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पॉपुलैरिटी से जलन या साथ न खड़े होने की सजा, राघव चड्ढा के साथ AAP ने क्या किया?

राज्यसभा में AAP के डिप्टी लीडर के पद से हटाए गए राघव चड्ढा ने अब पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और अब पार्टी नेता भी अब राघव के खिलाफ खुलकर बोल रहे हैं।

kejriwal vs raghav chadha

केजरीवाल और राघव चड्ढा के बीच बढ़ गई हैं दूरियां, Photo Credit: Social Media

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लंबे इंतजार के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि आम आदमी पार्टी ने अपने ही सांसद राघव चड्ढा के खिलाफ कोई कार्रवाई की है। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे राघव चड्ढा को AAP ने राज्यसभा में अपने डिप्टी लीडर के पद से हटा दिया है। अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के समय से ही पार्टी से जुड़े मुद्दों पर लगभग खामोश चल रहे राघव चड्ढा ने इस पर प्रतिक्रिया दी है कि उन्हें खामोश कराया गया लेकिन वह हारे नहीं हैं। कहा जा रहा है कि यह लगभग 2 साल से चल रही खामोशी के बाद का तूफान है जो अब कई और मोड़ भी ले सकता है।

 

एक समय पर 'केजरीवाल की आंखों के तारे', 'पंजाब के सुपर सीएम', 'AAP में नंबर 2' जैसी उपमाएं पाने वाले राघव चड्ढा अब ना तो पार्टी की बैठकों में जाते हैं और ना ही कभी पार्टी का कोई जिक्र करते हैं। यहां तक कि आबकारी नीति में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसौदिया को राहत मिलने पर भी राघव चड्ढा ने कोई ट्वीट तक नहीं किया था। पिछले साल अरविंद केजरीवाल के जन्मदिन पर भी राघव चड्ढा ने महज औपचारिकता निभा देने वाला एक ट्वीट किया था। साल 2024 और साल 2025 में राघव चड्ढा ने केजरीवाल के जन्मदिन पर बधाई वाले जो ट्वीट किए वे भी चर्चा का कारण बने थे।

अब राघव ने क्या कहा है?

 

राघव चड्ढा ने कहा, 'मुझे जब-जब संसद में बोलने का मौका मिलता है, मैं राज्यसभा में जनता के मुद्दे उठाता हूं। शायद ऐसे मुद्दे उठाता हूं, जिसे आमतौर पर संसद में नहीं उठाया जाता है। क्या जनता के मुद्दे उठाना, पब्लिक इश्यू की बात करना अपराध है? मैंने कोई गुनाह कर दिया, कोई गलती कर दी? यह सवाल मैं आज इसलिए पूछ रहा हूं क्योंकि आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय में कहा है कि राघव चड्ढा को संसद में बोलने पर रोक लगा दी जाए। ये मुद्दे उठाने के बाद देश के आम आदमी का तो फायदा हुआ लेकिन इससे आम आदमी पार्टी का क्या नुकसान हुआ? भला कोई मुझे बोलने से क्यों रोकना चाहेगा। कोई मेरी आवाज क्यों बंद करना चाहेगा। आप लोग मुझे असीमित प्यार दीजिए। आप मेरा हौसला बढ़ाते हैं। ऐसे ही मैं आपके मुद्दे उठाते रहूंगा। मैं आपसे हूं, आपके लिए हूं।'

 

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कभी केजरीवाल के सबसे खास रहे राघव चड्ढा को लंबे समय से ना तो AAP की किसी मीटिंग में देखा गया है और ना ही वह पार्टी से जुड़े मुद्दों पर बोलते हैं। वह राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं लेकिन टीवी डिबेट में पार्टी की ओर से नहीं जाते हैं। हाल ही में AAP ने असम विधानसभा चुनाव के लिए जो स्टार प्रचारों की लिस्ट निकाली उसमें भी राघव चड्ढा का नाम शामिल नहीं था। यह दिखाता है कि अब दूरी इतनी हो चुकी है कि इसे पाटना मुश्किल हो गया है।

साल भर में बढ़ गईं दूरियां?

16 अगस्त 2024 को अरविंद केजरीवाल को जन्मदिन की बधाई देने के लिए राघव चड्ढा ने जो ट्वीट किया वह चार पैराग्राफ का था लेकिन 16 अगस्त 2025 को किया गया ट्वीट एक लाइन का था। रोचक बात है कि अरविंद केजरीवाल 21 मार्च 2024 को ही गिरफ्तार हो चुके थे। केजरीवाल की गिरफ्तार को लेकर राघव चड्ढा ने लिखा था, 'हम आज सिर्फ एक इंसान को नहीं, एक फिनोमेनन को सेलिब्रेट कर रहे हैं। अरविंद केजरीवाल, आपने दिखाया है कि ईमानदारी और सेवी राजनीति का केंद्र हो सकते हैं। आप आधुनिक भारत के स्वतंत्रता सेनानी हैं। जैसा कि इतिहास ने दिखाया है कि सच ही जीतेगा। वे आपको जेल में तो रख सकते हैं लेकिन उस उम्मीद को नहीं डिगा सकते हैं जो आपने मेरे जैसे लाखों लोगों के मन में जगाई है।'

 

राघव चड्ढा आगे लिखते हैं, 'आपने भारत की राजनीति बदल दी और यह साबित किया कि एक आम आदमी है अगर भरपूर साहस दिखाए तो एक क्रांति की अगुवाई कर सकता है। आपकी लेगेसी राजनीति से ज्यादा है। सच और न्याय वाला यह आंदोलन अब रुकने वाला नहीं है। यह लड़ाई जारी रहेगी और हम आपके साथ हमेशा खड़े हैं। हैप्पी बर्थडे।'

 

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वहीं, 16 अगस्त 2025 को केजरीवाल को बधाई देते हुए राघव चड्ढा लिखते हैं, 'अरविंद केजरीवाल जी को जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई। वह स्वस्थ और खुश रहें और उनकी उम्र लंबा हो।' बस चंद शब्दों में बधाई निपटाते हुए राघव चड्ढा ने जो तस्वीर लगाई थी, उसमें सिर्फ केजरीवाल थे जबकि पिछले साल की बधाई में केजरीवाल के साथ राघव चड्डा और उनकी पूरी टीम थी। यह दिखाता है कि इसी एक साल के बीच में कुछ ऐसा हुआ है जिसने केजरीवाल और राघव के बीच की दूरियां बढ़ा दीं।

 

 

 

पंजाब में जलवा, बढ़ती दूरी और एक मुलाकात

साल 2022 में पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी। मुख्यमंत्री भगवंत मान बने लेकिन राघव चड्ढा पर कई बार आरोप लगे कि वह सुपर सीएम की तरह सरकार चला रहे हैं। उनके हस्तक्षेप का मतलब यह था कि वह अरविंद केजरीवाल का काम कर रहे थे। 2020 में दिल्ली राजेंद्र नगर विधानसभा सीट से विधायक बने राघव को 2022 में ही पंजाब से राज्यसभा भेजा गया। एक झटके में उनका रुतबा और बढ़ गया और वह पंजाब के राज्यसभा सांसद होने के नाते वहां और सक्रिय हो गए। कई बार शिरोमणि अकाली दल, कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेताओं ने राघव चड्ढा को लेकर सवाल भी उठाए। जब राघव चड्ढा और परणीति चोपड़ा की शादी हुई और पंजाब पुलिस इस शादी में खासी सक्रिय दिखी तब भी इस पर खूब सवाल उठे थे।

 

खैर, मुख्य कहानी शुरू होती है अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद राघव चड्ढा के लंदन चले जाने से। उस वक्त AAP नेताओं ने कई बार यह कहा कि राघव अपनी आंख का इलाज कराने के लिए गए हैं। 2024 का लोकसभा चल ही रहा था कि स्वाति मालीवाल और विभव कुमार का केस सामने आया। ठीक उसी वक्त राघव चड्ढा लंदन से लौटे। जिस दिन विभव कुमार को गिरफ्तार किया गया उस दिन राघव चड्ढा काले चश्मे लगाए दिखे और थाने तक पहुंच गए। तब एक बार को लगा कि सब ठीक हो जाएगा और राघव अब सक्रिय होंगे। उन्होंने अरविंद केजरीवाल से मुलाकात भी की।

 

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बाद में नवंबर 2024 में हेमंत सोरेन के शपथ ग्रहण में वह अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान के साथ मंच पर थे। दिसंबर 2024 में INDIA ब्लॉक की बैठकों में शामिल होते थे। हरियाणा के विधानसभा चुनाव के बारे में AAP की ओर से प्रवक्ता के तौर पर अपनी राय रख रहे थे।

जून 2025 के बाद बदले हालात?

 

उस वक्त भी राघव चड्ढा ने कई ऐसे मुद्दे उठाने शुरू कर दिए थे जो चर्चा का विषय बनने लगे थे। एयरपोर्ट पर मिलने वाले महंगे खाने का मुद्दा भी राघव चड्ढा ने उसी वक्त संसद में उठाया था और बाद में उड़ान कैफे खोलने का फैसला हुआ। यह दिखाता है कि नवंबर-दिसंबर 2024 तक राघव चड्डा कम से कम पार्टी में सक्रिय थे और कभी-कभार ही सही लेकिन अरविंद केजरीवाल के साथ दिखते जरूर थे।

 

जनवरी 2025 में दिल्ली के विधानसभा चुनाव के दौरान वह पार्टी का प्रचार भी कर रहे थे और अप्रैल तक पार्टी के मामलों पर प्रवक्ता के रूप में बोलते भी थे। वह केंद्र सरकार की तमाम नीतियों को लेकर भरपूर सवाल भी उठा रहे थे और अपनी पार्टी के चहेते बने हुए थे। जून 2025 में हुए उपचुनाव में गोपाल इटालिया और संजीव अरोड़ा की जीत पर भी राघव चड्ढा ने बधाई दी। हालांकि, इस दौरान वह पार्टी के मंचों से दूर हो चुके थे।

 

यहां से मामला बदलता दिखता है। दिल्ली हार चुकी AAP के प्रमुख नेता अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया पंजाब में सक्रिय हो गए थे और राघव चड्ढा दूर हो चुके थे। जुलाई-अगस्त में पंजाब में बाढ़ आई तो राघव चड्ढा मदद लेकर पहुंचे लेकिन ना तो उनके साथ AAP के नेता थे और ना ही उन्होंने इसकी सूचना AAP नेताओं को दी। उसी दौरान अगस्त के महीने में राघव चड्ढा ने सिर्फ एक ट्वीट करके केजरीवाल को जन्मदिन की बधाई दी लेकिन कोई मुलाकात नहीं की। तब से लेकर अब तक पंजाब, दिल्ली, गुजरात, हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्यों में AAP की कई बड़ी बैठकें हो चुकी हैं लेकिन राघव चड्ढा एक भी मीटिंग में नहीं देखे गए।


लोकप्रियता से जलन या साथ खड़े न होने की सजा?

कहा जा रहा है कि राघव चड्ढा अब जिन मुद्दों को उठाते हैं उनके बारे में ना तो पार्टी को सूचित करते हैं और ना ही पार्टी के निर्देश मानते हैं। वह अपने मन से मुद्दे उठाते हैं और ये मुद्दे ऐसे होते हैं जिनके चलते वह सीधे तौर पर सत्ताधारी बीजेपी पर सवाल नहीं उठाते। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि कम्युनिकेशन राघव चड्ढा ने बंद किया है या AAP ने ही उनको खुद से दूर कर दिया है। हाल ही में संजय सिंह औ मनीष सिसोदिया जैसे नेताओं ने यह कहा कि राघव के किसी और दल में जाने की सूचना तो नहीं है लेकिन दोनों ने सवाल पूछने वाले को यही सलाह दी कि यह सवाल राघव चड्ढा से भी किया जाना चाहिए।

 

राघव से बातचीत करने वाले कई पत्रकारों का भी कहना है कि वह इन मुद्दों पर कोई जवाब नहीं देना चाहते थे। हालांकि, अब AAP की ओर से हुई कार्रवाई के बाद राघव चड्ढा ने जो जवाब दिया है वह दिखाता है कि पानी सिर के ऊपर जा चुका है। यह भी कहा जा रहा है कि जब पार्टी को सबसे ज्यादा जरूरत थी और राघव चड्ढा ने उस वक्त दूरी बना ली थी इसी वजह से केजरीवाल उनसे नाराज हो गए। यह भी कहा जा रहा है कि अरविंद केजरीवाल की ओर से संदेश एकदम क्लियर है कि अब राघव चड्ढा से कोई बात नहीं हो सकती है।

 

अरविंद केजरीवाल पहले भी यही काम योगेंद्र यादव, कुमार विश्वास और स्वाति मालीवाल जैसे नेताओं के मामले में कर चुके हैं। एक बार जो नेता उनकी नजर से गया तो उससे ना तो उन्होंने बात की और ना ही उसे मनाने की कोशिश की गई। अब देखना यह होगा कि राघव चड्ढा तुरंत कोई कदम उठाते हैं या फिर 2028 तक का इंतजार करते हैं, जब उनका राज्यसभा का कार्यकाल खत्म होगा।

 


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