पश्चिम एशिया (मध्य पूर्व) में चल रहे संघर्ष के कारण दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो रही है। इस वजह से श्रीलंका में डीजल-पेट्रोल की कमी हो गई थी। भारत ने अपने पड़ोसी नीति के तहत श्रीलंका की मदद की है।
श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने रविवार को नई दिल्ली का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि भारत ने तेजी से मदद की और डीजल-पेट्रोल भेजा।
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दिसानायके ने दिया धन्यवाद
राष्ट्रपति दिसानायके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, 'कुछ दिन पहले मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से बात की थी। हमने मध्य पूर्व संघर्ष के कारण श्रीलंका को हो रही ईंधन सप्लाई की समस्या पर चर्चा की। भारत की त्वरित मदद के लिए मैं आभारी हूं। कल कोलंबो में 38,000 मीट्रिक टन ईंधन पहुंच गया। विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर जी के निकट समन्वय के लिए भी धन्यवाद।'
इससे पहले इस हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीलंका के राष्ट्रपति से फोन पर बात की थी। दोनों नेताओं ने ऊर्जा सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने X पर लिखा, 'हमने भारत-श्रीलंका ऊर्जा सहयोग को मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण पहलों की प्रगति की समीक्षा की। हमने साझा चुनौतियों का सामना करने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई।'
भारत से मांगी मदद
भारतीय उच्चायोग कोलंबो के बयान के अनुसार, श्रीलंका पहले पश्चिम एशिया और सिंगापुर से डीजल-पेट्रोल लेता था। लेकिन मध्य पूर्व संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट में ब्लॉकेड के कारण सप्लाई रुक गई है।
इस समस्या के चलते श्रीलंका ने भारत से मदद मांगी। भारतीय कंपनी IOCL (इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड) के जरिए 38,000 मीट्रिक टन डीजल-पेट्रोल भेजा गया। इसमें 20,000 मीट्रिक टन डीजल और 18,000 मीट्रिक टन पेट्रोल शामिल है।
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यह मदद श्रीलंका में डीजल-पेट्रोल सप्लाई को लगातार बनाए रखने के लिए दी गई है। भारत और श्रीलंका दोनों देश निकट और विश्वसनीय साझेदार हैं।