दूसरी पार्टी जैसे बीजेपी या कांग्रेस में शामिल हो जाते हैं, तो स्थिति और स्पष्ट हो जाती है।
इस केस में-
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एंटी-डिफेक्शन कानून सीधे लागू होगा
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उनकी राज्यसभा सदस्यता खत्म हो जाएगी
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यदि वह सांसद बने रहना चाहते हैं तो उन्हें फिर से चुनाव लड़ना होगा
यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि 'आया राम, गया राम' राजनीति को रोका जा सके।
5. पार्टी उन्हें 'सस्पेंड' कर दे तो?
पार्टी स्तर पर 'सस्पेंशन' (निलंबन) एक और विकल्प है।
इसका मतलब-
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वह पार्टी के सदस्य रहेंगे
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लेकिन सक्रिय राजनीति या निर्णयों से दूर रखे जा सकते हैं
हालांकि, संसद की सदस्यता पर इसका सीधा असर नहीं पड़ता।
6. क्या वह इस्तीफा देकर नया रास्ता चुन सकते हैं?
एक और विकल्प यह है कि राघव चड्ढा खुद राज्यसभा से इस्तीफा दे दें।
इस स्थिति में-
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उनकी सदस्यता तुरंत समाप्त हो जाएगी
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वह किसी भी पार्टी में शामिल हो सकते हैं
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लेकिन उन्हें फिर से संसद में आने के लिए चुनाव या नामांकन का रास्ता अपनाना होगा
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भूमिका सीमित होगी
राघव चड्ढा के सामने मौजूद विकल्प सिर्फ राजनीतिक फैसले नहीं हैं, बल्कि संवैधानिक सीमाओं से बंधे हुए हैं। Anti-Defection Law ने भारतीय राजनीति में स्थिरता लाने की कोशिश की है लेकिन साथ ही नेताओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को भी सीमित किया है।
अगर उन्हें पार्टी से निकाला जाता है, तो वह सांसद बने रह सकते हैं लेकिन उनकी भूमिका सीमित हो जाएगी। अगर वह खुद पार्टी छोड़ते हैं या दूसरी पार्टी में जाते हैं, तो उनकी सदस्यता पर खतरा लगभग तय है। वहीं, पार्टी के अंदर रहकर मतभेद संभालना उनके लिए सबसे सुरक्षित विकल्प हो सकता है।
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