आमतौर पर यह देखा जाता है कि एक देश के लोग अपने ही देश की अदालतों में अपील करते हैं। अंतरराष्ट्रीय मामला आने पर इंटनेरशनल कोर्ट तक मामला जाता है। अब कर्नाटक हाई कोर्ट में एक ऐसा मामला आया है जिसमें श्रीलंका की सुप्रीम कोर्ट के जज ने ही अपील की है। श्रीलंका के जस्टिस A H M D नवाज ने कर्नाटक हाई कोर्ट में अपील दायर की है कि उनके खिलाफ इंटरनेट पर छपी न्यूज रिपोर्ट्स को हटवाया जाए। वह चाहते हैं कि हाई कोर्ट गूगल को निर्देश दे कि गूगल इन न्यूज रिपोर्ट्स के URL को हटा दे।
पिछले गुरुवार को हाई कोर्ट के जस्टिस सचिन शंकर ने इस मामले पर सुनवाई की और भारत सरकार के सूचना और प्रोद्योगिकी मंत्रालय को एक नोटिस भी जारी कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता यानी श्रीलंका के जज से कहा है कि वह 'Colombo Telegraph' और 'Lankaenews' नाम की इन वेबसाइटों को एक ईमेल के जरिए नोटिस भी भेजें। इस मामले पर अगली सुनवाई अब 16 मार्च को होनी है। जिन खबरों का जिक्र जस्टिस नवाज ने अपनी याचिका में किया है वे साल 2015 से 2020 के बीच छपी हैं। उनका तर्क है कि इन खबरों से उनकी छवि को नुकसान पहुंचा है।
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क्या चाहते हैं श्रीलंका के जज नवाज?
श्रीलंका के जस्टिस नवाज का तर्क है कि उनके खिलाफ इन लेखों में लगाए गए सारे आरोप फर्जी हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी छवि को खराब करने के लिए लिखे गए हैं। जस्टिस नवाज का कहना है कि उन्होंने कई साल की मेहनत और अपने काम के दम पर अपनी छवि बनाई है। उनका कहना है कि ये लेख उनकी इमेज की हत्या, चरिक्ष हनने करने और उन्हें अपमानित करने के मकसद से लिखे गए हैं।
उनकी मांग है कि इस तरह के जितने भी लेख छपे हैं उन्हें हटवाया जाए ताकि उनके करियर और उनकी इमेज को और नुकसान ना पहुंचे।
भारत में क्यों की अपील?
इसी याचिका में इसका जवाब भी दिया गया है। जस्टिस नवाज ने लिखा है कि वह श्रीलंका की सुप्रीम कोर्ट के जज हैं इसलिए नैतिक आधार पर वह वहां याचिका दायर नहीं कर सकते। उनका तर्क है कि उनके खिलाफ छपे सारे आर्टिकल इंटनेरट पर हैं और गूगल के जरिए ही ये शेयर होते हैं इसलिए जिम्मेदारी गूगल की है। साथ ही, गूगल इंडिया का हेडक्वार्टर बेंगलुरु में है इसलिए कर्नाटक हाई कोर्ट में अपील दायर की है।
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जस्टिस नवाज ने अपनी याचिका में यह भी कहा है कि वह 12 सितंबर 2023 को इसके बारे में न्यूज पब्लिशर और गूगल को नोटिस भी भेज चुके हैं लेकिन ये आर्टिकल नहीं हटाए गए। अब वह कंपनी के हेडक्वार्टर और सर्वर की लोकेशन के हिसाब से यह याचिका लेकर कर्नाटक पहुंचे हैं और हाई कोर्ट से अपील की है।
क्या कहता है भारत का संविधान?
इसी याचिका में जस्टिस नवाज ने भारतीय संविधान की तारीफ करते हुए कहा है कि भारत की न्याय व्यवस्था में वह ताकत है कि वह न्याय स्थापित कर सके। बता दें कि उन्होंने यह याचिका भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत दायर की है। इस अनुच्छेद के तहत भारतीय नागरिकों के अलावा विदेशी नागरिक भी संरक्षण मांग सकते हैं और अपने जीवन, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और गैरकानूनी गिरफ्तारी को चुनौती दी जाएगी।