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'धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सिर्फ शुरुआत', डिस्चार्ज होने के बाद बोले वांगचुक

सोनम वांगचुक श्रद्धांजलि देने के लिए दिल्ली के राजघाट पहुंचे। वहां से निकलने के बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा शिक्षा सुधार की दिशा में पहला कदम है।

Sonam Wangchuk on Dharmendra resignation

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक, Photo Credit: ANI

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NEET (UG) परीक्षा में गड़बड़ियों के खिलाफ आंदोलन का चेहरा बने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने कहा है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा शिक्षा सुधार की दिशा में सिर्फ पहला कदम है। उनका कहना है कि सिर्फ मंत्री बदल देने से शिक्षा व्यवस्था की समस्याएं खत्म नहीं होंगी। इसके लिए पूरे एजुकेशन सिस्टम में बड़े और लंबे समय तक असर करने वाले सुधार करने होंगे। सोनम वांगचुक ने यह बयान राजघाट पर श्रद्धांजलि देने के बाद मीडिया से बात करते हुए दिया।

 

सोमवार को राजघाट पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद मीडिया से बातचीत में सोनम वांगचुक ने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति और हर मंत्री जनता के प्रति जवाबदेह होता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार आंदोलन के दौरान किए गए अपने वादों को पूरा करेगी और शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और विश्वसनीय बनाने के लिए ठोस कदम उठाएगी।

 

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सोनम वांगचुक का पूरा बयान

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सोनम वांगचुक ने कहा, 'धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तो सिर्फ शुरुआत है। अगर अब इस मुद्दे को गंभीरता से लिया गया और सही तरीके से हल किया गया तो हमारा देश पहले से बेहतर बन सकता है। मुझे लगता है कि इस दिशा में प्रक्रिया शुरू भी हो चुकी है। अभी बातचीत चल रही है और मुझे उम्मीद है कि सकारात्मक संवाद के जरिए देश के हित में सबसे सही फैसला लिया जाएगा। आपसी समझ और सद्भाव के साथ हम एक बेहतरीन शिक्षा व्यवस्था बना सकते हैं।'

 

पब्लिक एग्जामिनेशन अमेंडमेंट बिल पर उन्होंने कहा, 'यह अच्छी बात है। इस पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए और पूरी तरह विचार-विमर्श के बाद जो सही कदम हो, वही उठाया जाना चाहिए।' प्रदर्शन कर रहे लोगों पर कार्रवाई को लेकर उन्होंने कहा, 'जो लोग शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन किए हैं उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। अगर कुछ शरारती लोग गलत मंशा से माहौल बिगाड़ने की कोशिश करते हैं तो ये नहीं कहा जा सकता कि उनके खिलाफ कुछ नहीं होगा। मैं साफ कहना चाहता हूं कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन करना हमारा संवैधानिक अधिकार है और उसका सम्मान होना चाहिए। बाकी मामलों में कानून अपना काम करेगा।'

 

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राजघाट जाने पर बोले सोनम वांगचुक

सोनम वांगचुक ने कहा, '26 दिनों का यह अनशन और आंदोलन खत्म होने के बाद मैं सबसे पहले राजघाट आया ताकि महात्मा गांधी को याद कर सकूं, उन्हें श्रद्धांजलि दे सकूं और देश को यह बता सकूं कि उन्होंने जो दिखाया था वह आज भी उतना ही सही और प्रासंगिक है जिनता 100 साल पहले था।'

 

उन्होंने आगे कहा, 'इस बार मुक्षे पूरा विश्वास हो गया कि गांधीजी का रास्ता आज भी पूरे देश में उतना ही प्रासंगिक है। मेरा मानना है कि यह आने वाले 100 साल, बल्कि 1000 साल तक भी लोगों का मार्गदर्शन करता रहेगा। मैं देश और दुनिया के लोगों से कहना चाहता हूं कि अगर अपनी बात रखनी है या किसी समस्या का समाधान चाहिए तो बापू के दिखाए शांति और अहिंसा के रास्ते पर चलें। इस रास्ते पर देर जरूर लग सकती है लेकिन आखिरकार समाधान जरूर निकलता है। हमने खुद इसका अनुभव किया है। पहली कोशिश में सफलता मिले यह जरूरी नहीं लेकिन लगातार प्रयास करते रहने से मंजिल जरूर मिलती है।'


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