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संसद में Jiu-Jitsu के 'ग्रिप एंड चोक' वाली बात क्यों कही थी? राहुल ने बता दी वजह

राहुल गांधी ने एक बार फिर नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी ने इंडिया अमेरिका ट्रेड डील में किसानों के हितों के साथ समझौता किया है।

Rahul Gandhi Inside Parliament

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, Photo Credit: PTI

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राहुल गांधी ने एक बार फिर नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। भारत और अमेरिका के बीच हुए ट्रेड डील को लेकर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों, कपड़ा उद्योग और अन्य उद्योगों के हितों के साथ समझौता किया है। आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिका ने उनके ऊपर जो 'ग्रिप एंड चोक' अप्लाई किया है उससे वह परेशान हैं।

 

राहुल गांधी ने एक्स पर एक वीडियो जारी किया जिसमें उन्होंने बताया कि उन्होंने ग्रिप एंड चोक शब्द का इस्तेमाल क्यों किया। उन्होंने कहा कि यह शब्द उस स्थिति को बिल्कुल सही तरीके से कम्युनिकेट करता है जिससे प्रधानमंत्री इस वक्त गुजर रहे है। आगे उन्होंने कहा कि जुजुत्सु में जिस तरह से विपक्षी को नियंत्रण में लाने के लिए ग्रिप एंड चोक का प्रयोग किया जाता है उसी तरह से राजनीति में भी इसका प्रयोग किया जाता है लेकिन ज्यादातर यह छिपा हुआ रहता है।

 

यह भी पढ़ें: ‘ट्रंप ने मोदी की लगाम पकड़ रखी है’, भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बोले राहुल गांधी

एपस्टीन फाइल का जिक्र

राहुल गांधी ने कहा कि नरेंद्र मोदी एक तरफ चीन और दूसरी तरफ अमेरिका के बीच दबे हुए हैं। इस पर विस्तार से बात करते हुए वीडियो में उन्होंने कहा कि एक तरफ को अमेरिका में गौतम अडाणी के खिलाफ केस चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ प्रधानमंत्र नरेंद्र मोदी, मंत्री हरदीप पुरी और कारोबारी अनिल अमंबानी का नाम आया है।

 

उन्होंने कहा कि इस तरह से एक तरफ चीन है जो कि हमारे बॉर्डर पर बैठा है और दूसरी तरफ अमेरिका है। इन्हें दोनों के बीच प्रधानमंत्री खिंचे हुए हैं। आगे उन्होंने कहा, 'समस्या यह है कि नरेंद्र मोदी ने जो फेक इमेज बनाई है और जिस पर इतने पैसे खर्च होते हैं, उसी पर ग्रिप है, इसकी चाभी अब अमेरिका के हाथ में है और इसीलिए भारत के किसानों को समस्या में डाला जा रहा है।'

 

यह भी पढ़ें: हरदीप पुरी ने दिया राहुल को जवाब, बता दिया कि कैसे आया एपस्टीन फाइल्स में नाम?

डेटा को लेकर जताई चिंता

ट्रेड डील को लेकर उन्होंने कहा कि भारत को हर साल 100 बिलियन डॉलर का सामान खरीदने के लिए दबाव बनाया जाएगा यह अब तक हो रहे व्यापार का तीन गुना है लेकिन सबसे ज्यादा महत्त्वपूर्ण है डेटा। नरेंद्र मोदी हमारे देश का डेटा अमेरिका को हैंडओवर कर रहे हैं। हम लोग आने वाले समय में डेटा कॉलोनी बनने वाले हैं। हमारे जैसा बड़ा देश किसलिए और क्यों डेटा, कृषि सेक्टर और टेक्सटाइल इत्यादि को अमेरिका के हाथों सौंप रहा है?


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