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गिरफ्तारी से नहीं बच पाएंगे पवन खेड़ा? सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मायने समझिए 

अपने खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई रोकने की मांग कर रहे पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट ने झटका दे दिया है। उनकी मांग अस्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह असम की अदालत में जाए।

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पवन खेड़ा, File Photo Credit: INC

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कांग्रेस के नेता पवन खेड़ा की मुश्किल बढ़ सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने अब उनके खिलाफ संभावित ऐक्शन पर लगी रोक को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत चाहिए तो वह असम की अदालतों का रुख करें। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा के खिलाफ फर्जी पासपोर्ट रखने का आरोप लगाने से जुड़ा है। बाद में तेलंगाना हाई कोर्ट पवन खेड़ा को राहत देते हुए उन्हें एक हफ्ते की अग्रिम जमानत दे दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के इस फैसले पर 15 अप्रैल को रोक लगा दी थी और कहा था कि उन्हें हाई कोर्ट का रुख करना चाहिए।

 

पवन खेड़ा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके मांग की थी कि उन्हें 20 मार्च तक संरक्षण दिया जाए और उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न हो। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पवन खेड़ा इसके लिए असम की सक्षम अदालत का रुख करें।

 

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जस्टिस जे.के. महेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की बेंच ने शुक्रवार को पवन खेड़ा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी की दलीलों पर गौर किया और कांग्रेस नेता की याचिका पर सुनवाई करने वाले असम की उस अदालत से कहा कि इस मामले में अगर सुप्रीम कोर्ट और तेलंगाना हाई कोर्ट की कोई प्रतिकूल टिप्पणी हो, तो उसे ध्यान में न रखा जाए। इस बेंच ने असम की अदालतों से यह भी कहा कि वे पवन खेड़ा की याचिका पर शीघ्र सुनवाई करें।

 

अब इस मामले में हिमंत बिस्व सरमा ने कहा है, 'मुझे लगता है कि पवन खेड़ा को कानून के सामने सरेंडर करना चाहिए। कानून से जितना भागिए, उतनी मुश्किल बढ़ती जाती है। इसलिए मैं कहूंगा कि आइए गुवाहाटी में सरेंडर कर दीजिए।'

 

क्या है मामला?

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने 5 अप्रैल को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया था कि असम के मुख्यमंत्री की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा के पास कई पासपोर्ट और विदेश में संपत्तियां हैं। पवन खेड़ा का कहना था कि हिमंत बिस्व सरमा ने अपने चुनावी हलफनामे में इन संपत्तियों का कोई जिक्र नहीं किया है। हिमंत और उनकी पत्नी ने इन आरोपों को झूठा और मनगढ़ंत बताया था। बाद में रिनिकी भुइयां सरमा ने पवन खेड़ा के खिलाफ एफआईआर करा दी थी। इसी के बाद असम की पुलिस दिल्ली में पवन खेड़ा के घर पहुंच गई थी। तब वह हैदराबाद चले गए थे और तेलंगाना हाई कोर्ट में याचिका दायर करके संरक्षण मांगा था।

 

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सुप्रीम कोर्ट ने 15 अप्रैल को तेलंगाना हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसमें खेड़ा को इस मामले में एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी गई थी। असम सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी थी कि यह क्षेत्राधिकार के अभाव का मामला है और पवन खेड़ा की याचिका में यह नहीं बताया गया कि उन्होंने तेलंगाना हाई कोर्ट का रुख क्यों किया? पवन खेड़ा के खिलाफ गुवाहाटी अपराध शाखा थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 175 (चुनाव से संबंधित झूठा बयान), धारा 35 (शरीर और संपत्ति की निजी रक्षा का अधिकार) और धारा 318 (धोखाधड़ी) के तहत मामला दर्ज किया गया था

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