2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े बड़ी साजिश के मामले में जेल में बंद शरजील इमाम को दिल्ली की अदालत से अंतरिम राहत मिली है। कड़कड़डूमा कोर्ट ने मंगलवार को उन्हें सात दिन की अंतरिम जमानत दी। वह 4 अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक जेल से बाहर रह सकेंगे। अदालत ने यह राहत उन्हें अपने चचेरे भाई की शादी में शामिल होने के लिए दी है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी ने यह आदेश दिया। शरजील इमाम इस मामले में UAPA के तहत आरोपी हैं और जनवरी 2020 से हिरासत में हैं। दिल्ली पुलिस ने 28 जनवरी 2020 को उन्हें गिरफ्तार किया था। दंगों से जुड़े बड़ी साजिश के मामले में पुलिस ने उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों का फैसला अभी अदालत में होना बाकी है।
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2020 के दिल्ली दंगों से जुड़ा है मामला
यह मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा से जुड़ा है। नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान इलाके में हिंसा भड़क गई थी। इस हिंसा में 53 लोगों की मौत हुई और 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। दिल्ली पुलिस ने शरजील इमाम समेत कई आरोपियों पर दंगों के पीछे बड़ी साजिश का हिस्सा होने का आरोप लगाया है। पुलिस ने उनकी नियमित जमानत का भी विरोध किया है। हाई कोर्ट में पुलिस ने शरजील इमाम और उमर खालिद को कथित साजिश का मास्टरमाइंड बताया है। यह पुलिस का पक्ष है और मामला अदालत में विचाराधीन है।
नियमित जमानत पर 30 सितंबर को सुनवाई
शरजील इमाम को मिली यह अंतरिम जमानत उनकी नियमित जमानत से अलग है। दिल्ली हाई कोर्ट में शरजील इमाम और सह-आरोपी उमर खालिद की नियमित जमानत याचिकाओं पर सुनवाई 30 सितंबर को होनी है। इससे पहले जुलाई में कड़कड़डूमा कोर्ट ने दोनों की नई जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। ट्रायल कोर्ट ने कहा था कि जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दोनों को जमानत देने से इनकार किए जाने के बाद वह उस समय उनकी नई याचिकाओं पर विचार नहीं कर सकता।
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सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी मामला
शरजील इमाम और उमर खालिद ने बाद में सुप्रीम कोर्ट के एक मई के फैसले का हवाला दिया था। इस फैसले में एक अन्य आरोपी को जमानत देते हुए जनवरी के फैसले के कुछ पहलुओं पर गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई थीं। ट्रायल कोर्ट ने जुलाई में कहा था कि दोनों फैसलों के बीच मतभेद का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट की बड़ी पीठ के सामने लंबित है। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी के अपने आदेश में शरजील इमाम और उमर खालिद को दोबारा जमानत मांगने के लिए कुछ परिस्थितियां तय की थीं।