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तमिलनाडु में बनेंगे रोल्स रॉयस के इंजन, स्टालिन ने लंदन में की डील

तमिलनाडु सरकार और लंदन के विल्सन पावर और ब्रिटानिया RFDI के साथ अहम समझौता हुआ है। इस समझौते का असर रोल्स-रॉयस का विस्तार अब तमिलनाडु में भी होगा। पढ़ें रिपोर्ट।

MK Stalin

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन। (Photo Credit: X/MK Stalin)

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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने लंदन  में कई कंपनियों के राज्य में निवेश का ऐलान किया है। उन्होंने 6 रणनीतिक समझौते किए हैं, जिनका मकसद तमिलनाडु के विकास पर जोर देना है। जो समझौते उन्होंने विदेशी कंपनियों के साथ किए हैं, उनमें तमिलनाडु के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का भी ख्याल रखा गया है।

एमके स्टालिन ने विल्सन पावर और ब्रिटानिया आरएफआईडी के साथ भी समझौता किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि तमिलनाडु की रिन्यूएबल एनर्जी इंडस्ट्री अब रफ्तार पकड़ेगी। तमिलनाडु में पश्चिमी देश और ज्यादा निवेश करेंगे।

एमके स्टालिन ने यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सेटर और इकोल इंटुइट लैब के साथ भी एक समझौता किया है। शिपिंग और समुद्री क्षेत्र में तमिलनाडु ने अहम समझौते किए हैं। अब लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस के साथ भी सरकार ने समझौता किया है।

 

समझौते की सबसे खास बात यह है कि रोल्स-रॉयस के साथ कारोबार बढ़ाने पर ध्यान दिया गया है।  ये समझौते 'तमिलनाडु राइजिंग' और यूरोप कॉन्क्लेव के दौरान हुए हैं।

क्या-क्या समझौते करके आए हैं एमके स्टालिन?

  • रोल्स-रॉयस: तमिलनाडु में रॉल्स-रॉयस का इंजन बनेगा, रिसर्च एंड डेवलेपमेंट का भी एक यूनिट आएगा।
  • एयरोस्पेस: इंटरनेशनल एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटिड के रिसर्च एंड डेवलेपमेंड विंग का विस्तार होगा।
  • विल्सन पावर: रिन्यूएबल एनर्जी के लिए 300 करोड़ रुपये का निवेश, 543 नौकरियां।
  • ब्रिटानिया RFID: तिरुपुर और नमक्कल में 520 करोड़ रुपये का निवेश, सप्लाई चेन में सुधार और 550 नौकरियां।
  • फ्रांस की इकोले इंटुइट लैब और साक्षी एक्सीलेंस एकेडमी कोयंबटूर में डिजाइन संस्थान खोलेंगी।
  • यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सेटर के साथ रिसर्च और फैकल्टी एक्सचेंज।
  • चेन्नई में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर का विस्तार होगा, 200 नई नौकरियां मिलेंगी
  • समुद्री विश्लेषण और ब्लू इकोनॉमी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा 

रोल्स-रॉयस का खास क्यों?

रॉल्स-रॉयस एक ब्रिटिश लक्जरी कार और इंजन निर्माता कंपनी है।  साल 1904 में इस कंपनी की स्थापना हुई थी। कंपनी शानदार कस्टमाइज्ड कारें बनाती हैं। कंपनी की स्थापना चार्ल्स रॉल्स और हेनरी रॉयस ने की थी। दशकों तक सिर्फ रजवाड़ों और ब्रिटिश अधिकारियों तक ही यह कार सीमित रही। आपके पास भले ही कितनी जागीर हो, कुछ तय मानकों को पूरा करने पर ही यह कार दी जाती थी। छोटे जमींदारों और रजवाड़ों को भी यह कार नहीं नसीब नहीं होती थी। यह कार अपनी विरासत और डिजाइनिंग के लिए मशहूर है। आज भी यह कार सड़कों पर बेहद कम नजर आती है। कंपनी कम प्रोडक्शन करती है, जिससे कार की मांग हमेशा बनी रहे। अब इस डील से भारत में भी इंजन बनेगा। 

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